जम्मू-कश्मीर में छिपे हैं 65 'ए' ग्रेड पाकिस्तानी आतंकी: स्थानीय दहशतगर्द बचे 'सात', नई 'एंट्री' पर उठे सवाल
पाकिस्तान के लांच पैड पर करीब 120 आतंकियों की मौजूदगी बताई जा रही है। ये भी घुसपैठ के लिए तैयार बैठे हैं। भारतीय सुरक्षा बलों के लिए अगले दो-तीन माह चुनौती भरे रह सकते हैं। घाटी में मौजूद आतंकियों की बात करें तो उनमें 60 विदेशी यानी पाकिस्तानी हैं, जबकि लोकल आतंकी केवल सात बताए जा रहे हैं।
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जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में 65 'ए' ग्रेड पाकिस्तानी आतंकवादी मौजूद हैं। खास बात है कि अगर लोकल दहशतगर्दों की बात करें तो इनकी संख्या अब लगातार कम होती जा रही है। मौजूदा समय में लोकल आतंकियों की संख्या दस से नीचे आ चुकी है। पिछले कुछ माह में जो आतंकी मारे गए हैं, उनमें कई नए आतंकी थे। सुरक्षा बलों के लिए ये चिंता की बात है। अगर सीमा पार से आतंकियों की नई 'एंट्री' हुई है तो वह कहां से हो रही है। लिहाजा, बॉर्डर पर भारतीय सुरक्षा बल चौकस हैं, ऐसे में नई एंट्री को लेकर ये सवाल उठता है कि कहीं न कहीं कोई तो ऐसा छिद्र है, जहां से आतंकी जम्मू-कश्मीर में प्रवेश कर रहे हैं। सुरक्षा बलों के विश्वस्त सूत्रों ने इस बात से भी इनकार नहीं किया है कि यह एंट्री नेपाल या बांग्लादेश बॉर्डर के रास्ते भी संभव है। पाकिस्तान के लांच पैड पर करीब 120 आतंकियों की मौजूदगी बताई जा रही है। ये भी घुसपैठ के लिए तैयार बैठे हैं।
लांच पैड पर करीब 120 आतंकी मौजूद
केंद्रीय एजेंसियों के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सुरक्षा बलों के लिए अगले दो-तीन माह चुनौती भरे रह सकते हैं। घाटी में मौजूद आतंकियों की बात करें तो उनमें 60 विदेशी यानी पाकिस्तानी हैं, जबकि लोकल आतंकी केवल सात बताए जा रहे हैं। यह संख्या कम या ज्यादा हो सकती है। सभी खुफिया एजेंसियां, बहुत सावधानी से उक्त आंकड़ों का विश्लेषण कर रही हैं। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भी पिछले दिनों जम्मू और कश्मीर की सुरक्षा स्थिति पर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में कह चुके हैं कि सर्दियां आ रही हैं। ऐसे में सीमा पार के आतंकवादी, बर्फबारी का फायदा उठाकर घुसपैठ न कर पाएं, इसके लिए हमारे सुरक्षा बल हर तरह से तैयार रहें। पाकिस्तान के अलावा नेपाल और बांग्लादेश से लगती सीमाओं पर चौकसी बढ़ाई गई है। सीमा सुरक्षा बल 'बीएसएफ' द्वारा बॉर्डर पर सर्विलांस के लिए तकनीकी उपकरणों की मदद ली जा रही है।
अफगानिस्तान' फ्रंट पर हुई है ट्रेनिंग
सूत्र बताते हैं कि घाटी में मौजूद पाकिस्तानी मूल के दर्जनभर दहशतगर्दों की ट्रेनिंग 'अफगानिस्तान' फ्रंट पर हुई है। इन आतंकियों तक पहुंचना, सुरक्षा बलों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ये आतंकी 'ए' ग्रेड वाली श्रेणी में आते हैं। घाटी में लोकल आतंकियों की संख्या तेजी से कम होती जा रही है, लेकिन पाकिस्तानी मूल के 'ए' ग्रेड आतंकियों के रहते हुए जेएंडके में आतंकी हमले की आशंका बनी रहती है। इन आतंकियों को लोकल स्पोर्ट मिलना अभी तक बंद नहीं हुआ है। कई जगहों पर इनके मददगार यानी 'ओवर ग्राउंड वर्कर', सक्रिय हैं। सुरक्षा बलों के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है। इन्हीं मददगारों के बल पर ये आतंकवादी, बड़े हमले को अंजाम देने में कामयाब हो जाते हैं।
सर्दियों में घुसपैठ का प्रयास संभव
पिछले दिनों बीएसएफ कश्मीर फ्रंटियर के महानिरीक्षक (आईजी) अशोक यादव ने बताया था कि जेएंडके में घुसपैठ की कोशिशों से जुड़ी कई सूचनाएं आती रहती हैं। इस तरह की खुफिया रिपोर्ट हैं कि सीमा पार आतंकवादियों के लॉन्चिंग पैड हैं। बीएसएफ, सेना के साथ मिलकर नियंत्रण रेखा पर बेहद सतर्क है। पिछले समय में घुसपैठ पर अंकुश लगा है। सीमा पार के लांचिंग पैड पर घुसपैठ के लिए तैयार बैठे आतंकी, बॉर्डर पार करने की कोशिश नहीं करते, ऐसा नहीं है। वे कोशिश तो करते हैं, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिलती। भारतीय सुरक्षा बलों की सतर्कता से उनके मंसूबे नाकाम हो जाते हैं। सर्दियों में घुसपैठ के प्रयासों में वृद्धि होने की संभावना है। बीएसएफ, सीमा पर आधुनिक सर्विलांस के उपकरणों के माध्यम से निगरानी कर रही है। बॉर्डर के उस पार लगभग सवा सौ आतंकी मौजूद हैं। खुफिया सूचनाओंं का विश्लेषण करने के बाद 'सीमा सुरक्षा बल' द्वारा घुसपैठ रोकने के लिए सभी बलों के साथ मिलकर ऑपरेशनल प्लानिंग की जाती है।
हाई रैंक वाले ट्रेंड आतंकी मारे गए
पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच कई बड़ी मुठभेड़ हुई हैं। राजौरी के बाजीमाल इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में सेना के कैप्टन एमवी प्रांजल, कैप्टन शुभम और हवलदार माजिद सहित चार शहादत हुई थी। राजौरी मुठभेड़ में जो दो आतंकी मारे गए थे, उनमें से एक पाकिस्तानी आतंकी 'क्वारी' भी था। वह पाकिस्तान के आतंकी संगठन 'लश्कर ए तैयबा' का हाई रैंक टेरोरिस्ट था। उसे पाकिस्तान/अफगानिस्तान फ्रंट पर ट्रेंड किया गया था। जेएंडके में जितनी भी बड़ी मुठभेड़ हुई हैं, उनमें ज्यादातर हाई रैंक वाले ट्रेंड आतंकी मारे गए हैं। सितंबर 2023 में अनंतनाग जिले के कोकेरनाग क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल 'आरआर' के कमांडिंग अफसर (कर्नल) मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष और जम्मू कश्मीर पुलिस के डीएसपी हुमायूं भट्ट शहीद हो गए थे। इस मुठभेड़ में दो अन्य जवानों ने भी शहादत दी। 2020 के बाद जम्मू-कश्मीर में यह पहली घटना थी, जिसमें सेना के कमांडिंग अफसर शहीद हुए थे।
घुसपैठ के कई प्रयास असफल
सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ समय से बॉर्डर पर कोई बड़ी घुसपैठ नहीं हुई है, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान की तरफ से आतंकी, जेएंडके में घुसपैठ करने का प्रयास करते रहते हैं। सुरक्षा बलों द्वारा बॉर्डर पर घुसपैठ के कई प्रयास असफल किए गए हैं। नेपाल का मार्ग, आतंकियों के भारत में प्रवेश करने का एंट्री प्वाइंट तो नहीं बन रहा, ये बात सुरक्षा एजेंसियों के दिमाग में है। जेएंडके में कोकेरनाग क्षेत्र जैसे कई इलाके हैं, जहां छिपे आतंकियों तक पहुंचने में सुरक्षा बलों को लंबा वक्त लगता है।
गत वर्ष मारे गए थे 75 आतंकवादी
2014 के दौरान जेएंडके में 104 आतंकवादी मारे गए थे। 2015 में 97, 2016 में 140, 2017 में 210, 2018 में 257, 2019 में 157, 2020 में 221, 2021 में 180, 2022 में 187, 2023 में 76 और पिछले साल 75 आतंकवादी मारे गए थे। पाकिस्तानी आईएसआई, अपने गुर्गे आतंकी संगठनों की मदद से जम्मू कश्मीर में हाइब्रिड आतंकियों की भर्ती करने का प्रयास कर रही है। हालांकि इस काम में उसे सफलता नहीं मिल रही। सीमा पार के आतंकी संगठन, घाटी में मौजूद पाकिस्तानी आतंकियों को बचाना चाहते हैं।
अब स्लीपर सेल या हाईब्रिड टेरोरिस्ट
पाकिस्तान से आए आतंकी, जम्मू कश्मीर के जंगलों या पहाड़ी गुफाओं में छिपे हैं। वे सामान्य फोन से बातचीत नहीं करते। यही वजह है कि उन्हें आसानी से ट्रैक नहीं किया जा सकता। सुरक्षा बलों को ज्यादातर सूचनाएं मुखबिरों के माध्यम से ही मिलती हैं। हालांकि मुखबिरों की सूचना को क्रॉस चैक किया जाता है, लेकिन कई बार इंटेल इनपुट, पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होता। उस स्थिति में जोखिम या नुकसान की संभावना बनी रहती है। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, अब घाटी में नए आतंकी सामने नहीं आ रहे। उनकी भर्ती पर काफी हद तक नकेल कस चुकी है। अब वहां पर जो आतंकी मौजूद हैं, वही अपने स्लीपर सेल या हाईब्रिड टेरोरिस्ट की मदद से हमलों को अंजाम दे रहे हैं।
तस्वीर, सोशल मीडिया पर आ जाती थी
पहले लोकल स्तर पर जेएंडके में जब कोई युवा गायब हो जाता था तो गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की जाती थी। जम्मू कश्मीर पुलिस, लापता हुए युवक का पता लगाने का प्रयास करती। एक तरफ गुमशुदा युवक के परिजन और पुलिस उसे खोज रही होती तो दूसरी तरफ तभी उस युवक की तस्वीर सोशल मीडिया पर आ जाती थी। तस्वीर में वह युवक किसी आतंकी संगठन के सदस्य के तौर पर हथियार लहराता हुआ नजर आता। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उसे सक्रिय आतंकी मान लिया जाता था। आतंकी संगठनों को यह बात अच्छे से मालूम होती है कि पुलिस और परिजन, लापता युवक की खोजबीन में लगे हैं। घाटी में कई ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जिनमें कई युवा कुछ समय बाद ही हथियार छोड़कर दोबारा से मुख्यधारा में शामिल हो गए। आतंकी संगठन, गुमराह युवक का ब्रेनवॉश कर देते हैं। इसके बाद जब उन्हें लगता है कि वह युवक अभी भी पूरी तरह से आतंक की राह पर चलने को तैयार नहीं है और वह मुख्यधारा में लौटना चाहता है तो वे उस युवक का आतंकी संगठन के साथ फोटो वायरल कर देते हैं।
यूँ हुई लोकल आतंकियों की संख्या कम
नतीजा, वह युवक अधर में फंस जाता है। हथियार के साथ जैसे ही उसका फोटो सार्वजनिक होता है तो पुलिस उसका नाम, सक्रिय आतंकियों की सूची में डाल देती है। ऐसे में वह युवक, चाह कर भी मुख्यधारा में वापसी नहीं कर पाता। हालांकि कुछ समय से इस तरह के मामले भी काफी कम हो चुके हैं। यही वजह है कि घाटी में लोकल आतंकियों की संख्या अब दस से नीचे आ गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि सुरक्षा एजेंसियों के ठोस प्रयासों से जम्मू-कश्मीर में देश के दुश्मनों द्वारा पोषित आतंकवादी तंत्र लगभग समाप्त हो गया है। सुरक्षा बलों को क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को खतरा पहुंचाने के किसी भी प्रयास को नाकाम करने की पूरी स्वतंत्रता है।