फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   The killings that have taken place in Afghanistan in the name of Sharia law by taliban

अफगानिस्तानः हमसे पूछो क्या होता है शरिया कानून, अफगानियों के दिलों में बसता है हिंदुस्तान

Tue, 17 Aug 2021 06:52 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 17 Aug 2021 06:52 PM IST
सार

वरिष्ठ अधिकारी परवेज खान ने बताया कि प्यू रिसर्च सेंटर के एक शोध के माध्यम से दावा किया जा रहा है कि अफगानिस्तान के 99 फीसदी लोगों को शरिया कानून पसंद है। लेकिन सच्चाई यह है कि मुस्लिम समुदाय से होने के बाद भी लोग खुद अपने आप को और अपने परिवार को तालिबान के आतंक से बचाने की आखिरी जंग लड़ रहे हैं...

विज्ञापन
The killings that have taken place in Afghanistan in the name of Sharia law by taliban
अफगानिस्तान संकट - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा जमा लिया है। तालिबान ने इस बार किसी खून-खराबे से दूर रहने की बात कही है, लेकिन सच्चाई यह है कि काबुल-कंधार से लेकर मजार-ए-शरीफ तक में तालिबानी लड़ाके गली-गली में खून-खराबा कर रहे हैं। लोगों की संपत्ति से लेकर उनकी नाबालिग बेटियां और पत्नियां छीनी जा रही हैं। जिन्हें भी अपनी विचारधारा से अलग पाया जा रहा है, उनका सीधे कत्ल किया जा रहा है। इसमें गैर-मुस्लिम से ज्यादा मुस्लिम ही शामिल हैं। अफगान लोगों को अब किसी चमत्कार की भी उम्मीद नहीं है, जो उन्हें तालिबानियों के कहर से बचा सकता है। ऐसे में वे विदेश में बसे अपने करीबियों से संपर्क साध कर किसी तरह अफगानिस्तान से बाहर भागने की जुगत भिड़ा रहे हैं। लेकिन ज्यादातर मामलों में यह कोशिश व्यर्थ जा रही है।

विज्ञापन


एक संस्था के मिशन पर अफगानिस्तान के मजारे-शरीफ में तीन साल काम कर चुके वरिष्ठ अधिकारी परवेज खान (परिवर्तित नाम) ने अमर उजाला को बताया कि प्यू रिसर्च सेंटर के एक शोध के माध्यम से दावा किया जा रहा है कि अफगानिस्तान के 99 फीसदी लोगों को शरिया कानून पसंद है। लेकिन अफगानिस्तान में शरिया कानून के नाम पर जो कत्लेआम मचा हुआ है, उसका यहां से अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता। सच्चाई यह है कि मुस्लिम समुदाय से होने के बाद भी लोग खुद अपने आप को और अपने परिवार को तालिबान के आतंक से बचाने की आखिरी जंग लड़ रहे हैं।

विज्ञापन

भारत की छवि बेहतर

उन्होंने बताया कि भारत अफगानिस्तान के लोगों के दिलों में बसता है। इसका बड़ा कारण हमारे एतिहासिक सांस्कृतिक-आर्थिक संबंध रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही भारत ने पिछले 15-20 सालों में अफगानिस्तान में अनेक तरह के निर्माण कर लोगों की जिंदगी को बेहतर करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इससे लोग भारत के बेहद करीब आए हैं।

अफगानिस्तान के युवाओं को भारतीय प्रतिनिधियों द्वारा योग, कला, क्रिकेट और अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों में प्रशिक्षण देकर उन्हें आधुनिकता का अनुभव कराया जा रहा था। यहां की महिलाएं भारतीय महिलाओं की तरह सज-धज कर स्वयं के आधुनिक होने का अनुभव किया करती थीं, लेकिन अब यह सब उनके लिए एक सपने की तरह बीता हुआ कल है। वे एक बार फिर एक लबादे के पीछे कैद कर दी गई हैं। अब उनकी जिंदगी में फिर से अंधेरा छा गया है।

अफगानिस्तान आर्थिक तौर पर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। पहले यहां के कर्मचारियों का भ्रष्टाचार लोगों को भुखमरी के कगार पर ला रहा था तो अब उनके पास कुछ होने का कोई अर्थ नहीं रह गया है। कोई संपत्ति कब छीन ली जाए, कहा नहीं जा सकता।

यहां के लोगों के बीच भारत को उसी तरह देखा जाता है जैसे बेहतर करियर के लिए भारत के युवा अमेरिका या यूरोपीय देशों की ओर देखते हैं। अफगानिस्तान के युवा भारतीय संस्थाओं से बेहतर करियर का प्रशिक्षण लेकर भारत या यूरोपीय देशों में जाना पसंद करते हैं। लेकिन सांस्कृतिक करीबी होने के नाते उनकी पहली पसंद भारत ही है। यहां के अनेक परिवारों से उनके खून के रिश्ते भी उन्हें भारत आने के लिए प्रेरित करते हैं।

पाकिस्तान से दूरी

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने अफगानिस्तान में तालिबान शासन की वापसी को गुलामी की जंजीरें तोड़ने के समान बताया है। लेकिन अफगानिस्तान के लोगों के बीच पाकिस्तान एक खलनायक की तरह देखा जा रहा है। लोगों को लग रहा है कि तालिबान के जरिए उनकी जिंदगी को खराब करने में पाकिस्तान ने ही सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। अफगानी लोग पाकिस्तान को दुश्मन देश की तरह देख रहे हैं।

बेकार नहीं जाएगा भारत का प्रयास

अफगानिस्तान में काम कर चुके वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि इस पहाड़ी देश में भारत ने जो भी प्रयास किए हैं, वे व्यर्थ नहीं जाएंगे। अफगानिस्तान के युवाओं ने आधुनिकता की जो रोशनी भारत जैसे देशों के माध्यम से देखी है, वह देर-सबेर यहां का अंधियारा मिटाने के लिए काम करेगा। भारत ने कुछ बीज रोपे हैं, वे देर-सबेर लोकतंत्र का पेड़ बनकर उभरेंगे। अगर कभी संभव हुआ और अफगानिस्तान लोगों के द्वारा चुनी हुई सरकार की तरफ आगे बढ़ सका तो तालिबान को सहमति देने वाले देशों की स्थिति अफगानिस्तान के संदर्भ में बेहद खराब होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed