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संभलः भागवत कथा में लाउडस्पीकर बजाने को लेकर तनाव
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Wed, 05 Oct 2016 01:59 AM IST
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सांप्रदायिक तनाव (सांकेतिक तस्वीर)
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नखासा थाना क्षेत्र के सुनवारी में श्रीमदभागवत कथा के दौरान लाउडस्पीकर लगाए जाने का एक समुदाय के लोगों ने विरोध कर दिया। इससे दोनों पक्षों में तनातनी का माहौल हो गया। जानकारी पर पहुंची पुलिस ने विरोध करने वालों को शांत कराया। बाद में दोनों पक्षों के लोगों को थाने बुलाकर शांति व्यवस्था बनाए रखने की नसीहत दी है।
तहसील क्षेत्र के गांव सुनवारी में चामुंडा मंदिर पर सोमवार की रात भागवत कथा प्रारंभ हुई थी। लाउडस्पीकर लगाकर भागवत कथा सुनाई गई। मंगलवार को भागवत कथा प्रारंभ होने से पहले ही एक समुदाय के कुछ लोगों ने लाउडस्पीकर का विरोध कर दिया। विरोध की जानकारी पर आयोजकों के समर्थक कथा स्थल पर एकत्र होने लगे। दोनों पक्षों में तनातनी का माहौल बन गया। ऐसे में पुलिस को भी जानकारी दे दी गई। तत्काल पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने विरोध कर रहे गुस्साए लोगों को शांत किया। इसके बाद मामले की जानकारी की। मामले का निस्तारण न होने पर पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों से थाने चलने को कहा। लोग ट्रैक्टर-ट्राली लेकर थाने आ गए। थानाध्यक्ष केके तिवारी दोनों पक्षों के लोगों से बात की। साथ ही यह भी कहा कि यदि किसी ने शांति व्यवस्था को खतरा पहुंचाया तो पुलिस कानूनी कार्रवाई का शिकंजा कसेगी। थाने में बातचीत के दौरान तीखी बहस हुई। एसओ ने दोनों पक्षों के लोगों को समझा बुझाकर शांत कर दिया। थानाध्यक्ष केके तिवारी ने बताया कि गांव में एक पक्ष के लोगों ने लाउडस्पीकर बजाने का विरोध किया था। दोनों पक्षों के लोगों से वार्ता करके उन्हें समझा दिया गया है। गांव में भागवत होगी।
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल रहा है सुनवारी गांव
संभल। तहसील क्षेत्र के गांव सुनवारी हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल रहा है। यहां पर दोनों पक्षों के लोग एक दूसरे के धार्मिक कार्यक्रमों में भी मदद करते रहे हैं। लाउडस्पीकर लगाने को लेकर जब विवाद उभरा तो लोगों के तमाम समझदार लोगों ने समझौते की पहल की और पुलिस के सामने बातचीत से मामले को निपटाया तथा सौहार्द्र की परंपरा को कायम रखने का निर्णय लिया है। गांव के लोगों ने बताया कि गांव में एक मजार भी है। जिस पर दोनों समुदायों के लोग जाकर मन्नतें मांगते हैं।
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यहां से पनपा विवाद
तीन माह पहले एक समुदाय के लोगों ने मजार पर लाउडस्पीकर लगाकर कव्वाली का आयोजन किया था। उस समय कुछ लोगों ने पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच नई परंपरा डालने की बात कहते हुए लाउडस्पीकर को बंद करा दिया। ऐसे में अब जब भागवत कथा शुरू हुई तो दूसरे पक्ष ने लाउडस्पीकर का बजाने का विरोध कर दिया।
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तहसील क्षेत्र के गांव सुनवारी में चामुंडा मंदिर पर सोमवार की रात भागवत कथा प्रारंभ हुई थी। लाउडस्पीकर लगाकर भागवत कथा सुनाई गई। मंगलवार को भागवत कथा प्रारंभ होने से पहले ही एक समुदाय के कुछ लोगों ने लाउडस्पीकर का विरोध कर दिया। विरोध की जानकारी पर आयोजकों के समर्थक कथा स्थल पर एकत्र होने लगे। दोनों पक्षों में तनातनी का माहौल बन गया। ऐसे में पुलिस को भी जानकारी दे दी गई। तत्काल पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने विरोध कर रहे गुस्साए लोगों को शांत किया। इसके बाद मामले की जानकारी की। मामले का निस्तारण न होने पर पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों से थाने चलने को कहा। लोग ट्रैक्टर-ट्राली लेकर थाने आ गए। थानाध्यक्ष केके तिवारी दोनों पक्षों के लोगों से बात की। साथ ही यह भी कहा कि यदि किसी ने शांति व्यवस्था को खतरा पहुंचाया तो पुलिस कानूनी कार्रवाई का शिकंजा कसेगी। थाने में बातचीत के दौरान तीखी बहस हुई। एसओ ने दोनों पक्षों के लोगों को समझा बुझाकर शांत कर दिया। थानाध्यक्ष केके तिवारी ने बताया कि गांव में एक पक्ष के लोगों ने लाउडस्पीकर बजाने का विरोध किया था। दोनों पक्षों के लोगों से वार्ता करके उन्हें समझा दिया गया है। गांव में भागवत होगी।
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हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल रहा है सुनवारी गांव
संभल। तहसील क्षेत्र के गांव सुनवारी हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल रहा है। यहां पर दोनों पक्षों के लोग एक दूसरे के धार्मिक कार्यक्रमों में भी मदद करते रहे हैं। लाउडस्पीकर लगाने को लेकर जब विवाद उभरा तो लोगों के तमाम समझदार लोगों ने समझौते की पहल की और पुलिस के सामने बातचीत से मामले को निपटाया तथा सौहार्द्र की परंपरा को कायम रखने का निर्णय लिया है। गांव के लोगों ने बताया कि गांव में एक मजार भी है। जिस पर दोनों समुदायों के लोग जाकर मन्नतें मांगते हैं।
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यहां से पनपा विवाद
तीन माह पहले एक समुदाय के लोगों ने मजार पर लाउडस्पीकर लगाकर कव्वाली का आयोजन किया था। उस समय कुछ लोगों ने पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच नई परंपरा डालने की बात कहते हुए लाउडस्पीकर को बंद करा दिया। ऐसे में अब जब भागवत कथा शुरू हुई तो दूसरे पक्ष ने लाउडस्पीकर का बजाने का विरोध कर दिया।