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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की किताब पर कुछ कहना नहीं चाहती कांग्रेस, टिप्पणी ना करने के पीछे बताई ये वजह....

Sun, 13 Dec 2020 10:43 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Sun, 13 Dec 2020 10:43 PM IST
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The Presidential Years: Pranab Mukherjee s book critiques Congress  leaders refuse to comment before reading in full
प्रणब मुखर्जी - फोटो : फाइल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी की नई किताब को पूरी तरह पढ़े बगैर टिप्पणी करना सही नहीं है। किताब में पार्टी को लेकर आलोचनात्मक विचार पेश किया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली और सलमान खुर्शीद ने कहा कि किताब पूरी पढ़ने के बाद ही वे इस पर कोई जवाब दे सकते हैं। 

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पूर्व केंद्रीय मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने कहा कि किताब का अभी तक विमोचन नहीं हुआ है और समझना होगा कि मुखर्जी ने किस परिप्रेक्ष्य में ये बातें लिखी हैं। मोइली मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार का हिस्सा थे। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जब तक पूरी तरह किताब को नहीं पढ़ते हैं, मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं।’’
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प्रकाशक रूपा बुक्स ने शुक्रवार को घोषणा की कि जनवरी 2021 में ‘‘द प्रेसीडेंशियल ईयर्स’’ का वैश्विक स्तर पर विमोचन किया जाएगा। प्रकाशक के मुताबिक, इस किताब में बंगाल के एक सुदूर गांव में लैंप की रोशनी में पलने-बढ़ने से लेकर राष्ट्रपति भवन में भारत के प्रथम नागरिक के तौर पर उनकी यात्रा का वर्णन है।
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पूर्व राष्ट्रपति ने पुस्तक में कांग्रेस के बारे में आलोचनात्मक विचार पेश किए हैं, जिसमें वह पांच दशकों से ज्यादा समय तक वरिष्ठ नेता रहे। मुखर्जी ने पार्टी नेताओं के इन विचारों का जोरदार खंडन किया है कि अगर वह वर्ष 2004 में प्रधानमंत्री बनते, तो वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी हार को टाल देती।

रूपा की तरफ से जारी किताब के कुछ अंश में उन्होंने लिखा है, ‘‘मैं इस विचार को नहीं मानता, मेरा मानना है कि मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद पार्टी नेतृत्व ने राजनीतिक फोकस खो दिया। सोनिया गांधी जहां पार्टी मामलों को देखने में विफल हो गईं। वहीं सदन से लंबे समय तक अनुपस्थित रहने से डॉ. मनमोहन सिंह ने अन्य सांसदों से व्यक्तिगत संपर्क खो दिया।’’


खुर्शीद ने कहा, जानने की जरूरत कि किस परिपेक्ष्य में लिखा 
पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी कहा कि टिप्पणी करने से पहले किताब को पूरी तरह पढ़ने की जरूरत है। खुर्शीद ने कहा, ‘‘...इतना व्यापक अनुभव वाला कोई व्यक्ति अगर कुछ लिखता है, तो पूरा पढ़ने की जरूरत है कि किस परिप्रेक्ष्य में ऐसा लिखा गया है।’’
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