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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण पर रोक लगाई
Mon, 06 Dec 2021 04:16 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 06 Dec 2021 04:16 PM IST
सार
पीठ ने आदेश दिया कि राज्य चुनाव आयोग को ओबीसी आरक्षण श्रेणी के संबंध में पहले से अधिसूचित चुनाव कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हालांकि सामान्य वर्ग सहित अन्य आरक्षित सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी आरक्षण पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने यह आदेश उस रिट याचिका पर दिया है जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने वाले महाराष्ट्र सरकार के अध्यादेश और अध्यादेश को प्रभावी करने के लिए राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई अधिसूचना को चुनौती दी गई है।
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पीठ ने कहा कि 27 फीसदी ओबीसी कोटा एक आयोग का गठन किए बगैर और स्थानीय सरकार द्वारा प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता के बारे में डेटा एकत्र किए बिना लागू नहीं किया जा सकता था। पीठ ने आदेश में कहा, ' डेटा एकत्र करने के लिए आयोग का गठन किए बिना राज्य चुनाव आयोग के लिए ओबीसी श्रेणी को आरक्षण नहीं दिया जा सकता है। यह पहला कदम है जो किया जाना चाहिए था।'
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पीठ ने आदेश दिया कि राज्य चुनाव आयोग को ओबीसी आरक्षण श्रेणी के संबंध में पहले से अधिसूचित चुनाव कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हालांकि सामान्य वर्ग सहित अन्य आरक्षित सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।
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पीठ ने यह भी आदेश दिया कि राज्य चुनाव आयोग अगले आदेश तक मध्यावधि या अन्य आम चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षित सीटों के संबंध में अधिसूचना जारी नहीं करेगा। महाराष्ट्र स्थानीय निकाय के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख मंगलवार है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह और राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील शेखर नफड़े पेश हुए। कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार, स्थानीय निकायों में आरक्षण के संबंध में विकास किशनराव गवली बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य मामलों में निर्धारित किए गए ट्रिपल परीक्षणों का पालन किए बिना अध्यादेश लाई।