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भ्रष्टाचार पर नकेल: विजिलेंस को 60 दिन में करनी होगी 'लोकपाल' से आई शिकायत की जांच

Tue, 22 Jun 2021 05:55 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 22 Jun 2021 05:55 PM IST
सार

केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अब यह निर्णय लिया है कि लोकपाल से आने वाली शिकायतों की जांच साठ दिन में पूरी करनी पड़ेगी। इसके लिए विजिलेंस यूनिटों को हिदायत दे दी गई है कि वे उस अधिकारी का तबादला न करें, जो लोकपाल से आए किसी मामले की जांच कर रहा हो। उसे कम से कम चार माह तक विजिलेंस यूनिट में ही रखा जाए...

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The Central Vigilance Commission order, investigation of complaints from the Lokpal will have to be completed within 60 days
केंद्रीय. सर्तकता आयोग - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

केंद्र सरकार के टॉप नौकरशाहों से लेकर निचले स्तर तक के कर्मियों के भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए लोकपाल ने सख्त कदम उठाया है। यह देखने को मिल रहा था कि लोकपाल के माध्यम से भेजी गई शिकायतों की जांच तय समय पर नहीं हो रही है। इसके लिए कई कारण जिम्मेदार बताए गए थे। अब केंद्रीय सतर्कता आयोग 'सीवीसी' ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों, भारत सरकार के बैंकों, बीमा कंपनियों, निगमों और स्वायत्ता प्राप्त संगठनों को पत्र भेजकर कहा है कि किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मी के खिलाफ अगर लोकपाल की तरफ से शिकायत मिलती है तो उसकी प्रारंभिक जांच दो माह में पूरी कर ली जाए। जो अधिकारी ऐसे मामले की जांच कर रहा है, उसे चार माह तक विजिलेंस यूनिट से बाहर न भेजा जाए। यानी कम से कम चार माह तक जांच अधिकारी का तबादला न करें।

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बता दें कि लोकपाल की तरफ से सीवीसी को अनेक मंत्रालयों और विभागों को लेकर शिकायतें मिलती रहती हैं। अभी तक जो व्यवस्था जारी है, उसके तहत अधिकांश जगहों पर जांचकार्य तय समय पर पूरा नहीं हो पाता। केंद्र सरकार के ग्रुप ए, बी, सी व डी पदों पर काम करने वाले कार्मिकों की शिकायत लोकपाल के पास पहुंचती है। वहां से इन शिकायतों को केंद्रीय सतर्कता आयोग के पास भेज दिया जाता है। ऐसा देखने को मिल रहा था कि शिकायतों की जांच में अनावश्यक तौर पर देरी हो रही है। एक बड़ा कारण यह सामने आया कि जिस अधिकारी को केस की जांच सौंपी जाती है, वह जांच पूरी होने से पहले ही किसी दूसरे पद पर चला जाता है। यानी उसका विजिलेंस यूनिट से तबादला हो जाता है। कोई नया अधिकारी आता है। केस की जांच नए सिरे से शुरू होती है। इस बीच केस से जुड़े कई अहम सबूत इधर-उधर हो जाते हैं। नतीजा, आरोपी अधिकारी या कर्मी, विभागीय कार्रवाई से बच निकलता है।
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इन सभी बातों के मद्देनजर, केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अब यह निर्णय लिया है कि लोकपाल से आने वाली शिकायतों की जांच साठ दिन में पूरी करनी पड़ेगी। इसके लिए विजिलेंस यूनिटों को हिदायत दे दी गई है कि वे उस अधिकारी का तबादला न करें, जो लोकपाल से आए किसी मामले की जांच कर रहा हो। उसे कम से कम चार माह तक विजिलेंस यूनिट में ही रखा जाए। इससे वह अधिकारी निष्पक्षता और भय मुक्त होकर केस की जांच कर सकेगा।

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