टेरर फंडिंग केस में ईडी ने मोहम्मद सलमान की 73.12 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद और अन्य के द्वारा टेरर फंडिंग के मामले में मोहम्मद सलमान और उनके परिवार से जुड़ी 73.12 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की। हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) का संस्थापक है।
सलमान द्वारा प्राप्त धन का इस्तेमाल हरियाणा में पलवल के उतावड़ में एक मस्जिद के निर्माण और गरीब लड़कियों की शादी के लिए किया गया था। अब तक की जांच में इस आपराधिक लेन-देन की धनराशि 4.70 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
Funds received by Salman were used for construction of a mosque at Uttawsr in Palwal,Haryana and marriage of poor girls. Investigation so far have resulted in initial quantification of proceeds of crime to the tune of more than Rs 4.70 crore https://t.co/bnwKWrqC0g
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— ANI (@ANI) May 2, 2019
इससे पहले पलवल मस्जिद पर की गई खुफिया एजेंसी (एनआईए) की जांच में पता चला था कि निजामुद्दीन के रहने वाले मोहम्मद सलमान ने हरियाणा के पलवल में खुलफ-ए-राशिदीन मस्जिद के निर्माण के लिए 70 लाख रुपये दिए थे। वह उस वक्त दुबई में था जब वह एलईटी के सदस्यों से मिला। उसे उसकी बेटियों की शादी के लिए भी पैसे मिले। एनआईए का कहना है कि इमाम सलमान को ये पैसा कथित तौर पर एलईटी से जुड़े गैर सरकारी संगठन फलाह-ए-इंसानियत से मिला है।
एनआईए के एक अधिकारी का कहना है, "हमारे पास इमाम सलमान के पैसे और पाकिस्तान स्थित एलईटी से जुड़े होने के पुख्ता सबूत हैं। हमारे पास ई मेल और चौट्स के रूप में इलेक्ट्रोनिक सबूत हैं जिनमें उसने एफआएफ से जुड़े पाकिस्तानी नागरिकों के साथ फंड को लेकर बातचीत की है। ऐसे ही दो तरह के संचार पाकिस्तान और दुबई से जुड़े हैं। हमें यह भी पता चला है कि वह तीन बार पाकिस्तान जा चुका है।"
बता दें एनआईए ने 3 अक्तूबर को पलवल के उतावड़ गांव स्थित मस्जिद में छापेमारी की थी। उससे पहले तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इन लोगों को टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन तीन लोगों में से एक मस्जिद का इमाम मोहम्मद सलमान भी शामिल था। गांव के अधिकतर लोग इमाम सलमान पर लगे आरोप को गलत मानते हैं।
मस्जिद का निर्माण 1998 में शुरू हुआ था और इसका उद्घाटन 2010 में हुआ। इसके निर्माण के समय से जुड़े आस मुहम्मद नामी का कहना है, "इमाम सलमान के पिता एक बड़े धर्मगुरु थे जिनकी पहचान दुनियाभर में थी और उनमें से कुछ उन्हें मस्जिद की तामीर के लिए पैसे भेजते थे। मगर मस्जिद बनी है स्थानीय लोगों के चंदे से।"