फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   The worst flood in Europe in 100 years, more than 200 lives were lost, the Netherlands set an example

दुनिया में मौसम: यूरोप में 100 साल की सबसे भयंकर बाढ़, 200 से अधिक की गई जान, नीदरलैंड ने पेश की मिसाल

Tue, 20 Jul 2021 04:46 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Tue, 20 Jul 2021 04:46 PM IST
सार

यूरोप के कई देश जैसे जर्मनी, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड और स्पेन में बारिश ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अधिकांश देशों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। जहां कई यूरोपीय देशों में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है वहीं नीदरलैंड ने अपने जल प्रबंधन से एक मिसाल पेश की है, वहां भारी बारिश के बाद भी कोई जनहानि नहीं हुई है। 

विज्ञापन
The worst flood in Europe in 100 years, more than 200 lives were lost, the Netherlands set an example
यूरोप में बारिश - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

रिकॉर्ड बारिश के कारण यूरोप की कई नदियों के किनारे टूट गए हैं और नदियों का पानी शहरों में तेजी से बढ़ रहा है। बाढ़ ने यूरोप के कुछ हिस्सों को जनमग्न कर दिया है। इससे यूरोप को 70 हजार करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। बाढ़ की चपेट में आकर 200 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। अब भी वहां सैंकड़ों लोगों के लापता होने की खबर है। बेल्जियम में बाढ़ से 20 लोगों की मौत हो जाने के कारण आज वहां राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया गया है। 

विज्ञापन


बाढ़ से यूरोप के कुछ देशों में कैसे हैं हालात है इस पर नजर डालते हैं। 

 1.जर्मनी
बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान जर्मनी को हुआ है। यहां अब मरने वालों की संख्या 100 से अधिक हो गई है। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जर्मनी का राइनलैंड-पैलाटिनेट और नॉर्थ राइन-वेस्टफालिया क्षेत्र है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिमी जर्मनी के आरवेलर प्रशासन ने बताया है कि मोबाइल नेटवर्क के ठप्प पड़ जाने के कारण 1300 लोगों के लापता होने का अनुमान है। बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों में बहुत नुकसान हुआ है। रेल और सड़क संपर्क लगभग टूटे गए हैं और भारी तबाही का मंजर है। वित्त मंत्री ओलाफ़ स्कोल्ज़ के एक बयान के मुताबिक बाढ़ से हुई बर्बादी की भरपाई के लिए 300 मिलियन यूरो की ज़रूरत पड़ेगी।
विज्ञापन


2.बेल्जियम
बेल्जियम भी बाढ़ से प्रभावित है। बेल्जियम के प्रधान मंत्री अलेक्जेंडर डी क्रू का मानना है कि यह अब तक की सबसे विनाशकारी बाढ़ हो सकती है। बाढ़ के कारण कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई है। राहत और बचाव कार्यों के लिए चार प्रांतों में सेना को लगाया गया है। बाढ़ से 20 लोगों की मौत के कारण बेल्जियम ने आज राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


3.स्विट्जरलैंड
स्विट्जरलैंड के लोगों ने भी पिछले कुछ समय में भारी बारिश का नजारा देखा है। बारिश की वजह से झीलें और नदियां उफान पर आ गई थीं। कुछ हिस्सों में स्थिति अब स्थिर है लेकिन अभी भी खतरा बना हुआ है।  ल्यूसर्न,  थून और  बासेल झील को लेकर सबसे अधिक खतरा महसूस किया जा रहा है।  हालांकि तीनों में जल स्तर गिर रहा है। आरे नदी, जो राजधानी बर्न से गुजरती है वह भी अभी स्थिर हो गई है, जिससे शताब्दी की सबसे भयानक बाढ़ आने का खतरा टल गया है। हालांकि नदियों और झीलों को सामान्य होने में अभी कई दिन लग सकते हैं। एसोसिएशन ऑफ कैंटोनल बिल्डिंग इंश्योरर्स के मुताबिक बाढ़ से यहां करीब 490 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। 


4. लक्ज़मबर्ग 
यहां भी भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। बाढ़ के पानी से देश में भारी क्षति हुई है और आपातकालीन सेवाएं खतरे में पड़ गई थीं। हालांकि स्थिति अभी नियंत्रण में है और हालात में धीरे-धीरे सुधार आ रहा है। 

5. नीदरलैंड
नीदरलैंड में भी भारी बारिश हुई है। मीयूज नदी के किनारे बसे कस्बों और गांवों में हजारों लोगों से अपने घरों को जल्दी छोड़ने का आग्रह किया गया है। लिमबर्ग प्रांत में बढ़ते पानी की वजह से लोग अपने घर छोड़कर जा रहे हैं।
हालांकि भारी बारिश के बावजूद यहां किसी के मौत की खबर नहीं है। इसकी एक बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि नीदरलैंड में जल प्रबंधन का एक लंबा इतिहास रहा है और इस आपदा की स्थिति में उसकी सफलता दुनिया को बाढ़ से निपटने के लिए मिसाल पेश कर रही है।  
यह देश सदियों से समुद्र और उफनती नदियों से जूझ रहा है। तीन बड़ी यूरोपीय नदियां - राइन, मीयूज़ और शेल्ड्ट का डेल्टा नीदरलैंड में है, और इसकी अधिकांश भूमि समुद्र तल से नीचे है। सरकार का मानना है कि देश के 60% हिस्से में बाढ़ आने का जोखिम बना हुआ है। लेकिन नीदरलैंड ने अपने जल प्रबंधन के बुनियादी ढांचे की बदौलत बड़ा नुकसान रोक लिया है। इसके जल प्रबंधन को  दुनिया में सबसे अच्छा माना जाता है। जल प्रबंधन का काम सरकार की एक शाखा लोक निर्माण और जल प्रबंधन महानिदेशालय करता है। वहीं देश की पानी की समस्याओं का प्रबंधन स्थानीय रूप से निर्वाचित निकाय करती है जिसका एकमात्र कार्य पानी से जुड़े सभी पहलूओं को देखना है जिसमें बाढ़ से लेकर अपशिष्ट जल तक शामिल है। यहां एक "जल बोर्ड" भी है जिसकी स्थापना 1255 में लीडेन शहर में हुई थी। यानी इस तरह सदियों पहले ही नीदरलैंड के शासकों को ये एहसास हो गया था कि इसे मजबूत जल प्रबंधन की आवश्यकता है।


भारी बारिश के लिए जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा बड़ा कारण
वैज्ञानिकों के मुताबिक़, जलवायु परिवर्तन की वजह से इस बार दुनिया के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण अधिक पानी वाष्पित हो जाता है, जिससे वर्षा और हिमपात की मात्रा में वृद्धि होती है। साथ ही, गर्म वातावरण का मतलब है कि यह अधिक नमी धारण कर सकता है जिससे वर्षा की तीव्रता भी बढ़ जाती है। 


 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed