केंद्र सरकार के तीन बड़े फैसले: चिंता न करें कर्मचारी, लॉकडाउन में 'छुट्टियां और वेतन' नहीं कटेगा
केंद्र सरकार ने अपने ऐसे सभी कर्मचारी, जो अनुबंध पर काम कर रहे हैं, उन्हें पूरा वेतन देने का फैसला किया है। ये कर्मचारी कोरोना के लॉकडाउन के चलते घर पर रहे थे। चूंकि ट्रांसपोर्ट न मिलने या कंटेनमेंट जोन के चलते उन्हें घर पर रहना पड़ा था, अब सरकार ऐसे सभी कर्मियों को ऑन ड्यूटी पर मानेगी...
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केंद्र सरकार ने कोरोनाकाल में कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले कर्मियों को खुश करने का निर्णय लिया है। उनके हक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। इनमें केवल वित्त से जुड़े फैसले ही नहीं हैं, बल्कि कर्मियों को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और उनका त्वरित समाधान कैसे हो सकता है, ये सब शामिल है। कोरोनाकाल में अनुबंध पर काम करने स्टाफ को पूरी सेलरी मिलेगी। यानी लॉकडाउन के चलते वह स्टाफ अगर कार्यालय नहीं पहुंच सका तो उसका वेतन नहीं कटेगा। सरकारी कर्मचारी, जो कोविड के चलते घर पर रहे, उनकी छुट्टियां कम नहीं होंगी। किसी कर्मी का कोई पैसा नहीं कटेगा। केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में कर्मियों की समस्याओं का निवारण करने के लिए नियमित तौर पर विभागीय परिषद की बैठक नहीं हो रही है। कुछ विभागों में तो इस परिषद का गठन ही नहीं किया गया हैं। इसे लेकर डीओपीटी ने सभी विभागों से पांच साल का रिकॉर्ड तलब किया है।
केंद्र सरकार ने अपने ऐसे सभी कर्मचारी, जो अनुबंध पर काम कर रहे हैं, उन्हें पूरा वेतन देने का फैसला किया है। ये कर्मचारी कोरोना के लॉकडाउन के चलते घर पर रहे थे। चूंकि ट्रांसपोर्ट न मिलने या कंटेनमेंट जोन के चलते उन्हें घर पर रहना पड़ा था, इसलिए उनका वेतन काटे जाने की बात कही जा रही थी। अब सरकार ऐसे सभी कर्मियों को ऑन ड्यूटी पर मानेगी। इनमें वे कर्मी शामिल हैं, जिन्हें पहली अप्रैल से लेकर जून में लॉकडाउन खत्म होने तक घर में रहना पड़ा है। कोरोना की दूसरी लहर में ज्यादातर अनुबंध आधारित स्टाफ कार्यालय नहीं पहुंच सका था। नियम यह है कि सामान्य परिस्थितियों में इस तरह की छुट्टियों के लिए उनका वेतन काटा जा सकता है। अब लॉकडाउन के दौरान इन कर्मियों को घर में रहना पड़ा है, ऐसे में उन्हें ऑन ड्यूटी माना जाएगा।
अधिकांश मंत्रालयों में नियमित कर्मियों के सामने छुट्टियां समायोजित करने का संकट आया है। सात जून को डीओपीटी ने आदेश जारी किया है कि लॉकडाउन में कार्यालय न आने वाले कर्मियों की छुट्टियां न काटी जाएं। इसके लिए एक व्यवस्था बनाई गई है। यदि कोई कर्मी खुद कोरोना संक्रमित रहा है तो उसे बीस दिन की कम्युटेड लीव मिलेगी। इसके लिए कर्मी को मेडिकल जांच पत्र बनवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कर्मी की स्वयं की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट ही पर्याप्त रहेगी। यदि कर्मी की कम्युटेड लीव खत्म हो गई है तो उसे 15 दिन की स्पेशल कैजुअल लीव मिलेगी। उसके बाद पांच दिन की अर्जित छुट्टी मिलेगी। पांच दिन की हॉफ पे लीव देने का भी प्रावधान किया गया है। यदि ये छुट्टियां भी खत्म हो चुकी हैं तो उसे एक्स्ट्रा ऑर्डिनेरी लीव दे दी जाएगी। इसके लिए मेडिकल जांच प्रमाण पत्र लाना जरूरी नहीं होगा। इसी तरह से कर्मचारी के परिवार में कोई कोरोना संक्रमित रहा है, उसके स्टाफ में कोई पॉजिटिव केस है, आदि इन सबके बारे में भी विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी गई हैं।
विभिन्न विभागों में देखने को मिला है कि लंबे समय से विभागीय परिषद की बैठकें नहीं हो रही हैं। जेसीएम साइड की बैठकों में यह खुलासा हुआ है। जेसीएम के डिप्टी सेक्रेटरी एसपी पंत के अनुसार, इस बाबत डीओपीटी को अवगत कराया गया है। कुछ विभाग तो ऐसे हैं, जहां पर इन परिषदों का गठन ही नहीं किया गया है। नियम यह है कि कम से कम चार माह में एक बार विभागीय परिषद की बैठक आयोजित हो, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। कुछ विभाग तो ऐसे हैं जहां पर चार पांच साल से ये बैठक नहीं हुई है। अब डीओपीटी ने सभी विभागों से इन बैठकों का पाँच साल का ब्यौरा मांगा है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कर्मियों की समस्याओं का हल अविलंब किया जा सके।