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Maharashtra: रोडरेज मामले में कोर्ट ने दोषी को सुनाई एक दिन की सजा, जानें क्या था यह मामला

Wed, 06 Aug 2025 04:17 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे Published by: राहुल कुमार Updated Wed, 06 Aug 2025 04:17 PM IST
सार

अदालत ने रोडरेज के एक नौ साल पुराने मामले में दोषी को उसके खराब स्वास्थ्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों को देखते हुए एक दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।  

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thane court convicts man for slapping cop after 9 year hands one-day imprisonment due to poor health
अदालत का फैसला - फोटो : एएनआई

विस्तार

ठाणे की एक सत्र अदालत ने नौ साल बाद 52-वर्षीय एक व्यक्ति को ‘रोड रेज’ (सड़क पर मारपीट) के मामले में एक यातायात पुलिस जवान के साथ मारपीट करने का दोषी ठहराया है। हालांकि अदालत ने उसके खराब स्वास्थ्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों को देखते हुए उसे एक दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने अभियुक्त पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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अतिरिक्त सत्र न्यायालय के न्यायाधीश ने 31 जुलाई को इस मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि मुकदमे के दौरान अभियुक्त के आचरण, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, पारिवारिक जिम्मेदारियों और पुलिसकर्मी को लगी चोट की प्रकृति को देखते हुए उसके साथ नरमी बरती जानी चाहिए।
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क्या है मामला? 
अदालत ने रमेश शिटकर को 18 नवंबर, 2016 को ठाणे के कैडबरी सिग्नल पर यातायात पुलिस आरक्षी दिलीप पवार पर हमला करने के सिलसिले में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 353 और 332 के तहत आपराधिक बल का प्रयोग करने और एक लोक सेवक को जानबूझकर चोट पहुंचाने का दोषी ठहराया। हालांकि, धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमानित करना) के तहत आरोप साबित नहीं हुए।
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यह घटना तब हुई जब दिलीप पवार ने एक तेज रफ्तार कार को रोकने की कोशिश की। शिटकर ने बीच सड़क पर यह कार रोक तो दी, लेकिन उसने पवार को गालियां दीं और उसे कई थप्पड़ मारे। इस हमले को लेकर रबोडी थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अदालत ने मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के सात गवाहों से पूछताछ की।

क्या कहा अदालत ने?
अदालत ने कहा,  अभियोजन पक्ष के गवाहों के साक्ष्य से यह तथ्य साबित हो गया है कि  पुलिसकर्मी अपना आधिकारिक कर्तव्य निभा रहा था, जब अभियुक्त ने उस पर हमला किया। न्यायाधीश ने बचाव पक्ष के इस दावे को खारिज कर दिया कि शिटकर को एक रिक्शा चालक के साथ हुए विवाद के बाद फंसाया गया था, जिसने झगड़ा रोकने की कोशिश की थी। अदालत ने कहा, बचाव पक्ष अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान को झूठा साबित करने के लिए कोई भी सबूत पेश करने में विफल रहा। मौके पर पंचनामा से कार से कथित टक्कर का कोई सबूत सामने नहीं आया है।


बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए न्यायाधीश ने कहा, मुकदमे के दौरान अभियुक्त के आचरण, उसकी बीमारी, जिम्मेदारियों और सूचना देने वाले को हुई चोट की प्रकृति को देखते हुए, मेरा मानना है कि उसके प्रति नरमी बरती जा सकती है। इसके साथ ही अदालत ने उसे एक दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाई।
 

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