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लोकपाल को अपने आदेश की समीक्षा करने की शक्ति नहीं
Fri, 16 Oct 2020 03:27 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 16 Oct 2020 03:27 AM IST
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लोकपाल सदस्य
- फोटो : PTI
भ्रष्टाचार विरोधी संस्था लोकपाल खुद अपने आदेश की समीक्षा नहीं कर सकता है। खुद लोकपाल ने कहा है कि उसकी पीठ द्वारा पारित किसी आदेश पर पुनर्विचार याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि इससे संबंधित कानून में समीक्षा का प्रावधान ही नहीं है।
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दरअसल, लोकपाल के पास उसके आदेशों पर पुनर्विचार या समीक्षा की मांग करने वाली कई शिकायतें आ रही हैं। इन्हें देखते संस्था ने यह बात कही है। लोकपाल के तीन सदस्यों जस्टिस अभिलाषा कुमारी, जस्टिस डीके जैन और जस्टिस आईपी गौतम की समिति बनाई गई थी।
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इस समिति को पीठ द्वारा पारिज आदेशों पर पुनर्विचार संबंधी आग्रहों से संबंधित नीति पर विचार करने का काम सौंपा गया था।
लोकपाल के अध्यक्ष पिनाकी चंद्र घोष द्वारा गठित समिति ने छह अक्तूबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी। सोमवार को जारी आदेश में कहा गया कि समिति की राय है कि लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून, 2013 में पुनर्विचार के व्यापक अधिकार नहीं होने के कारण, भारत के लोकपाल की पीठ द्वारा पारित आदेश पर पुनर्विचार के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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समिति ने रिपोर्ट में कहा कि केंद्र सरकार से अनुरोध किया जा सकता है कि वह लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून में पुनर्विचार के अधिकार को शामिल करने के बारे में विचार करे। लोकपाल एवं लोकायुक्त संस्था का गठन लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून 2013 के तहत किया गया था और इसका काम चुनिंदा सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करना है।