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Pahalgam Attack: लश्कर चीफ हाफिज सईद से जुड़े पहलगाम आतंकी हमले के तार, उसकी भूमिका को लेकर हुआ बड़ा खुलासा?

Sat, 26 Apr 2025 09:09 AM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Sat, 26 Apr 2025 09:09 AM IST
सार

पहलगाम की बायसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान के प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के समूह ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने ली है। बताया जा रहा है कि टीआरएफ सीधे तौर पर हाफिज सईद और उसके डिप्टी कमांडर सैफुल्लाह खालिद के इशारे पर ही काम कर रहा है। 

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The strings of Pahalgam terrorist attack linked to Lashkar Chief Hafiz Saeed, a big revelation about his role?
पहलगाम हमले का हाफिज सईद से कनेक्शन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पहलगाम आतंकी हमले के तार लश्कर ए तैयबा प्रमुख और भारत के सबसे बड़ा दुश्मन हाफिज सईद से जुड़े हैं। बताया जा रहा है कि इस आतंकी हमले को सईद की शह पर अंजाम दिया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि धारा 370 हटने कश्मीर में सक्रिय टीआरएफ के आतंकियों ने स्थानीय आतंकी और घाटी के सक्रिय कार्यकर्ताओं की मदद से कायराना हरकत की। 

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पहलगाम की बायसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान के प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के समूह ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने ली है। बताया जा रहा है कि टीआरएफ सीधे तौर पर 26/11 हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और उसके डिप्टी कमांडर सैफुल्लाह खालिद के इशारे पर ही काम कर रहा है। 
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ऐसा भी कहा जा रहा है कि दोनों आतंकी पाकिस्तान से काम कर रहे हैं। भारतीय खुफिया एजेंसियों का कहना है कि टीआरएफ को न केवल वैचारिक बल्कि रसद और सामरिक मार्गदर्शन भी पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) से मिलता है।
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टीआरएफ में अधिकांश विदेशी लड़ाके शामिल हैं, लेकिन इसमें कई स्थानीय लोग और कश्मीर के कार्यकर्ता भी शामिल हैं, जो इन्हें सहायता और सुरक्षा प्रदान करते हैं। किसी बड़े हमले के बाद ये आतंकी आमतौर पर भूमिगत हो जाते हैं। जब तक उन्हें अपने पाकिस्तानी आकाओं से नए आदेश नहीं मिल जाते वे घने जंगलों में छिपे रहते हैं।

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कश्मीर घाटी में सक्रिय है टीआरएफ, कई हमलों में शामिल
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि टीआरएफ पिछले काफी समय से कश्मीर घाटी में सक्रिय है। पिछले साल सोनमर्ग, बूटा पथरी और गंदेरबल में हुए आतंकी हमले के पीछे भी इसी का हाथ था। अक्तूबर 2024 में बूटा पथरी  में एक आतंकी हमले में भारतीय सेना के दो जवानों सहित चार लोग मारे गए थे। इसी महीने सोनमर्ग में सुरंग निर्माण श्रमिकों पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें छह मजदूरों और एक डॉक्टर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पहलगाम हमले के मुख्य आरोपियों में से एक हाशिम मूसा को इन हमलों का भी संदिग्ध माना जा रहा है। सोनमर्ग हमले के बाद इस मॉड्यूल का एक प्रमुख व्यक्ति कुलगाम का ए+ श्रेणी का लश्कर आतंकवादी जुनैद अहमद भट्ट दिसंबर 2024 में दाचीगाम में एक मुठभेड़ में मारा गया था। समूह के अन्य सदस्य भागने में सफल रहे, और पास के जंगली इलाकों में तितर-बितर हो गए थे।


कब और कहां हुई आतंकी वारदात
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम शहर के निकट ‘मिनी स्विटरलैंड’ नाम से मशहूर पर्यटन स्थल पर मंगलवार दोपहर हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर पर्यटक हैं। यह 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद घाटी में हुआ सबसे घातक हमला है। एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि 26 मृतकों में दो विदेशी और दो स्थानीय निवासी हैं। हथियारबंद आतंकवादी 'मिनी स्विट्जरलैंड' में घुस आए और भोजनालयों के आसपास घूम रहे, खच्चर की सवारी कर रहे, पिकनिक मना रहे पर्यटकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। पाकिस्तान में स्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के छद्म संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी ली है।

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भारत ने लिए थे पांच कड़े फैसले
पहलगाम हमले के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम को नई दिल्ली में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक हुई और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। 1960 की सिंधु जल संधि पर रोक लगाने, अटारी में एकीकृत जांच चौकी को तत्काल प्रभाव से बंद करने का भी फैसला किया। यह घोषणा की गई कि दक्षेस वीजा छूट योजना (एसवीईएस) के तहत पाकिस्तानी नागरिकों को भारत की यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और पाकिस्तानी नागरिकों को अतीत में जारी किए गए ऐसे किसी भी वीजा को रद्द माना जाएगा।

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