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सबसे बड़ा सवाल, अब कौन होगा मुख्यमंत्री ?
अरुणेश पठानिया / शिमला
Updated Tue, 19 Dec 2017 06:00 AM IST
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- फोटो : G. pal
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विधानसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा खेमे को पछाड़कर मुख्यमंत्री प्रत्याशी बनने का दांव भी प्रेम कुमार धूमल को जीत नहीं दिला पाया। धूमल के चेहरे बनने से बैकफुट पर आया नड्डा खेमा अब मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे दिख रहा है। धूमल के साथ प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती, उनके समधी गुलाब सिंह और रविंद्र रवि की हार से उनका खेमा विधायक दल में कमजोर साबित होगा। इससे नड्डा के करीबी रहे जयराम ठाकुर सरीखे नेता सर्वसम्मति बना सकते हैं। अगर दोनों खेमों में रार गहराई तो हरियाणा की तर्ज पर संघ की पृष्ठभूमि वाले अजय जम्बाल (संघ के उत्तर पूर्वी राज्यों के प्रभारी) पैराशूट से उतारे जा सकते हैं।
हिमाचल में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर भाजपा बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव में उतरने की रणनीति के साथ उतरी थी। 26 अप्रैल को पीएम मोदी की शिमला रैली से इसके संकेत मिले। मई में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की पालमपुर में पहले चुनावी मंथन में इस पर एक तरह से मुहर लगी। उन्होंने धूमल समर्थकों की उनके नाम की घोषणा करने की मांग पर फटकार तक लगाई थी। प्रचार में भी केंद्रीय नेतृत्व ने नड्डा को फ्रंट में रखकर शांता कुमार और धूमल में तालमेल बैठाया।
पढ़ें- EVM पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का बड़ा बयान
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नड्डा और धूमल खेमे के बीच खींचतान बिलासपुर में प्रधानमंत्री की रैली से और तेज हुई। मोदी ने संबोधन में नड्डा की तारीफों के पुल बांधे तो मंच पर बैठे धूमल का जिक्र तक नहीं किया। आचार संहिता के बाद टिकट आवंटन में संघ और आंतरिक सर्वेक्षणों ने सारे समीकरण पलट दिए। हमीरपुर की जगह धूमल को सुजानपुर भेजना उनके लिए दूसरा बड़ा झटका था।
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हिमाचल में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर भाजपा बिना मुख्यमंत्री चेहरे के चुनाव में उतरने की रणनीति के साथ उतरी थी। 26 अप्रैल को पीएम मोदी की शिमला रैली से इसके संकेत मिले। मई में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की पालमपुर में पहले चुनावी मंथन में इस पर एक तरह से मुहर लगी। उन्होंने धूमल समर्थकों की उनके नाम की घोषणा करने की मांग पर फटकार तक लगाई थी। प्रचार में भी केंद्रीय नेतृत्व ने नड्डा को फ्रंट में रखकर शांता कुमार और धूमल में तालमेल बैठाया।
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नड्डा और धूमल खेमे के बीच खींचतान बिलासपुर में प्रधानमंत्री की रैली से और तेज हुई। मोदी ने संबोधन में नड्डा की तारीफों के पुल बांधे तो मंच पर बैठे धूमल का जिक्र तक नहीं किया। आचार संहिता के बाद टिकट आवंटन में संघ और आंतरिक सर्वेक्षणों ने सारे समीकरण पलट दिए। हमीरपुर की जगह धूमल को सुजानपुर भेजना उनके लिए दूसरा बड़ा झटका था।
कौन हैं प्रमुख दावेदार
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सुजानपुर में धूमल को उनके चेले राजेंद्र राणा के सामने खड़ा करने के पीछे नड्डा खेमे की लाबिंग बताई जा रही थी। धूमल खेमे ने आंतरिक सर्वेक्षणों, राजपूत वोट बैंक, खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों का तानाबाना बुना। इसके बाद 29 अक्तूबर को शाह शिमला पहुंचे। राष्ट्रीय महामंत्री संगठन रामलाल, प्रदेश प्रभारी मंगल पांडेय और चुनाव प्रभारी थावर चंद गहलोत से आपात बैठक की।
30 अक्तूबर को अमित शाह ने नाहन की चुनावी रैली में धूमल को भाजपा का दूल्हा बताते हुए मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया। धूमल के नाम पर मुहर के बाद नड्डा बैकफुट पर आ गए। अब सुजानपुर में धूमल की हार ने भाजपा को बिना दूल्हे की बारात वाली स्थिति में ला दिया है। अब नए सिरे से मोदी और शाह के सामने दिग्गज लाबिंग करेंगे। अगले तीन दिन में नए चेहरे पर निर्णय होने की उम्मीद है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की टीम शाह में मजबूत पैठ बताई जाती है। प्रदेश राजनीति में बतौर कैबिनेट मंत्री काम कर चुके हैं। चुनाव से पहले भी इनके नाम की बतौर मुख्यमंत्री खासी चर्चा थी। हालांकि, उन्होंने कभी इसे स्वीकारा नहीं। पार्टी हरियाणा में मनोहर लाल खट्ट की तरह प्रयोग करती है तो अजय जम्बाल भी रेस में माने जा सकते हैं। संघ के वरिष्ठ प्रचारकों में शुमार जम्बाल सक्रिय राजनीति में नहीं हैं। फिलहाल, उनके पास भाजपा को नॉर्थ ईस्ट में मजबूत करने का जिम्मा है।
विधायकों में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष जयराम ठाकुर बड़ा नाम हैं। इन्हें नड्डा का करीबी माना जाता है। उनके पक्ष में नड्डा ने रैली में उन्हें प्रदेश में सबसे बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की घोषणा भी की थी। संघ में भी इनकी खासी पैठ है। चुनाव प्रबंधन के मास्टर राजीव बिंदल भी दूसरी पंक्ति के नेताओं में बड़ा नाम हैं।
30 अक्तूबर को अमित शाह ने नाहन की चुनावी रैली में धूमल को भाजपा का दूल्हा बताते हुए मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया। धूमल के नाम पर मुहर के बाद नड्डा बैकफुट पर आ गए। अब सुजानपुर में धूमल की हार ने भाजपा को बिना दूल्हे की बारात वाली स्थिति में ला दिया है। अब नए सिरे से मोदी और शाह के सामने दिग्गज लाबिंग करेंगे। अगले तीन दिन में नए चेहरे पर निर्णय होने की उम्मीद है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की टीम शाह में मजबूत पैठ बताई जाती है। प्रदेश राजनीति में बतौर कैबिनेट मंत्री काम कर चुके हैं। चुनाव से पहले भी इनके नाम की बतौर मुख्यमंत्री खासी चर्चा थी। हालांकि, उन्होंने कभी इसे स्वीकारा नहीं। पार्टी हरियाणा में मनोहर लाल खट्ट की तरह प्रयोग करती है तो अजय जम्बाल भी रेस में माने जा सकते हैं। संघ के वरिष्ठ प्रचारकों में शुमार जम्बाल सक्रिय राजनीति में नहीं हैं। फिलहाल, उनके पास भाजपा को नॉर्थ ईस्ट में मजबूत करने का जिम्मा है।
विधायकों में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष जयराम ठाकुर बड़ा नाम हैं। इन्हें नड्डा का करीबी माना जाता है। उनके पक्ष में नड्डा ने रैली में उन्हें प्रदेश में सबसे बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की घोषणा भी की थी। संघ में भी इनकी खासी पैठ है। चुनाव प्रबंधन के मास्टर राजीव बिंदल भी दूसरी पंक्ति के नेताओं में बड़ा नाम हैं।