सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में लागू होगी केंद्रीय सिविल सेवा नियमावली
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अब केंद्रीय विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को केंद्र सरकार के विरोध में बयानबाजी करने या उसके खिलाफ होने वाले किसी प्रदर्शन में भाग लेने से पहले दस बार सोचना होगा। इन सभी पर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर केंद्रीय सिविल सेवा नियमावली लागू होगी, जिसका उल्लंघन करने वाले को निलंबित या बर्खास्त करने का अधिकार केंद्र सरकार को मिल जाएगा। यह नियमावली केंद्र सरकार से अनुदान लेने वाले सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू की जाएगी।
इस नियमावली के लागू होने पर काम नहीं करने वाले शिक्षकों-कर्मचारियों को समय से पहले सेवानिवृत्ति देने का अधिकार भी केंद्र के पास होगा। ये नियमावली जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में लागू भी कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, इस नियमावली के दायरे में देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय और आईआईएम समेत अन्य केंद्रीय शिक्षण संस्थान आएंगे, जिनके पास अभी तक अपनी कोई नियमावली नहीं है।
यूजीसी ने 1 मई को लिखा था पत्र
यूजीसी ने 1 मई को सभी केंद्रीय संस्थानों को अपने यहां ये नियमावली लागू करने के लिए पत्र लिखा था। अब केंद्र सरकार से फंड लेने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में यह नियम लागू कर दिया गया है। इस नियमावली के तहत शिक्षक या कर्मी का सरकार के खिलाफ बयानबाजी व विरोध प्रदर्शन अवैध माना जाएगा।
उन्हें केंद्रीय कर्मियों की तर्ज पर नियमों के तहत काम करना होगा। समय-समय पर उनके काम की समीक्षा भी की जाएगी। इसके अलावा यदि कोई गंभीर रूप से बीमार होगा तो वह भी समयपूर्व रिटायरमेंट (वीआरएस) ले पाएगा।
विजिलेंस व फाइनेंशियल रूल भी होंगे लागू
केंद्र सरकार से अनुदान पाने वाले सभी शिक्षण संस्थानों को सेंट्रल विजिलेंस कमीशन के निर्देशों और जनरल फाइनेंशियल रूल्स-2017 का भी पालन करना होगा। योजनाओं में अनुदान पाने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए इन्हीं नियमों के तहत काम किया जाएगा।