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महाराष्ट्र सरकार का एलान, कोरोना से मृत किसी भी धर्म के व्यक्ति का शव जलाया जाएगा
Tue, 31 Mar 2020 12:18 PM IST
Rohit Ojha
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: Rohit Ojha
Updated Tue, 31 Mar 2020 12:18 PM IST
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कोरोना मरीज को ले जाते स्वास्थ्य कर्मी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
देश कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लड़ रहा है। पूरे देश में लॉकडाउन लगा है, लेकिन कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। संक्रमण को रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि कोराना वायरस से मरने वाले व्यक्ति के शव को जलाया जाएगा, चाहे वह किसी भी धर्म का हो। उसे दफनाने की अनुमति नहीं होगी।
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अंतिम संस्कार में सिर्फ पांच ही लोग शामिल होंगे। ऐसा माना जाता है कि शव को दफनाने से दूसरे में संक्रमण फैलने की संभावना होती है। इसी वजह से शव का जलाना ही संक्रमण को रोकने के लिए सबसे बेहतर तरीका है। इसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने निर्देश जारी किए हैं।
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मुंबई में बीएमसी के आयुक्त ने कहा कि कोरोना वायरस के मरीजों के सभी शवों को धर्म की परवाह किए बिना अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। उन्हें दफनाने की अनुमति नहीं होगी, बल्कि उन्हें जलाया जाएगा। अंतिम संस्कार में पांच से अधिक लोग शामिल नहीं होने चाहिए।
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All bodies of #COVID19 patients should be cremated irrespective of religion. Burial will not be allowed. The funeral should not involve more than 5 people: Praveen Pardeshi, Commissioner of Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) #Mumbai #Maharashtra pic.twitter.com/Bafy6DBiJ3
— ANI (@ANI) March 30, 2020
डब्लूएचओ की गाइडलाइंस में शव को आइसोलेशन रूम या किसी क्षेत्र से इधर-उधर ले जाने के दौरान शव के फ्लूइड्स के सीधे संपर्क में आने से बचने के लिए निजी सुरक्षा उपकरणों का समुचित इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है।
डब्लूएचओ के अनुसार मुर्दाघर कर्मियों और अंतिम संस्कार करने वालों के हाथों को पूरी तरह से साफ रखने जैसी मानक एहतियात बरतने की जरूरत है। निजी सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। अगर शव से फ्लूइड्स या स्त्राव के छीटें आने की संभावना हो तो चेहरे की सुरक्षा करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल भी करना चाहिए।