फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   The judicial system must constantly evolve with the changing needs of society, said Justice Nath

Judiciary: 'समाज की बदलती जरूरतों के साथ न्याय व्यवस्था को निरंतर विकसित होना चाहिए', बोले विक्रम जस्टिस नाथ

Sat, 04 Apr 2026 09:31 PM IST
Kumar Vivek न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: Kumar Vivek Updated Sat, 04 Apr 2026 09:31 PM IST
सार

Judiciary: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने न्याय व्यवस्था में बदलाव और डिजिटल उपकरणों के उपयोग पर जोर दिया है। जानें कैसे न्यायिक प्रणाली रूढ़ियों से परे जाकर समाज की जरूरतों के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश कर रही है। पूरी खबर पढ़ें।

विज्ञापन
The judicial system must constantly evolve with the changing needs of society, said Justice Nath
जस्टिस विक्रम नाथ, सुप्रीम कोर्ट के जज - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि न्याय व्यवस्था को समाज की बदलती जरूरतों और नागरिकों की बढ़ती अपेक्षाओं के अनुरूप निरंतर विकसित होना चाहिए। उन्होंने इस प्रक्रिया को मजबूत करने में डिजिटल उपकरणों की भूमिका पर जोर दिया। वह गुजरात के जिला न्यायपालिका के जजों के दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे, जिसका विषय था ‘न्याय व्यवस्था को नया रूप देना-रूढ़ियों से परे जाना’।

विज्ञापन


जस्टिस नाथ ने कहा, न्याय व्यवस्था को समाज की बदलती जरूरतों, तकनीकी प्रगति और नागरिकों की बढ़ती अपेक्षाओं के अनुरूप निरंतर विकसित होना चाहिए। हमारे जैसे सांविधानिक लोकतंत्र में न्यायपालिका की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। न्यायपालिका सिर्फ निर्णय देने वाली संस्था नहीं है, बल्कि एक ऐसी संस्था है जो अधिकारों की रक्षा करती है, कानून के शासन को कायम रखती है और शासन में जनता के विश्वास को मजबूत करती है। इस संस्था की वैधता न सिर्फ इसके निर्णयों की सटीकता पर निर्भर करती है, बल्कि इसकी सुलभता, दक्षता और जवाबदेही बनाए रखने की क्षमता पर भी निर्भर करती है। उन्होंने कहा, न्याय व्यवस्था को नया रूप देना हमारे मूलभूत सिद्धांतों से विमुख होना नहीं है, बल्कि समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप ढलकर उन्हें और मजबूत करना है।

विज्ञापन

जज का काम सिर्फ न्यायालय तक सीमित नहीं

जस्टिस नाथ ने कहा, जज का काम सिर्फ न्यायालय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए कानून, तथ्यों और समाज की व्यापक धाराओं से निरंतर जुड़ाव आवश्यक है। एक जज केवल कानून का विद्यार्थी नहीं होता, वह जीवन का विद्यार्थी होता है, जो निरंतर सीखता, पुरानी धारणाओं को भुलाता और विकसित होता रहता है। पूर्वाग्रहों के बोझ के बिना प्रत्येक मामले को नए दृष्टिकोण से देखने की क्षमता निष्पक्ष न्याय प्रदान करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed