किसान कमजोर है, इसलिए दिल्ली के प्रदूषण का ठीकरा उसके सिर पर फोड़ देते हैं...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बात केवल इतनी सी है कि अन्नदाता यानी किसान कमजोर है, इसलिए सब लोग दिल्ली के प्रदूषण का ठीकरा उसके सिर पर फोड़ देते हैं। अगर पराली जलाने का असर इतना ही होता तो वह सदैव होना था। यह शोर तो अभी पांच-छह साल पहले ही मचना शुरू हुआ है।
द एनर्जी एंड रिसॉर्स इंस्टिट्यूट (टीईआरआई) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि पूरे मौसम में खेतों में लगाई जाने वाली आग (पराली) और बायोमास से फैलने वाले प्रदूषण का योगदान महज 4 प्रतिशत है। ऑल इंडिया किसान संघर्ष कोऑर्डिनेशन कमेटी (एआईकेएससी) के संयोजक वीएम सिंह ने यह बात कही है।
उन्होंने कहा, हर बात पर किसान को कसूरवार ठहराना छोड़ दें। दशहरे के दिन दिल्ली की गली-गली में रावण जलता है, पटाखे भी छोड़े जाते हैं, इंडस्ट्री भी धुंआ फेंकती है, पावर प्लांट, गाड़ियां और दूसरे कई ऐसे कारक हैं, जो प्रदूषण के खतरनाक स्तर के लिए जिम्मेदार हैं।
सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वायरॉन्मेंट की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुमिता राय चौधरी का कुछ ऐसा ही कहना है। उनके मुताबिक, दिल्ली में अपना ख़ुद का ही प्रदूषण ज्यादा है। फसल सालभर तो कटती नहीं है। धान की कटाई का सीजन कुछ ही सप्ताह का होता है। ऐसे में प्रदूषण के खतरनाक स्तर के लिए किसान को दोष देना सही नहीं है।
दिल्ली में बढ़ते वाहन, बिजली उत्पादन संयंत्र, निर्माणकार्य और इंडस्ट्री आदि भी प्रदूषण के लिए उत्तरदायी है। इस बार प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए हर स्तर पर चेतना आई है। इसके लिए दोनों प्लान, इमरजेंसी प्लान और कॉम्प्रेहेन्सिव क्लीनर ऐक्शन प्लान पर काम शुरू हुआ है।
बदरपुर प्लांट बंद करना, डीजल जेनरेटर सेट पर रोक, निर्माणकार्य पर प्रतिबंध आदि इमरजेंसी प्लान में आते हैं। दूसरे प्लान में शॉर्ट टर्म और लॉंग टर्म योजनायें शामिल हैं। अच्छी बात यह है कि इस बार सभी एजेन्सी को अपने अपने काम के लिए टाइम बाउंड कर दिया गया है। प्लान नोटिफाइड भी हो गया है।अब जरूरत केवल इसे सख्ती और ईमानदारी से लागू करने की है। यह सब तय योजना के अनुसार हुआ तो राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण का स्तर कम हो जाएगा।
कौन सा वाहन फैलाता है कितना प्रदूषण
पीएम 2.5 के लिए सिर्फ वाहनों का आंकड़ा देखा जाए तो इससे होने वाले प्रदूषण का कुल योगदान लगभग 28 प्रतिशत है।इसमें ट्रक और ट्रैक्टर से सबसे ज्यादा 9 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है।दो पहिया वाहनों से 7 प्रतिशत, तीन पहिया वाहनों से 5 प्रतिशत और चार पहिया वाहनों से 3 और बसों से 3 फ़ीसदी प्रदूषण फैलता है।
धूल से कितना प्रदूषण फैलाता है....
दिल्ली में पीएम 2.5 के स्तर में धूल से फैलने वाले प्रदूषण का योगदान 18 प्रतिशत है।इसमें सड़क पर धूल से तीन फ़ीसदी प्रदूषण, निर्माण कार्य से 1, जबकि अन्य तमाम वजहों से 13 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है।
दिल्ली में PM 2.5 के स्तर को बढ़ाने में इंडस्ट्री का 30 प्रतिशत योगदान है।इसमें पावर प्लांट का 6, ईंटों का 8, स्टोन क्रैशर 2 प्रतिशत, जबकि अन्य छोटे-बड़े उद्योगों से 14 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है।