10 वर्ष में छह गुना बढ़ गई देश में हवाई जहाजों की संख्या
- 1000 रुपए तक घट चुका है प्रतिस्पर्धा से हवाई किराया
- पांच वर्ष में भारत होगा दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार
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विस्तार
मौजूदा केंद्र सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में उड़ान योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य था आम नागरिकों की हवाई यात्रा का सपना पूरा करना। इसके लिए देश में हवाई यातायात के नेटवर्क को बढ़ाने की जरूरत है। भविष्य में हवाई सेवाओं की जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार देश में हवाई अड्डों की संख्या मौजूदा स्तर से दोगुना करने की योजना पर काम कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (आईएटीए) की एक रिपोर्ट के अनुसार आने वाले एक दशक के भीतर भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बन जाएगा।
सरकार संसद में बता चुकी है कि अगले 15 वर्षों के दौरान देश में 100 नए हवाई अड्डे शुरू किए जाएंगे। इस पर चार लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा। 100 में से 70 हवाई अड्डे ऐसी जगह बनाए जाएंगे जहां अभी तक इस तरह की सुविधा नहीं है। वहीं बाकी हवाई अड्डे ऐसे स्थान पर बनाए जाएंगे जहां पहले से हवाई अड्डे हैं लेकिन उन पर हवाई सेवाओं का बोझ ज्यादा है।
दिल्ली में इसी वजह से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के तीन टर्मिनल के अलावा गाजियाबाद के हिंडन में वायुसेना के एयरबेस को वाणिज्यिक हवाई अड्डे के रूप में उपयोग किया जाने लगा है। जल्द ही नोएडा के पास जेवर में भी एक बड़ा हवाई अड्डा बनकर तैयार हो जाएगा। इससे दिल्ली का हवाई बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा।
100 हवाई अड्डों पर हो रहा काम
देश में इस समय लगभग 100 हवाई अड्डों पर हवाई सेवाओं का काम हो रहा है और सरकार 15 वर्ष में इनकी संख्या को बढ़ाकर 200 करने पर विचार कर रही है। घरेलू हवाई यात्रियों के लिहाज से देश का उड्डयन बाजार दुनियाभर में सबसे तेजी से उभर रहा है। घरेलू स्तर पर उड़ान सेवा मुहैया कराने वाली कई कंपनियों ने इस बाजार पर ज्यादा ध्यान देते हुए जरूरत के लिहाज से छोटे हवाई जहाजों के जरिए उड़ान सेवाएं शुरू कर दी हैं।
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चार कंपनियां
भारतीय विमानन बाजार को इसलिए भी उज्ज्वल माना जा रहा है क्योंकि दुनियाभर में एयरलाइन कंपनियों के बंद होने की संख्या हमारे देश से ज्यादा हैं। भारत में पिछले तीन वर्षों में केवल तीन ही एयरलाइन कंपनियां बंद हुई हैं। जेट एयरवेज, जेट लाइट, एयर कोस्टा और एयर कार्निवल वो कंपनियां हैं, जो बंद हुई हैं। भारत सरकार भी विमानन कंपनियों के व्यापार को लेकर सकारात्मक योजनाओं के साथ तैयार है। आर्थिक रूप से भी इस क्षेत्र को सहूलियत उपलब्ध कराई जा रही है।
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बाजार की तेज गति
अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय विमानन उद्योग यात्रियों की संख्या के लिहाज से वर्ष 2025 तक ब्रिटेन को पछाड़ कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा। भारतीय विमानन उद्योग पिछले दो वर्षों के दौरान 20 प्रतिशत से ज्यादा गति से बढ़ रहा है। आईएटीए के अनुसार इस समय अमेरिका, चीन और ब्रिटेन के बाद चौथे नंबर पर मौजूद भारत वर्ष 2025 तक ब्रिटेन को पीछे छोड़ देगा। साथ ही वर्ष 2030 तक इंडोनेशिया भी ब्रिटेन का पीछे छोड़ देगा।
तीन गुना बढ़ेंगे यात्री
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगले 20 वर्ष में हवाई यात्रियों की संख्या में काफी अच्छी वृद्धि होगी। वर्ष 2036 तक भारत में हवाई यात्रा करने वालों की सालाना संख्या बढ़कर 47.8 करोड़ पर पहुंच जाएगी। इस दौरान चीन भी अमेरिका को पीछे छोड़ देगा। चीन में हवाई यात्रियों की संख्या 20 साल में 92.1 करोड़ से बढ़कर डेढ़ अरब और अमेरिका में 40.1 करोड़ से बढ़कर एक अरब 10 करोड़ पर पहुंच जाएगी। आईटा ने बताया कि इन 20 साल में दुनिया भर में हवाई यात्रियों की सालाना संख्या चार अरब से बढ़कर सात अरब 80 लाख हो जाएगी।
रिपोर्ट के मुख्य तथ्य
- भारत 2020 तक जर्मनी और जापान को तथा 2023 तक स्पेन को पीछे छोड़ देगा। इसके बाद वर्ष 2024 के अंत तक वह ब्रिटेन को पछाड़ कर तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा।
- भारत में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में 18.28 फीसदी की दर से वृद्धि हो रही है, यह संख्या वर्ष 2018-19 में 243 मिलियन तथा वर्ष 2020 में 293 मिलियन तक पहुंच जाएगी।
- शीर्ष दो स्थानों पर अमेरिका और चीन बने कायम रहेंगे लेकिन अगले दशक के मध्य तक अमेरिका को पछाड़कर चीन पहले स्थान पर होगा। इसमें वर्ष 2037 तक पहले तीन स्थान पर क्रमश: चीन, अमेरिका और भारत के बने रहने की बात कही गई है, बशर्ते सरकारों की विमानन नीतियों में कोई खास बदलाव न हो।
- अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात में वर्ष 2018 में 10.43 फीसदी की वृद्धि हुई और यात्रियों की संख्या साढ़े करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। वर्ष 2020 तक यह आंकड़ा साढ़े सात करोड़ के पार जा सकता है।
मौजूदा स्थिति
वैश्विक विमानन बाजार में फिलहाल पहले नंबर पर अमेरिका, दूसरे नंबर पर चीन, ब्रिटेन तीसरे स्थान पर, स्पेन चौथे स्थान पर, जापान पांचवे और जर्मनी छठे स्थान पर है।
अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA)
- यह अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के लिए एक व्यापार संघ है। अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ 120 देशों के 280 अनसूचित अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस का एक समूह है।
- आईएटीए की स्थापना वर्ष 1945 में की गई थी। IATA का मुख्यालय कनाडा के मॉन्ट्रियल में है।
- यह संगठन हवाई यात्रा क्षेत्र से संबंधित नीति तथा मानक तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अतिरिक्त यह संगठन कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण भी उपलब्ध करवाता है।
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ईंधन की कीमतों का असर
भारतीय विमानन बाजार के सामने कई ऐसी समस्याएं हैं, जिनका ठोस निदान न खोजने पर यही विमानन क्षेत्र नकारात्मक परिणाम भी दे सकता है। ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और हवाई अड्डों में बुनियादी ढांचे की कमी ऐसी के कारण हैं। कच्चे तेल के दाम में आने वाली तेजी का असर विमानन उद्योग पर तुरंत दिखाई देता है। कंपनियों को इस वजह से टिकट के दाम बढ़ाने पड़ते हैं, ताकि वो अपना घाटा पाट सकें।