डाटा चुराने वाली चीनी कंपनियों पर होगा वार, रक्षा क्षेत्र की कौन सी सूचनाएं चुराई हैं, सरकार करेगी जांच!
केंद्र सरकार ने सोमवार को एक झटके में जिन 59 चाइनीज एप पर बैन लगाया है, उनमें टिकटॉक, यूसी ब्राउजर, डीयू बैटरी सेवर, वायरस क्लीनर, वी चैट और कैम स्कैनर जैसे मशहूर एप शामिल हैं...
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भारत-चीन सीमा पर चल रहे गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने 59 चाइनीज एप पर रोक लगाने की घोषणा कर दी है। दूसरे उत्पादों एवं तकनीकी उपकरणों को लेकर भी कई सख्त फैसले लिए जा रहे हैं।
ऐसी संभावना जताई जा रही है कि डाटा चुराने वाली चीनी कंपनियों पर बहुत जल्द एक बड़ा प्रहार हो जाए।
खासतौर पर, रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कौन सी सूचनाएं चुराई गई हैं, यह पता लगाने के लिए भारत में मौजूद संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों से पूछताछ हो सकती है। इस बाबत एक मैकेनिज्म तैयार किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता नवांक शेखर मिश्रा कहते हैं कि केंद्र सरकार ने अभी जो बैन लगाने की कार्रवाई की है, वह प्राथमिक कदम है।
बैन लगाए जाने से पहले इन कंपनियों ने हमारे देश के महत्वपूर्ण संस्थानों, जिनमें सैन्य प्रतिष्ठान भी शामिल हैं, अपने एप या दूसरे प्रोग्राम के जरिए सेंध लगाई है, उसका खुलासा होना जरूरी है।
केंद्र सरकार ने सोमवार को एक झटके में जिन 59 चाइनीज एप पर बैन लगाया है, उनमें टिकटॉक, यूसी ब्राउजर, डीयू बैटरी सेवर, वायरस क्लीनर, वी चेट और कैम स्कैनर जैसे मशहूर एप शामिल हैं।
इन एप पर बैन लगाने से पहले केंद्र सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों और सिक्योरिटी एजेंसी की रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा की थी। खासतौर पर सैन्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के पास ये एप होना, सरकार को खतरे का सबब नजर आया।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता नवांक शेखर मिश्रा, जो कि ऐसे कई केसों पर काम कर रहे हैं, बताते हैं कि चीनी कंपनियों ने हमारे देश में बड़े पैमाने पर सेंध लगाई है। सैन्य प्रतिष्ठान हो या कोई दूसरा सरकारी विभाग, वहां से डाटा चोरी किया गया है।
तीन साल पहले चीनी एप की पोल खुल गई थी
दर्जनों मामले हैं, जहां पर सीधे तौर से चीनी कंपनियां का हस्तक्षेप रहा है। यूसी ब्राउजर हमेशा से ही शक के दायरे में रहा है। 2017 में रक्षा मंत्रालय ने एक एडवायजरी जारी की गई थी, जिसमें लिखा था कि सेना में चीनी एप्स का इस्तेमाल बिल्कुल बंद कर दिया जाए।
जवानों से कहा गया कि वे अपना मोबाइल फोन फॉर्मेट कर लें। बतौर मिश्रा, मुंबई अटैक में हेडली ने जो भूमिका निभाई थी, चीनी एप भी कुछ वैसा ही कर रहे हैं। जब ये पकड़े जाते हैं तो इनके बड़े पदाधिकारी कानून के सामने नहीं आते।
एक ऐसे ही केस में यूसी ब्राउसर के इंडिया एवं इंडोनेशिया हेड डेमोन सी के खिलाफ पांच गैर जमानती वारंट जारी हुए, लेकिन वे अदालत में पेश नहीं हुए। एसबीआई और एलआईसी के लिंक यूसी ब्राउजर पर चल रहे थे।
केंद्र सरकार में सिक्योरिटी एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि खुफिया एजेंसियां अब पूरी तैयारी के साथ इन एप की जांच में जुट गई हैं। सभी मंत्रालय कम से कम दो तीन साल पहले तक का अपना डाटा चेक करेंगे।
सैन्य प्रतिष्ठान भी अपनी आईटी पॉलिसी में बदलाव ला रहे हैं। देश में मौजूद चीनी कंपनियों के अधिकारियों से डाटा चोरी को लेकर जल्द पूछताछ शुरू हो सकती है।