जानें कौन है सैयद सलाहुद्दीन, कैसे बना आतंकी संगठन हिजबुल का मुखिया
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शुक्रवार को जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर अपनी पार्टी जम्मू और कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) को तोड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी को तोड़ा गया तो 1987 की तरह और सलाहूद्दीन पैदा होंगे। महबूबा ने कहा 'यदि दिल्ली ने साल 1987 की तरह लोगों से उनके मतदान का अधिकार छीना, यदि उसने बंटवारे की कोशिश की और उस समय की तरह हस्तक्षेप करने की कोशिश की तो मुझे लगता है कि 1987 की तरह ही हिजबुल मुजाहिद्दीन के प्रमुख सैयद सलाहूद्दीन और यासिन मल्लिक पैदा होंगे।'
सलाहूद्दीन कौन है जिसका जिक्र महबूबा ने किया है? दरअसल सलाहूद्दीन एक आतंकी हैं जिसे कि नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी एनआईए ने वैश्विक आतंकी घोषित किया हुआ है और वह वांछित आंतकियों की सूची में शामिल है।
कौन है सलाहूद्दीन
सैयद मोहम्मद युसूफ शाह जिसे कि आमतौर पर सैयद सलाहूद्दीन के नाम से जाना जाता है। वह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का मुखिया है जो कश्मीर घाटी से अपने ऑपरेशन को अंजाम देता है। वह हिजबुल से पहले एंटी-इंडिया आतंकी समूह जिहाद काउंसिल का अध्यक्ष रह चुका है। उसने कसम खाई थी कि वह कश्मीर मुद्दे पर किसी भी तरह की शांति स्थापना वाले कार्यों को सफल नहीं होने देगा। घाटी में और ज्यादा आत्मघाती हमलावरों को ट्रेनिंग देगा और कश्मीर को भारतीय सेना का कब्रिस्तान बना देगा। 26 जून 2017 को अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने उसे विशेष नामित वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था। हालांकि इस घोषणा के बाद वह मुजफ्फराबाद के सेंटर प्रेस क्लब में पाकिस्तानी मीडिया से बात करता हुआ नजर आया था। उसने कहा था कि यह घोषणा अमेरिका, इजरायल और भारत की पाकिस्तान के प्रति शत्रुता दिखाती है।
शुरुआती जिंदगी
युसूफ शाह एक मध्यम वर्गीय माता-पिता का सातवां बच्चा था। उसका जन्म 18 फरवरी 1946 में कश्मीर घाटी के बडगाम के सोईबग में हुआ था। जब वह बच्चा था तभी भारत और पाकिस्तान का विभाजन हो गया था। उसके पिता भारत सरकार में डाक विभाग में काम करते थे। शुरुआत में शाह की दिलचस्पी मेडिसिन पढ़ने की तरफ गई लेकिन बाद में उसने सिविल सेवक बनने का निर्णय लिया। यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई करते समय वह जमात-ए-इस्लामी से प्रभावित हुआ और उसकी जम्मू-कश्मीर शाखा का सदस्य बन गया।
यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही वह कट्टपंथी बन गया था। उसी दौरान वह मुस्लिम महिलाओं को बुर्का ओढ़ने और उन्हें पाकिस्तान के समर्थन में जुलूस निकालने के लिए मनाने में सफल रहा। यूनिवर्सिटी की पढ़ाई खत्म होने के बाद सिविल सेवा परीक्षा में हिस्सा लेने के बजाए वह मदरसे में इस्लामी टीचर बन गया। उसकी शादी नफीसा नाम की महिला से हुई है। जिससे उसके पांच बेटे और दो बेटियां हैं। जहां सलाहूद्दीन एक ऐसे संगठन का मुखिया है जो भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की वकालत करता है वहीं इससे इतर उसके बच्चे किसी भी आतंकी संगठन में शामिल नहीं है।
राजनीतिक जिंदगी
1987 में युसूफ शाह ने जम्मू और कश्मीर से मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के टिकट पर श्रीनगर की अमीरा कदल सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि वह चुनाव हार गया और नेशनल कॉन्फ्रेंस के गुलाम मोहिउद्दीन शाह इस सीट से जीत गए। इसके बाद शाह को हिंसक विरोध प्रदर्शन करने की वजह से गिरफ्तार करके जेल में भेज दिया गया था।
इस तरह हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़ा नाता
हिंसक विरोध प्रदर्शन की वजह से जेल में बंद शाह को साल 1989 में रिहा किया गया। इसके बाद वह हिजबुल मुजाहिद्दीन में शामिल हो गया। इस संगठन का संस्थापक मुहम्मद अहसान डार उर्फ मास्टर था। वह बाद में हिजबुल से अलग हो गया और शाह के हाथों में इसकी कमान आ गई। इसके बाद उसने 12वीं शताब्दी के मुस्लिम राजनेता और सैन्य नेता सलाद्दीन के नाम पर अपना नाम सैयद सलाहूद्दीन रख लिया।
साल 2012 में अपने एक इंटरव्यू के दौरान सैयद ने इस बात को स्वीकार किया था कि पाकिस्तान कश्मीर की लड़ाई में हिजबुल का समर्थन करती है। उसने घोषणा की थी कि अगर पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के जिहादियों का समर्थन करना बंद कर देती है तो वह पाकिस्तान पर हमला कर देगा। उसका दावा था कि वह कश्मीर में पाकिस्तान की लड़ाई लड़ रहे हैं। सलाहूद्दीन को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ना केवल पैसा कदेती है बल्कि इस्लामाबाद में उसके रहने का इंतजाम भी करवाया गया है।
सलाहुद्दीन भारत में हुए कई आतंकी हमलों में शामिल रहा है। जनवरी 2016 को पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के पीछे भी उसके संगठन यूनाइडेट जिहाद काउंसिल का हाथ था। जैश-ए-मोहम्मद भी सलाहुद्दीन के ही संगठन का हिस्सा है। उसकी आतंकी गतिविधियों की वजह से 26 जून 2017 को अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने उसे वैश्विक आतंकियों की सूची में डाल दिया था।