फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   The Delhi government in delhi high court that they will need 187 cryogenic tankers for 976 MT of oxygen

प्राणवायु का संकट: दिक्कत ऑक्सीजन की नहीं बल्कि कुशल प्रबंधन की है, अफसरों की लापरवाही पड़ रही जान पर भारी

Wed, 05 May 2021 07:08 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 05 May 2021 07:08 PM IST
सार

देश में 1631 टैंकर कर रहे 8500 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई, दिल्ली को 976 मीट्रिक टन ऑक्सीजन के लिए 187 क्रायोजेनिक टैंकर देने की मांग...

विज्ञापन
The Delhi government in delhi high court that they will need 187 cryogenic tankers for 976 MT of oxygen
ऑक्सीजन एक्सप्रेस में ऑक्सीजन सप्लाई टैंकर - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

देश की सभी ऑक्सीजन उत्पादक कंपनियां मिलकर इस समय लगभग 8500 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का रोजाना उत्पादन कर रही हैं। कोरोना की इस गंभीर स्थिति के बाद भी पूरे देश में ऑक्सीजन की मांग अभी भी इससे काफी कम है। इसके बाद भी देश के अनेक राज्यों में ऑक्सीजन सही समय पर सही जगह पर नहीं पहुंच पा रही है और इसके कारण लोगों की जान जा रही है। इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के लिए ऑक्सीजन को पहुंचाने की अव्यवस्था है जो लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।

विज्ञापन

हाई कोर्ट में हुई इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया है कि वह ऑक्सीजन की समुचित सप्लाई के लिए और अधिक क्रायोजेनिक टैंकरों की खरीद को मंजूरी दी है। जल्दी ही ये टैंकर देश को मिल जाएंगे और ऑक्सीजन की सप्लाई व्यवस्था ठीक हो जायेगी।

लेकिन आरोप है कि केंद्र सरकार की यह दलील भी खोखली है, क्योंकि देश में उत्पादित किये जा रहे कुल ऑक्सीजन 8500 मीट्रिक टन को पहुंचाने के लिए उपलब्ध टैंकरों की क्षमता का एक तिहाई ही काफी है। 1631 टैंकर कुल 23 हजार मैट्रिक टन ऑक्सीजन को भी कहीं पर ले जा सकते हैं, जबकि देश में आज इसका कुल उत्पादन मात्र 8500 मीट्रिक टन ही है। रेल मार्ग से इन टैंकरों को पहुंचाने पर यह समय और भी अधिक कम किया जा सकता है।

यानी स्पष्ट हुआ है कि समस्या ऑक्सीजन के उत्पादन या इसके परिवहन में लगे क्रायोजेनिक टैंकरों की नहीं, बल्कि इसे लेकर किये जा रहे प्रबंधन की है। दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष यही मामले सामने आने से केंद्र सरकार की जमकर खिंचाई हुई है। कोर्ट ने सरकार से सोमवार तक ऐसा खाका पेश करने को कहा है जिससे सभी राज्यों तक आवश्यक मात्रा में ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित की जा सके।

विज्ञापन
विज्ञापन

आधी भी नहीं मिल पा रही दिल्ली को ऑक्सीजन

दिल्ली सरकार ने कहा है कि चार मई को राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में 976 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग थी। लेकिन इसकी जगह उसे केवल 555 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिल पाई, जो कुल मांग की लगभग 57 फीसदी है। पिछले हफ्ते हर दिन ऑक्सीजन की मांग इसी स्तर पर बनी रही थी, जबकि इसकी औसत उपलब्धता 432 मीट्रिक टन ही रही। यानी दिल्ली को रोजाना उसकी जरूरत का 44 फीसदी ऑक्सीजन ही मिल पाई।

मंगलवार को राजधानी के विभिन्न अस्पतालों ने सरकार को 48 पैनिक कॉल्स कीं। दिल्ली सरकार का दावा है कि इन सभी कॉल्स पर एक्शन लिया गया और इन कॉल्स की एवज में अस्पतालों को 36.40 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई की गई।

विज्ञापन

अब क्या चाहती है दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार ने कहा है कि देश में ऑक्सीजन की कमी नहीं है। कुल 8500 मीट्रिक टन ऑक्सीजन को देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाने के लिए 1631 क्रायोजेनिक टैंकरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन कई राज्य ऐसे हैं जहां ऑक्सीजन की मांग इतनी अधिक नहीं है, लिहाजा उन राज्यों के टैंकरों को दिल्ली ऑक्सीजन पहुंचाने में इस्तेमाल किया जाए। दिल्ली सरकार के मुताबिक़ केंद्र को क्रायोजेनिक टैंकरों की व्यवस्था भी अपने हाथ में ले लेनी चाहिए।

आम आदमी पार्टी नेता राघव चड्ढा ने कहा कि हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली को अभी तक सबसे ज्यादा मंगलवार को 555 मिट्रिक टन ऑक्सीजन दी है, जबकि हमारी जरूरत 976 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की है। अगर सरकार टैंकरों की व्यवस्था अपने हाथ में ले तो इस अव्यवस्था को सुधारा जा सकता है।  

दिल्ली सरकार ने कहा है कि क्रायोजेनिक टैंकरों की संख्या ऑक्सीजन उत्पादन से तीन गुना ज्यादा है। इस हिसाब से देशभऱ में क्रायोजेनिक टैंकरों का नियंत्रण और वितरण करना चाहिए, ताकि सभी को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिल सके। दिल्ली को 976 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पर 187 क्रायोजेनिक टैंकर की जरूरत पड़ेगी।

यहां से हो रही ऑक्सीजन की आपूर्ति

आप प्रवक्ता राघव चड्ढा ने बताया कि जब भी किसी अस्पताल से कोई इमरजेंसी आती है तो मायापुरी और राजघाट रिस्पांस पाइंट से हम रिजर्व ऑक्सीजन स्टॉक भेजते हैं। एसओएस कॉल्स अटैंड करने के लिए एक टीम भी बनाई है। दिल्ली सरकार के वरिष्ठ और योग्य आईएएस अधिकारियों की टीम लगातार दिन-रात एसओएस कॉल से जुड़ी दिक्कत को दूर करती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed