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चुनावी बॉन्ड का मामला भारी-भरकम, विस्तार से सुनवाई की जरूरत : सुप्रीम कोर्ट
Sat, 13 Apr 2019 06:33 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Sat, 13 Apr 2019 06:33 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
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सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड के मामले को भारी-भरकम बताते हुए कहा कि इस पर विस्तार से सुनवाई की जरूरत है। कालेधन पर रोक लगाने के मकसद से केंद्र ने 2 जनवरी 2018 को चुनावी बॉन्ड योजना को अधिसूचित किया था।
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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि चुनावी बॉन्ड का मामला देश में चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को प्रभावित करने वाला है। लिहाजा इस मुद्दे पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले पर अंतरिम व्यवस्था दी है। तीन सदस्यीय पीठ में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना भी शामिल हैं।
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पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला वित्त अधिनियम, चुनावी कानून और बैंकिंग कानून में किए गए बदलाव से संबंधित है। इन कानूनों में बदलाव कर चुनावी बॉन्ड लाया गया है। सभी पक्षकारों की दलीलों से साफ है कि यह जटिल मसला है। लिहाजा कोर्ट इस मसले पर विस्तार से परीक्षण करेगा। एक एनजीओ ने याचिका में चुनावी बॉन्ड योजना को चुनौती दी थी और इस पर रोक लगाने या इसके तहत चंदा देने वालों के नामों का खुलासा करने की मांग की थी।
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पीएम, वित्त मंत्री की पहल ध्वस्त
सुप्रीम कोर्ट ने गोपनीय चुनावी बॉन्ड का कानून बनाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली और भाजपा की पहल को ध्वस्त कर दिया है। कालेधन के रास्ते दान देने वाले अब इस राह को अपनाने से डरेंगे।
- सीताराम येचुरी, माकपा महासचिव
गारंटी नहीं, दल सारी जानकारी साझा करेंगे
इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि राजनीतिक दल सारी जानकारी चुनाव आयोग के साथ साझा करेंगे क्योंकि सरकार कहती रही है कि चुनावी बॉन्ड गुमनाम हैं, इन पर किसी का नाम नहीं है।
- प्रोफेसर जगदीप चोकर, याचिकाकर्ता