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Pahalgam Attack: 'वहां सुरक्षा नहीं थी, हेलिकॉप्टर पर घूमते हैं आप...'; मंत्री पर उतरा मृतक की पत्नी का गुस्सा

Thu, 24 Apr 2025 03:16 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सूरत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सूरत Published by: बशु जैन Updated Thu, 24 Apr 2025 03:16 PM IST
सार

पहलगाम हमले में मारे गए सूरत के शैलेश कलाथिया की पत्नी शीतल कलथिया ने बताया कि बायसरन घाटी क्षेत्र में एक भी सेना या पुलिस का जवान नहीं था। पूरे इलाके में छिपने की कोई जगह ही नहीं थी। 

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terrorists stood there until the people died in agony', eye-witness of wife of deceased tourist in Pahalgam
मृतक की पत्नी शीतल कलाथिया। - फोटो : ANI/वीडियो ग्रैब

विस्तार

आतंकियों ने पहले हिंदू-मुसलमान को अलग किया। फिर कलमा पढ़ने के लिए कहा। जो नहीं पढ़ सका उसे गोली मार दी। हालात यह थे कि जब तक लोग तड़प-तड़पकर मर नहीं गए, आतंकी वही खड़े रहे। पहलगाम आतंकी हमले की आंखों-देखी एक मृत पर्यटक की पत्नी ने बयां की है। 

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आतंकवादी हमले में गुजरात के शैलेशभाई कलथिया की भी जान चली गई। गुरुवार को सूरत में उनका अंतिम संस्कार किया गया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल सांत्वना देने पहुंचे, तो उन्हें शैलेशभाई की पत्नी शीतलबेन का गुस्सा झेलना पड़ा। शीतलबेन ने सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल उठाते हुए कहा, पहलगाम में कोई सेना, कोई पुलिस नहीं थी। मैं मदद के लिए चिल्लाती रही। इतना बड़ा पर्यटन स्थल होने के बावजूद कोई मेडिकल कैंप नहीं था। आप लोग जनता के टैक्स से हेलिकॉप्टर पर घूमते हैं। आपकी जिंदगी जिंदगी है, टैक्स देने वालों की जिंदगी जिंदगी नहीं है?
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'गोली मारने के बाद हंस रहे थे आतंकी'
शैलेशभाई की पत्नी शीतलबेन ने कहा, आतंकियों ने कोई पश्चाताप नहीं दिखाया। वे पति की गोली मारकर हत्या करने के बाद हंस रहे थे। पति को गोली मारने के बाद आतंकी तब तक वहां से नहीं गया, जब तक कि वह मर नहीं गए। अन्य हिंदुओं को भी बच्चों के सामने गोली मारी गई।
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पहलगाम हमले में मारे गए सूरत के शैलेश कलाथिया की पत्नी शीतल कलथिया ने बताया कि बायसरन घाटी क्षेत्र में एक भी सेना या पुलिस का जवान नहीं था। हम 18 अप्रैल को सुबह मुंबई से जम्मू के लिए निकले थे। तीन रात हम श्रीनगर में रुके। हम दोपहर को पहलगाम पहुंचे। हमें घाटी पर पहुंचे पांच-दस मिनट हुए थे। बच्चों को भूख लगने पर नाश्ता कराने लगे। इतने में फायरिंग होने लगी। हमने हर तरफ देखा तो कुछ दिखा नहीं। हमने दुकानदार से भी पूछा तो वे भी डर गए। उसने कहा कि पता नहीं। हमने भी पहली बार ऐसी आवाज सुनी है। थोड़ी देर बार दोबारा आवाज फिर आई तो सबको लगा कि कुछ गलत हुआ है। 

उन्होंने कहा कि गोलियों की आवाज सुनते ही हम छिपने के लिए भागे, लेकिन छिपने के लिए वहां कुछ था ही नहीं। पूरा इलाका बाउंड्री से घिरा हुआ था।  इसलिए छिपने की कोई जगह नहीं थी। अचानक एक आतंकवादी हमारे सामने खड़ा था। कई और आतंकी भी थे। उन्होंने सबको घेर रखा था। आतंकी ने हमें बोला कि हिंदू एकतरफ हो जाओ, मुस्लिम एक तरफ हो जाओ। फिर उसने बोला कलमा तो मुसलमानों ने बोला कि मुस्लिम। आतंकियों ने तीन बार कलाम बोला और मुसलमानों ने मुस्लिम बोला। हमें यह पता नहीं था। मेरे बाजू में एक मुस्लिम महिला थी। उसने जब कलाम का जवाब दिया तो उन्होंने उसे छोड़ दिया। 

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शीतल ने कहा कि आतंकियों ने हिंदू पुरुषों को अलग किया और उन सभी को गोली मार दी। मेरे पास जो आतंकी खड़ा था, वह काफी लंबा था। उसने हरे रंग का कुर्ता-पाजामा पहन रखा था। मुस्लिम टोपी पहन रखी थी। लंबी दाढ़ी थी, गोरा, पतला और लंबा था। उसके पास एक लंबी बंदूक थी, जिसके ऊपर एक कैमरा लगा हुआ था। वह वहीं खड़ा रहा और उसने जिन लोगों को गोली मारी थी, उनके मरने का इंतजार करता रहा।


उन्होंने कहा कि हम सब एक-दूसरे का हाथ पकड़कर डरकर जमीन पर बैठे थे। हम इस डर से कुछ नहीं बोले कि ये शांति से चले जाएं। सबके साथ बच्चे थे। सब सोच रहे थे कि चुप रहें, ये चले जाएं तो फिर कुछ करेंगे। सरकार से मदद मांगेंगे। मगर उसने कोई मौका दिया ही नहीं। आतंकी ने हमारे सामने 6-7 लोगों को गोली मारी। उसने उन्हें इतनी नजदीक से गोली मारी कि वे लोग गोली लगने के बाद 2-3 मिनट से ज्यादा जिंदा नहीं बचे। 

शीतल ने कहा कि मेरे पति का सिर मेरी गोद में था और मैं कुछ नहीं कर सकती थी। मेरे पीछे मेरी बेटी और बेटा था। वे किसी को हिलने भी नहीं दे रहे थे। बच्चों और महिलाओं को छोड़कर उन्होंने युवा और यहां तक कि बुजुर्गों को भी मार दिया। उसने सबको सिर नीचे करने के लिए कहा। अब तक ये सब फिल्मों में देखा था। 

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उन्होंने कहा कि मुझे आश्चर्य है कि बायसरन घास का मैदान में बहुत सारे पर्यटकों के बावजूद, एक भी सेना या पुलिस अधिकारी उस इलाके में मौजूद नहीं था। हमने कश्मीर में किसी भी हिंदू-मुस्लिम संघर्ष का अनुभव नहीं किया। वहां ऐसा कोई माहौल नहीं है। मुझे लगता है कि केवल पाकिस्तानी ही बात करते हैं हिंदू-मुस्लिम विभाजन के कारण संघर्ष पैदा हो रहे हैं। शीतल ने कहा कि सरकार को ऐसे स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए या लोगों को ऐसे खतरे वाले क्षेत्रों में जाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। वहां कुछ भी नहीं था, न अस्पताल, न सुरक्षा, न मदद। 

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