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Broken Heart Syndrome : मिल्खा दंपती की तरह हमसफर के साथ छोड़ने पर चंद दिनों में ही दूसरा भी बना पथगामी

Sun, 20 Jun 2021 04:38 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 20 Jun 2021 04:38 AM IST
सार

  • मनोचिकित्सकों ने पति-पत्नी के कुछ अंतराल में मौत को ‘ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम‘ नाम दिया
  • 91 वर्षीय मिल्खा की पत्नी निर्मल राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबाल खिलाड़ी थीं

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There are many such couples who died within a span of a few days after the death of their partner
मिल्खा सिंह - फोटो : social media

विस्तार

इसे दंपती का आपसी प्यार कहें या फिर कोरोना महामारी का कहर, देश में ऐसे कई दंपती हैं जो अपने हमसफर की मौत के चंद दिनों के अंतराल पर ही इस दुनिया को अलविदा कह गए।

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इन चंद लोगों में महान धावक मिल्खा सिंह भी हैं जिनका शुक्रवार रात को निधन हो गया। उनकी मौत से पांच दिन पहले ही उनकी पत्नी निर्मल कौर की भी कोरोना ने जान ले ली थी। मनोचिकित्सकों ने इसे ‘ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम’ नाम दिया है।  
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91 वर्षीय मिल्खा की पत्नी निर्मल राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबाल खिलाड़ी थीं। इन दोनों की शादी 58 साल पहले हुई थी और वे दोनों 65 वर्ष पहले एक दूसरे से मिले थे। दंपती की तीन बेटियों और बेटे जीव मिल्खा सिंह ने अपने माता-पिता के सच्चे प्यार और संबंधों की सराहना की।
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परिवार ने कहा कि उन्होंने बहुत हिम्मत दिखाई लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। शायद यह उनका सच्चा प्यार और संबंध ही थे कि दोनों ही पांच दिनों के अंतराल पर दुनिया को अलविदा कह गए। इस तरह से दुनिया से जाने वालों में सिर्फ वे ही नहीं हैं, ऐसे कई उदाहरण और भी हैं। हालांकि, कोविड-19 से कितनी संख्या में दंपती की मौत हुई है, इस बारे में कोई आंकड़ा नहीं है।

जगन्नाथ और शांति पहाड़िया का तीन दिन के अंतराल में निधन
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया (89) और उनकी पत्नी शांति (पूर्व विधायक एवं राज्यसभा सदस्य) का निधन भी कुछ ही दिनों के अंतराल पर हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री का निधन गुरुग्राम के अस्पताल में 20 मई को हुआ था, जबकि उनसे दो साल छोटी पत्नी का निधन उसी अस्पताल में तीन दिन बाद हुआ। उनके बेटे ओम प्रकाश ने कहा कि दोनों जिंदगीभर साथ रहें और राजनीतिक रूप से सक्रिय रहें तथा एक साथ दुनिया को अलविदा कह गए।

इनसे भी नहीं सहा जा सका अलगाव
वरिष्ठ पत्रकार कल्याण बरुआ और नीलाक्षी भट्टाचार्य का भी कोविड से मई में गुरुग्राम के अस्पताल में निधन हो गया। उनका भी निधन एक दूसरे से तीन दिन के अंतराल पर हुआ था। लंबे समय तक साथ रहने के बाद राजस्थान के बीकानेर निवासी दंपती ओम प्रकाश और मंजू देवी भी एक दूसरे से अलग नहीं रह सकें। पिछले साल नवंबर में 15 दिनों के अंतराल पर इन दोनों निधन हो गया।

दुखद सूचना देने में बरतें एहतियात
ऐसे मामलों में, जिनमें दंपती में से एक का इलाज के दौरान निधन हो जाता है जबकि दूसरा रोग से उबर रहा होता है, उस बारे में मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह है कि निधन की खबर जीवनसाथी की स्थिति खतरे से बाहर होने के बाद ही साझा की जाए।

मुंबई के मनोचिकित्सक हरीश शेट्टी के अनुसार, निधन की खबर नहीं मिलने पर रोग से उबरने में मदद मिलती है। जब दंपती में एक शारीरिक रूप से बहुत ही कमजोर हो जाता है तब उसे ऐसी सूचना देने पर उसका मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ जाता है और स्थिति बहुत ही खराब हो जाती है।

उन्होंने कहा कि वह उन टीमों में शामिल रहे हैं, जिसने जीवनसाथी को रोग से उबरने के बाद (दुखद) सूचना दी। परिवार, चिकित्सक और सलाहकार की मौजूदगी जरूरी है।

जीवनसाथी के मौत की खबर से तनाव में आ जाता है व्यक्ति
गुरुग्राम की मनोचिकित्सक ज्योति कपूर ने कहा कि जीवनसाथी के निधन की खबर अकसर ही साथी को ‘ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम’ से ग्रसित कर देती है। यह हृदय की एक ऐसी अस्थायी स्थिति है जो काफी तनाव और अत्यधिक भावुक होने से पैदा होती है। उन्होंने कहा कि यह स्वाभाविक है कि दशकों तक साथ रहे दंपती के बीच भावनात्मक निर्भरता, लगाव हो जाता है, जिसमें किसी एक का निधन हो जाने पर दूसरा काफी तनाव में आ जाता है।


उन्होंने कहा कि हमारे व्यक्तिगत अनुभव और अध्ययन से यह पता चलता है कि पत्नी की मृत्यु के बाद पति की मृत्यु का खतरा 18 प्रतिशत होता है, जबकि इसकी उलट स्थिति में यह खतरा करीब 16 प्रतिशत होता है।

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