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1873 में रैगिंग से हुई थी पहली मौत, फिर कैसे भारत पहुंची रैगिंग

Sat, 26 Aug 2017 02:05 PM IST
amarujal.com, Presented By: आसिफ़ इक़बाल
amarujal.com, Presented By: आसिफ़ इक़बाल Updated Sat, 26 Aug 2017 02:05 PM IST
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The first ragging related death occurred in 1873_ragging in india
रैगिंग - फोटो : file photo
एम्स के ओप्टोमेट्री और न्यूक्लियरल मेडिसिन के सात बीएससी के छात्रों को कथित रूप से जूनियर छात्रों की रैगिंग करने व अनुशासनहीनता के आरोप में तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। 
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सूत्रों के अनुसार, हाल में बीएससी के प्रथम वर्ष के छात्रों से कथित तौर पर मारपीट की गई थी, जिसमें एक छात्र जख्मी हो गया था। पीड़ित छात्रों में से एक ने एम्स प्रशासन और पुलिस में इसकी शिकायत की थी। रैगिंग को दुनिया में अलग-अलग नामों से पहचाना जाता है। इसे हेजिंग, फेगिंग, बुलिंग, प्लेजिंग और हॉर्स प्लेइंग के नाम से भी जाना जाता है। 
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माना जाता है कि 7 से 8वीं शताब्दी में ग्रीस के खेल समुदायों में नए खिलाड़ियों में स्पोर्ट्स स्प्रिट जगाने के उद्देशय से रैगिंग की शुरुआत हुई। इसमें जूनियर खिलाड़ियों को चिढ़ाया और अपमानित किया जाता था। समय के साथ रैगिंग में बदलाव होता गया और सेना ने भी इसे अपना हिस्सा बना लिया। इसके बाद शिक्षण संस्थानों के छात्रों ने रैगिंग को अपना लिया। 
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कॉलेजों में बनने लगे छात्र संगठन

The first ragging related death occurred in 1873_ragging in india
रैगिंग - फोटो : File Photo
शैक्षिक क्षेत्र में जगह बनाने के बाद रैगिंग हिंसक हो गई और इसके लिए बाकायदा ग्रुप बन गए। 18वीं शताब्दी के दौरान महाविद्यालयों में छात्र संगठन बनाने का विशेष रूप से यूरोपीय देशों में प्रचलन शुरू हो गया।

इन संगठनों के नाम अल्फा, फी, बीटा, कपा, एपिसिलोन, डेल्टा आदि जैसे ग्रीक अक्षरों के नाम पर रखे जाने लगे, जिन्हें भाईचारे के रूप में देखा जाने लगा। रैगिंग की वजह से दुनिया में पहली मौत 1873 में हुई जब न्यूयॉर्क की कॉरनेल यूनिवर्सिटी की इमारत से गिरकर एक जूनियर छात्र की मौत हो गई।

 प्रथम विश्वयुद्ध के बाद रैगिंग बेहद खतरनाक हो गई। युद्ध से वापस लौटे सैनिकों ने कॉलेजों में प्रवेश लेना शुरू कर दिया और रैगिंग की नई तकनीक हैजिंग को ईजाद किया, जिसे उन्होंने मिलिट्री कैंप में सीखा था।

हालांकि सैनिकों के इस नए नियम से कॉलेज के आम छात्र वाकिफ नहीं थे, इसलिए उनकी और सैनिकों की झड़पें होने लगीं। 20वीं सदी के आते-आते पश्चिमी देशों में रैगिंग से जुड़ी हिंसक घटनाएं काफी तादाद में होने लगीं। 

आजादी से पहले भारत पहुंची रैगिंग

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रैगिंग - फोटो : file photo
भारत की आजादी से पहले रैगिंग का चलन अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा से शुरू हुआ। भारत में रैगिंग का अलग ढंग था। सीनियर और जूनियर के बीच दोस्ती बढ़ाने के लिए हल्की-फुल्की रैगिंग की जाती थी। शालीनता का परिचय दिया जाता था।

लेकिन 90 के दशक में भारत में रैगिंग के घातक रूप ले लिया। 1997 में तमिलनाडु सबसे ज्यादा रैगिंग का शिकार हुआ। 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने पूरे भारत में रैगिंग पर प्रतिबंध लगा दिया। वर्तमान में रैगिंग के मामले में श्रीलंका दुनिया में पहले स्थान पर है।  
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