मांस के लिए जीवित पशुओं के निर्यात की खबर से भड़के पशुप्रेमी, करेंगे सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
भाजपा सरकार में भारत पहले ही मांस निर्यात के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में शुमार हो चुका है। लेकिन भारत से जीवित पशुओं को भी मांस खाने के लिए विदेशों को निर्यात किया जा रहा है, यह खबर सामने आते ही पशु प्रेमी सरकार के खिलाफ उग्र हो गए हैं। पशु प्रेमी संगठनों ने रविवार को सरकार के इस आदेश के खिलाफ इंडिया गेट सहित पूरे देश में प्रदर्शन करने का फैसला किया है।
क्या है मामला
जानकारी के मुताबिक वाणिज्य मंत्रालय ने गत 25 जून को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सूचना दी थी कि अगले तीन महीनों में नागपुर एयरपोर्ट से एक लाख जीवित बकरे-भेंड़ों को अरब देशों को निर्यात किया जाएगा। सरकार ने इस कदम को सूखाग्रस्त विदर्भ के किसानों के हित में लिया गया फैसला बताया था।
30 जून को इस योजना को कुछ केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति में शुरु किया जाना था, लेकिन पशु प्रेमियों और हिंदूवादी संगठनों के भारी विरोध के बाद इस योजना को टाल दिया गया था।
जीवित पशुओं के निर्यात की खबर से हुआ बवाल
इसी बीच मीडिया में यह खबर आ गई कि सरकार ने गत दिनों 1500 जीवित बकरे, और इसके पूर्व 3000 जीवित पशुओं का निर्यात किया है। इस खबर से पशु प्रेमियों की नींद उड़ गई। पशु प्रेमियों की आपत्ति है कि वायुयान में जीवित पशुओं को ले जाने की अब तक कोई उचित व्यवस्था नहीं है।
यात्रा के दौरान पशुओं के व्यवहार को ध्यान में रखते हुए अत्यधिक शोर, सांस लेने के लिए कम ऑक्सीजन की उपस्थिति और कम जगह होने की परिस्थितियों के बीच उन्हें किस प्रकार ले जाया गया, यह एक गंभीर विषय है।
सरकार पर आरोप
विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष संजय जैन ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सिर्फ आर्थिक लाभ के लिए सारे मानक ताक पर रख दिये गए। जैन ने कहा कि चुनाव के समय पूरे देश में किसानों की चिंता करने वाले नेता आज पशुओं को बेचकर धन कमाने पर ध्यान केंद्रित किये हुए हैं, जबकि सभी जानते हैं कि किसानों का असली हित पशुओं को पालने में ही होता है।
जैन ने कहा कि सरकार के इस रवैये के खिलाफ हम रविवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अगर वह अपनी नीतियों को नहीं बदलती है तो पूरे देश में उसके खिलाफ व्यापक स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा।