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सरकार और उसके विभागों की लड़ाई से बिगड़ रही न्यायपालिका की सेहत: सुप्रीम कोर्ट

Sun, 13 Sep 2020 06:06 AM IST
संजीव कुमार झा राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 13 Sep 2020 06:06 AM IST
सार

  • सुप्रीम कोर्ट सरकारी निकायों की आपसी मुकदमेबाजी से परेशान, कहा-निर्णय लेने से बचते हैं नौकरशाह
  • 44 साल पुराने मामले में फैसला, सरकार को एडवांस टैक्स रूलिंग सिस्टम पर विचार का दिया सुझाव

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The judiciary system deteriorated due to the fight between the government and its departments
supreme court - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार और उसके विभिन्न निकायों या विभागों के बीच मुकदमेबाजी ने न्यायापालिका की सेहत खराब कर दी है। केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और सरकार के बीच विवादों के समाधान में एक बड़ी बाधा यह भी है कि नौकरशाह फैसला लेने की जिम्मेदारी से बचते हैं। भविष्य में परिणाम भयावह होने के अंदेशे के चलते अफसर जिम्मेदारी लेने में हिचकते हैं।

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शीर्ष अदालत ने कहा, कराधान सरकार के लिए मुकदमेबाजी के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है। शीर्ष अदालत में कर विभाग की याचिका दर 87 फीसदी है। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एडवांस टैक्स रूलिंग सिस्टम पर विचार करने की सिफारिश की है। कोर्ट ने कहा, सरकार इस सिस्टम को विवादों के निपटारे के उपकरण के रूप में व्यापक बनाए। उसे निजी या सार्वजनिक क्षेत्रों से जुड़े मामलों में विभिन्न स्तरों पर लड़ने से बचना होगा।
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जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की पीठ ने कहा, एडवांस रूलिंग सिस्टम न केवल सरकार और उसके विभागों के बीच विवाद सुलझाने में मदद करेगा बल्कि विभिन्न स्तरों पर मुकदमेबाजी से बचाएगा। न्यूजीलैंड प्रणाली के आधार पर एडवांस टैक्स रूलिंग परिषद बनाना इसका एक तरीका हो सकता है। विवाद समाधान प्रणाली प्रभावी बनाने के लिए सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में कानूनी विशेषज्ञों की समिति बना सकते हैं। पीठ ने यह सिफारिश राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम और आयकर विभाग के बीच 44 साल पुराने विवाद का निपटारा करने वाले फैसले में की है।
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वित्त और कानून को मंत्रालय को भेजेंगे फैसला
पीठ ने उम्मीद जताई कि कोरोना के बाद सहमति से विवाद समाधान पर गंभीरता से विचार होगा। कोर्ट ने कहा, अधिकतर देशों में मध्यस्थता प्रभावशाली साबित हुई है। भारत ने तो सिंगापुर कंवेंशन ऑन मीडिएशन पर हस्ताक्षर किए है। हम समझते हैं कि मध्यस्थता को संस्थागत बनाने के लिए एक व्यापक कानून लाने के लिए गंभीरता से  विचार किया जाएगा। कोर्ट ने फैसले की प्रति वित्त और कानून एवं न्याय मंत्रालय को भेजने का निर्देश दिया है।


न्यायपालिका पर बढ़ रहा अनावश्यक बोझ
पीठ ने कहा, सरकार और निकाय मुकदमेबाजी में सबसे ऊपर हैं। केंद्र और राज्य अथॉरिटी बार-बार मुकदमेबाजी की नीति पर जोर देती है। उनका मानना होता है कि सभी चीजें अदालत में लाई जाएं, जिससे वे निर्णय लेने की जिम्मेदारी से बचे रहें। इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति से न्यायपालिका पर बोझ बढ़ रहा है। विधि आयोग की 126वीं रिपोर्ट में मुकदमेबाजी कम करने को लेकर की गई सिफारिश के 28 साल बाद वर्ष 2010 में राष्ट्रीय मुकदमेबाजी नीति बनी और 2015 में उसमें संशोधन हुआ।

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