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हमें लड़कियों को गलती करने की आजादी देनी चाहिए: सचिन तेंदुलकर
Updated Thu, 12 Oct 2017 12:45 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय गर्ल चाइल्ड डे सेलिब्रेशन
- फोटो : unicef
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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और यूनिसेफ के गुडविल एम्बेसडर सचिन तेंदुलकर ने बुधवार को 'इंटरनेशनल डे ऑफ द गर्ल चाइल्ड' के मौके पर नई दिल्ली में यूनिसेफ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान सचिन ने कहा, हमने लड़कियों को दायरे में बहुत दिन बांध लिया, अब हमें उन्हें गलती करने की आजादी देनी चाहिए, क्योंकि इससे ही उन्हें जीवन की सीख मिलेगी।
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मास्टर ब्लास्टर ने कहा, लड़कियां क्या बनना चाहती हैं उन्हें ये चुनने की आजादी दी जानी चाहिए। ये निर्णय उनके पैरेंन्टस को नहीं लेना चाहिए। तेंदुलकर ने आगे कहा, हमारे यहां जब बेटी पैदा होती है तो कहते हैं कि लक्ष्मी घर आई है, अच्छा भाग्य लाई है। लेकिन क्या हम आगे चलकर उस लक्ष्मी का ख्याल रखते हैं क्या उसे वो सम्मान देते हैं?
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भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित महान क्रिकेटर ने बाल विवाह की आलोचना करते हुए कहा, भारत में 27 प्रतिशत बच्चियों की शादी इसके लिए निर्धारित कानूनी उम्र से पहले हो जाती है। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। मैं बाल विवाह के खिलाफ और बच्चियों के बेहतर भविष्य के साथ खड़ा हूं। मास्टर ब्लास्टर ने अपनी बल्लेबाजी की तरह सधे और आक्रामक अंदाज में कहा, यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हमारे देश की बच्चियां सुरक्षित और सहज महसूस कर सकें।
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खेल से दुनिया की चुनौतियों का सामना करने का विश्वास पैदा होता है: मिताली राज
यूनिसेफ के कार्यक्रम में सचिन तेंदुलकर
कार्यक्रम में मौजूद भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज ने कहा, जब आप ऐसा जीवन चुनते हैं जो समाज द्वारा बनाए गए उसूलों और सिद्धान्तों से अलग है तो निश्चित तौर पर आपके सामने कई तरह की चुनौतियां आएंगी। उन्होंने आगे कहा, बाल विवाह पर रोक लगनी चाहिए और लड़कियों को खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें आर्थिक रूप से सुरक्षित होने में मदद मिलती है।
टीम इंडिया की कप्तान ने कहा, हर बच्चे को खेल में भाग लेना चाहिए इससे टीम वर्क बढ़ता है, मानसिक दृढ़ता आती है और बच्चे स्वस्थ रहते हैं। इसके फलस्वरूप उनके अंदर दुनिया की चुनौतियों का सामना करने का विश्वास पैदा होता है। मिताली ने कहा , मैं हमेशा से बेस्ट बनना चाहती थी। मैंने हमेशा एक्सिलेंस में विश्वास किया है साथ ही किसी भी चीज को अपना ध्यान भंग नहीं करने दिया।
कार्यक्रम में शामिल हुईं केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा लड़कियों की बेहतरी के लिए समाज की मानसिकता में बदलाव करना जरूरी है। लोग लड़कियों को पराया धन मानते हैं और उनपर निवेश नहीं करना चाहते। लड़कियों के साथ खान-पान में भी भेदभाव होता है इसीलिए देश में लड़कों के मुकाबले लड़कियां ज्यादा कुपोषित हैं। बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ को सरकार का सबसे सफल कार्यक्रम बताते हुए मेनका गांधी ने आगे कहा, तीन साल में ही इस कार्यक्रम के परिणाम दिखने लगे हैं। देश के 146 जिलों में लिंगानुपात में बढ़ोत्तरी हो रही है। सरकार ने मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रमों में भी लड़कियों की भागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया है।
टीम इंडिया की कप्तान ने कहा, हर बच्चे को खेल में भाग लेना चाहिए इससे टीम वर्क बढ़ता है, मानसिक दृढ़ता आती है और बच्चे स्वस्थ रहते हैं। इसके फलस्वरूप उनके अंदर दुनिया की चुनौतियों का सामना करने का विश्वास पैदा होता है। मिताली ने कहा , मैं हमेशा से बेस्ट बनना चाहती थी। मैंने हमेशा एक्सिलेंस में विश्वास किया है साथ ही किसी भी चीज को अपना ध्यान भंग नहीं करने दिया।
कार्यक्रम में शामिल हुईं केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा लड़कियों की बेहतरी के लिए समाज की मानसिकता में बदलाव करना जरूरी है। लोग लड़कियों को पराया धन मानते हैं और उनपर निवेश नहीं करना चाहते। लड़कियों के साथ खान-पान में भी भेदभाव होता है इसीलिए देश में लड़कों के मुकाबले लड़कियां ज्यादा कुपोषित हैं। बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ को सरकार का सबसे सफल कार्यक्रम बताते हुए मेनका गांधी ने आगे कहा, तीन साल में ही इस कार्यक्रम के परिणाम दिखने लगे हैं। देश के 146 जिलों में लिंगानुपात में बढ़ोत्तरी हो रही है। सरकार ने मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रमों में भी लड़कियों की भागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया है।
बचाओ-बेटी पढ़ाओ कैंपेन तभी सफल होगा जब लड़कों की मानसिकता में बदलाव आएगा: रजनी झा
यूनिसेफ के कार्यक्रम में सचिन और मिताली
- फोटो : unicef
कार्यक्रम में शिरकत करने आईं मध्यप्रदेश के ग्वालियर की पैरा स्विमर रजनी झा ने कहा, सरकार का बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कैंपेन तभी सफल होगा जब लड़कों की मानसिकता में बदलाव आएगा। उन्होंने आगे कहा, लड़कियों के लिए घर, स्कूल और कॉलेज में सहयोगात्मक माहौल बनाकर उनकी राह में आ रही बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ उन्हें खेल को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। ऐसा करके ही लैंगिक समानता के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
कार्यक्रम में सचिन, मिताली और पैरा स्विमर रजनी झा के अलावा मध्य प्रदेश के धार की नेशनल कराटे चैंपियन माना मांडलेकर, भारतीय महिला बास्केटबॉल टीम की सदस्य रासप्रीत सिद्धू उपस्थित थीं।
यूनिसेफ की इंडिया रिप्रेजेन्टेटिव डॉ यासमिन अली हक़ ने कहा कि उनका हम भारत में लड़कियों की वैल्यू को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। खेल उन्हें सशक्त बनाने का एक माध्यम है। उनके अधिकारों के साथ उनकी एक अच्छी और सुदृढ़ छवि बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
कार्यक्रम में सचिन, मिताली और पैरा स्विमर रजनी झा के अलावा मध्य प्रदेश के धार की नेशनल कराटे चैंपियन माना मांडलेकर, भारतीय महिला बास्केटबॉल टीम की सदस्य रासप्रीत सिद्धू उपस्थित थीं।
यूनिसेफ की इंडिया रिप्रेजेन्टेटिव डॉ यासमिन अली हक़ ने कहा कि उनका हम भारत में लड़कियों की वैल्यू को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। खेल उन्हें सशक्त बनाने का एक माध्यम है। उनके अधिकारों के साथ उनकी एक अच्छी और सुदृढ़ छवि बनाने की कोशिश में जुटे हैं।