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‘अछूत’ भाजपा को बनाया कांग्रेस विरोधी राजनीति की धुरी 

Fri, 17 Aug 2018 06:51 AM IST
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 17 Aug 2018 06:51 AM IST
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The untouchables anti-Congress pivot made by BJP
अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : amar ujala

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी विपक्ष की नजर में ‘गलत पार्टी में सही व्यक्ति’ थे। वर्ष 1980 में उन्होंने जिस भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की थी, उसे लंबे समय तक राजनीतिक रूप से अछूत माना जाता रहा। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, पीवी नरसिंह राव समेत दूसरे दलों के मित्रों ने कई बार सार्वजनिक तौर पर भाजपा की विचारधारा की आलोचना करते हुए वाजपेयी को गलत पार्टी में सही व्यक्ति करार दिया।

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हालांकि यही भाजपा वाजपेयी के नेतृत्व में अचानक अछूत से सर्व स्वीकार्य बनी। एक समय में महज शिवसेना और अकाली दल का समर्थन हासिल करने में सफल रही भाजपा 22 दलों का नेतृत्व कर देश की राजनीति में कांग्रेस विरोध की धुरी बन गई। देश की आजादी के बाद वर्ष 1952 के पहले आम चुनाव में ही आचार्य कृपलानी, राम मनोहर लोहिया से लेकर जेपी तक ने कांग्रेस के विरोध में मजबूत विपक्ष की नींव रखने की कोशिश की। आपातकाल के बाद वर्ष 1977 में हुए आम चुनाव में कांग्रेस को पहली बार केंद्र की सत्ता गंवानी पड़ी।
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केंद्र में जनता पार्टी की सरकार तो बनी, मगर गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री बनने का अवसर नहीं आया। इसी प्रकार वर्ष 1989 और 1991 में भी केंद्र में गैरकांग्रेसी सरकार आई, मगर इन सरकारों के मुखिया वीपी सिंह और चंद्रशेखर की पृष्ठभूमि कांग्रेसी थी। इस कड़ी में देश को वाजपेयी के रूप में विशुद्ध गैरकांग्रेसी पीएम मिला। वाजपेयी ही पहले शख्स थे, जिन्होंने गठबंधन की राजनीति को पांच साल तक सफलतापूर्वक चला कर भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए कांग्रेस को भी चुनाव पूर्व गठबंधन करने पर मजबूर कर दिया।
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वाजपेयी विपक्षी दलों के लिए ‘अछूत’ भाजपा में योग्य व्यक्ति थे। सभी पार्टियों में उन्हें दिल से सम्मान देने वाले बड़े नेताओं की लंबी सूची है। वर्ष 1996 के तेरह दिन की सरकार में खुद चंद्रशेखर ने विश्वास प्रस्ताव में वाजपेयी को लोकसभा में इसका उलाहना दिया था। हालांकि इसके ठीक दो साल बाद 1998 में वाजपेयी ने धुर समाजवादियों जार्ज फर्नांडीज, शरद यादव, नीतीश कुमार जैसे नेताओं का साथ हासिल कर भाजपा को सर्व स्वीकार्य बनाया। इसके बाद वर्ष 1999 आते आते तो भाजपा के अछूत होने का सवाल बौना हो गया और पार्टी कांग्रेस विरोधी राजनीति की धुरी बन गई।

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