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eSanjeevani: मुफ्त टेलीमेडिसिन सेवा का लाभ उठाने वालों की संख्या 10 करोड़ के पार, मंडाविया ने की सराहना
Fri, 17 Feb 2023 02:45 AM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Fri, 17 Feb 2023 02:45 AM IST
सार
ई-संजीवनी पारंपरिक रूप से डॉक्टर के पास जाकर परामर्श लेने के स्थान पर रोगी को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से घर बैठे ही चिकित्सीय लाभ उठाने का विकल्प प्रदान करती है। इसमें दो तरह की टेलीमेडिसिन सेवाएं डॉक्टर-टू-डॉक्टर (ई-संजीवनी) और रोगी-से-डॉक्टर (ई-संजीवनी ओपीडी) टेली-परामर्श शामिल है।
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मनसुख मंडाविया (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
केंद्र सरकार की मुफ्त टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी (eSanjeevani) का लाभ उठाने वालों की संख्या 10 करोड़ से अधिक हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने गुरुवार को यह जानकारी दी। मंत्री ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल ई-संजीवनी के लाभार्थियों में 57 प्रतिशत महिलाएं और लगभग 12 प्रतिशत वरिष्ठ नागरिक हैं। मंडाविया ने कहा कि ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म समाज के कमजोर वर्गों में पहुंच बना रहा है।
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बता दें कि ई-संजीवनी पारंपरिक रूप से डॉक्टर के पास जाकर परामर्श लेने के स्थान पर रोगी को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से घर बैठे ही चिकित्सीय लाभ उठाने का विकल्प प्रदान करती है। इसमें दो तरह की टेलीमेडिसिन सेवाएं डॉक्टर-टू-डॉक्टर (ई-संजीवनी) और रोगी-से-डॉक्टर (ई-संजीवनी ओपीडी) टेली-परामर्श शामिल है। ई-संजीवनी को नवंबर 2019 में आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एबी-एचडब्ल्यूसी) कार्यक्रम के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में शुरू किया गया था।
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ई-फार्मेसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी
वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ई-फार्मेसी द्वारा दवाओं के दुरूपयोग के खिलाफ उन्हें बंद करने सहित कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है। आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने कहा कि ई-फार्मेसी वर्तमान में उस बिजनेस मॉडल का अनुसरण कर रहे हैं जो उन रोगियों के लिए संदिग्ध हैं, जो ऑनलाइन दवा का ऑर्डर करते हैं। उनकी डेटा गोपनीयता खतरे में है और दवाओं के दुरुपयोग की संभावना है।
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भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने ऑनलाइन दवा बेचने वाली अवैध ई-फार्मेसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। डीसीजीआई द्वारा आठ फरवरी को ऑनलाइन फार्मेसी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उन्हें दो दिनों के भीतर जवाब देने या देश में दवाओं की बिक्री और वितरण पर बिना किसी नोटिस के कड़ी कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी गई थी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, ई-फार्मेसी औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन कर रही हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने 20 से अधिक ऑनलाइन फार्मेसी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें कुछ बड़ी कंपनियां Tata1mg, Practo, Apollo, Amazon, Flipkart और अन्य शामिल हैं।
एक बयान में कहा गया है कि ऑल इंडियन ओरिजिन केमिस्ट्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स (AIOCD) ने केंद्र सरकार को इस बात को लेकर आगाह किया था कि औषधि अधिनियम, फार्मेसी अधिनियम और अन्य दवाओं से संबंधित नियम/आदेश व आचार संहिता इंटरनेट पर दवाओं की बिक्री और छूट के साथ विज्ञापन द्वारा दवा की बिक्री को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं देते हैं। क्योंकि यह जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।