Tezpur University Protest: 'मैं संवाद के पक्ष में हूं'; तेजपुर विश्वविद्यालय के आंदोलन पर बोले CM हिमंत बिस्वा
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने तेजपुर विश्वविद्यालय में जारी छात्र आंदोलन पर कहा कि वे किसी भी तरह के आंदोलन के साथ नहीं, बल्कि संवाद के पक्ष में हैं। छात्रों ने 29 नवंबर से कैंपस शटडाउन किया हुआ है।
विस्तार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को तेजपुर विश्वविद्यालय में जारी छात्र आंदोलन पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी तरह के आंदोलन या उग्र विरोध के पक्षधर नहीं हैं, बल्कि संवाद और बातचीत के रास्ते पर भरोसा करते हैं।
सीएम सरमा ने कहा जहां आंदोलन होगा, वहां मैं नहीं रहूंगा। लेकिन जहां संवाद होगा, वहां मैं जरूर रहूंगा। उन्होंने यह बात उधारबोंड में आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कही।
कैम्पस में शटडाउन, परीक्षाएं रद्द
तेजपुर विश्वविद्यालय में बीते कुछ महीनों से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। छात्रों ने कुलपति शंभु नाथ सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्होंने लोकप्रिय असमिया गायक जुबिन गर्ग के निधन के समय विश्वविद्यालय समुदाय की भावनाओं का सम्मान नहीं किया। इसी मुद्दे को लेकर सितंबर से विरोध की शुरुआत हुई थी। हालात इतने बिगड़े कि छात्रों ने 29 नवंबर से कैंपस में ‘कंप्लीट शटडाउन’ लागू कर दिया। इसके चलते विश्वविद्यालय प्रशासन को सभी सेमेस्टर परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं।
VC को हटाए जाने पर क्या बोले सीएम
जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या केंद्रीय टीम की हालिया यात्रा के बाद कुलपति शंभु नाथ सिंह को हटा दिया गया है, तो उन्होंने कहा मुझे इसकी जानकारी नहीं है।
कुलपति पर जांच की सिफारिश
हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को बताया था कि उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से बातचीत की है। उन्होंने मंत्री से अनुरोध किया है कि निष्पक्ष जांच पूरी होने तक विश्वविद्यालय में जल्द से जल्द एक प्रो-वीसी की नियुक्ति की जाए, ताकि प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो।
अब जानते है विवाद की जड़...
22 सितंबर को विश्वविद्यालय में कुलपति और छात्रों के बीच तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बनी थी, जिसके बाद शंभु नाथ सिंह को कैंपस छोड़ना पड़ा। तब से लगातार तनाव बढ़ता गया और अब तक 11 से अधिक फैकल्टी सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी या तो इस्तीफा दे चुके हैं या विश्वविद्यालय छोड़ चुके हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके पास जो सबूत हैं, वे जांच शुरू करने में किसी भी तरह की देरी को उचित नहीं ठहराते। उनका मानना है कि कुलपति को पद पर रहने देना विश्वविद्यालय की साख और ईमानदारी को कमजोर करता है।
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