भारत में पांव पसारता 'आईएस': टेलीग्राम पर 'अल्लाह की किताब' देकर सिखाते हैं 'आईईडी' बनाना, टर्निंग प्वाइंट पर 'चरमपंथ'
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस्लामिक स्टेट/इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवेंट/इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया/दाएश/इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी)/आईएसआईएस विलायत खुरासान/इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और शाम-खुरासन (आईएसआईएस-के) जैसे संगठनों को आतंकवादी संगठन के रूप में अधिसूचित किया है...
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अफगानिस्तान सहित कई देशों में फैल चुका आतंकी संगठन 'इस्लामिक स्टेट' (आईएस) अब भारत में तेजी से पांव पसारने लगा है। यह अलग बात है कि इराक और सीरिया जैसे तथाकथित गढ़ों में यह संगठन अपनी पहचान खोने की कगार पर खड़ा है। 2016 के दौरान जम्मू-कश्मीर में चर्चित आतंकी बुरहान वानी जब एनकाउंटर में मारा गया, तो आईएस ने कश्मीर घाटी में अपने फैलाव का प्लान तैयार किया था। इस्लामिक स्टेट की मैगजीन 'रुमैया' के 'जिहाद' शीर्षक से छपे एक लंबे चौड़े लेख में उक्त बातों का उल्लेख है। भारत में 'इस्लामिक स्टेट' अब टेलीग्राम पर 'अल्लाह की किताब' देकर गुमराह हो चुके युवाओं को विस्फोटक सामग्री 'आईईडी' तैयार करना सिखा रहा है। एनआईए की मानें तो यह संगठन दर्जनभर राज्यों में इंटरनेट के जरिए अपनी जड़ें मजबूत कर रहा है। 27 आरोपियों को ट्रायल के बाद दोषी करार देना, साबित करता है कि देश में आईएस 'चरमपंथ' टर्निंग प्वाइंट पर है।
जांच एजेंसी के एक बड़े अधिकारी बताते हैं, अफगानिस्तान से बाहर यह संगठन इंटरनेट के जरिए अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा है। 'आईएस' की थ्योरी किसी भी तरह से परिणाम तक पहुंचने की है। उसके लिए हिंसा और युद्ध को जायज बताया गया है। यह चरमपंथी संगठन 'अल्लाह की किताब' तो कभी 'पैगंबर की सुन्नत' का जिक्र करता है। संगठन द्वारा ऐसा प्रचार किया जा रहा है, जिसमें वह खुद को अल्लाह की तरह बताता है। वीडियो टेप में कहा जाता है कि जो कोई भी 'आईएस' की बातों का विरोध करेगा, उसका मतलब वह 'अल्लाह' का विरोध कर रहा है। ऐसे विरोधियों को किसी भी तरह से खत्म करना जायज है। इनकी प्रचार सामग्री में शरिया कानून लागू करना और हत्या जैसे अपराध के लिए सार्वजनिक तौर पर फांसी दे देना या हाथ काटना, जैसी बातें लिखी हैं। भारत में आईएस का सबसे बड़ा खतरा 'आईईडी' को लेकर है। ये आतंकी इंटरनेट पर ही ‘आईईडी’ तैयार करना सिखा देते हैं। विस्फोटक सामग्री आदि जुटाने के लिए इस आतंकी संगठन ने लोकल स्तर पर हैंडलर रख लिए हैं।
साल 2016 में जब बुरहान वानी मारा गया तो आईएस ने घाटी में युवाओं के उग्र माहौल को भुनाने की कोशिश की थी। ऑडियो-वीडियो टेप जारी कर युवाओं को भड़काया गया। मैसेजिंग एप 'टेलीग्राम' की मदद से आईएस ने दबिक, रुमैया, इस्तोक और दार-अल-इस्लाम जैसी पत्र-पत्रिकाओं में लिखा, किसी देश को डराने और काफिरों को मौत के घाट उतारने के लिए सैन्य विशेषज्ञ या मार्शल आर्ट का जानकार होना जरूरी नहीं है। इसके लिए बंदूक या राइफल की अनिवार्यता नहीं है। आईएस का मकसद है, अल्लाह के दुश्मनों को सबक सिखाया जाए। एक अधिकारी के मुताबिक, भारत में यह चरमपंथी संगठन टर्निंग प्वाइंट पर पहुंच गया है। अनेक राज्यों में इसके हैंडलर मौजूद हैं। सितंबर 2016 में एनआईए का खुलासा चौंकाने वाला था। केरल से 22 लोग, जिनमें 13 पुरुष, छह महिलाएं और तीन बच्चे थे, वे आईएस में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान पहुंच गए थे। एनआईए ने गत सप्ताह 'आईएस' की विचारधारा से प्रेरित 37 मामलों की जानकारी दी थी। ये सभी मामले आतंकी हमले, साजिश और फंडिंग से जुड़े थे। इन मामलों में कुल 168 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। 31 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और 27 आरोपियों को ट्रायल के बाद दोषी करार दिया गया है। आईएस के मामलों की बढ़ती संख्या के चलते एनआईए को सार्वजनिक तौर पर अपील जारी करनी पड़ी। अगर आप इंटरनेट पर चरमपंथ से जुड़ा कुछ देखते हैं तो एनआईए से 011-24368800 पर संपर्क करें।
आईएस को लेकर अब सभी राज्यों की पुलिस और साइबर विंग को सचेत किया गया है। फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे खुले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रखी जा रही है। खासतौर पर एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रडार पर हैं। ऑनलाइन हैंडलर्स का डाटा जुटाया जा रहा है। स्थानीय भाषा में आईएस ग्रंथों का अनुवाद, साजिश, मॉड्यूल तैयार करना, हथियारों, गोला-बारूद, आईईडी की तैयारी व आतंकी फंडिंग के लिए लोकल हैंडलर्स, आईएस की मदद कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इन हैंडलर तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। एनआईए के मुताबिक, 'इस्लामिक स्टेट', केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और जम्मू-कश्मीर में सबसे अधिक सक्रिय है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस्लामिक स्टेट/इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवेंट/इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया/दाएश/इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी)/आईएसआईएस विलायत खुरासान/इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और शाम-खुरासन (आईएसआईएस-के) जैसे संगठनों को आतंकवादी संगठन के रूप में अधिसूचित किया है। ये चरमपंथी संगठन केंद्र सरकार द्वारा जारी गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की पहली अनुसूची में शामिल हैं। एक अधिकारी बताते हैं कि अब अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद आईएस को लेकर सुरक्षा एवं जांच एजेंसियां ज्यादा सक्रिय हो गई हैं। दिसंबर तक 'आईएस' के विभिन्न मामलों में कई बड़े हैंडलर की गिरफ्तारी हो सकती है।