घाटी में सेना को बदनाम करने की साजिश में आतंकी नेटवर्क
- खून खराबे की बजाय लोगों को भड़का कर सेना और सुरक्षा बलों की छवि धूमिल करने का प्रयास
- पीडीपी-भाजपा सरकार को दबाव में रखने के लिए केंद्र विरोधी धड़ा भी इस साजिश में शामिल
विस्तार
घाटी में मौजूद आतंकवादियों का नेटवर्क खून खराबे की बजाय लोगों को भड़का कर सेना तथा सुरक्षा बलों को बदनाम करने की सुनियोजित रणनीति पर काम कर रहा है। खुफिया एजेंसी आईबी ने गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि हंदवाड़ा की घटना आतंकी और अलगाववादी नेटवर्क की इसी करतूत का नतीजा है।
रिपोर्ट के मुताबिक घाटी में मौजूद केंद्र विरोधी धड़ा जम्मू-कश्मीर में पीडीपी-भाजपा सरकार को दबाव में रखने के लिए इन करतूतों में बराबर का भागीदार है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सुरक्षा एजेंसियों की सूचना के अनुसार घाटी में फिलहाल अलग-अलग गुटों के करीब 140 आतंकी मौजूद हैं। इनमें करीब 80 स्थानीय हैं और बाकी 60 पाकिस्तान व अफगानिस्तान के नागरिक हैं। इन आतंकियों में ज्यादातर हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर-ए-तैयबा के हैं।
घाटी में जैश-ए-मोहम्मद की मौजूदगी बहुत कम है। इन आतंकियों का एक नेटवर्क है, जो लोगों को भड़का कर सड़कों पर निकलने के लिए मजबूर कर रहा है ताकि सेना और अर्धसैनिक सुरक्षाबलों की कार्रवाई से मासूम प्रभावित हों तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत विरोधी प्रचार हो सके। सेना को बदनाम कर कश्मीर मुद्दे को विश्व मंच पर ज्वलंत रखना इनका मुख्य मकसद है।
मामले से जुड़े गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेना को बदनाम करने की कोशिश कोई नई बात नहीं है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से आतंकियों को घाटी से भगाने के अभियान के चलते यह पैंतरा नये सिरे से आजमाया जा रहा है। इस नेटवर्क का मानना है कि घाटी में आतंकी कार्रवाई को अब ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जाता।
भीड़ काबू करने पर सेना जता रही आपत्ति
सूत्रों के मुताबिक सेना ने कश्मीर में उग्र भीड़ को काबू करने के लिए अपने इस्तेमाल पर अंदरूनी तौर पर आपत्ति जताई है।
सेना की दलील है कि आतंकवाद और उग्रवाद निरोधक कार्रवाई तक तो उसका इस्तेमाल ठीक है लेकिन भीड़ को काबू करने में सेना को पुलिस का रोल निभाना पड़ता है, जिसके लिए वह उपयुक्त नहीं है।
चूंकि सेना की ट्रेनिंग सीधे दुश्मनों से लड़ने के लिए होती है, लिहाजा आम जनता को काबू में करने के लिए उसका उपयोग घातक साबित होता है।