SLBC Tunnel Collapse: हादसे के पांच दिन बाद घटनास्थल तक पहुंच सकी बचाव टीम, फंसे मजदूरों की अब भी कोई खबर नहीं
SLBC Tunnel Collapse: एसएलबीसी सुरंग में हुए हादसे के बाद बचाव अभियान में लगे एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और रैट माइनर्स की 20 सदस्यीय टीम पांच दिन बाद हादसे वाली जगह पर पहुंच गई है। लेकिन अभी तक फंसे मजदूरों का कोई भी पता नहीं चल सका है।
विस्तार
#WATCH | नागरकुरनूल, तेलंगाना | SLBC सुरंग घटना | वीडियो श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (SLBC) सुरंग से है।
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22 फरवरी को सुरंग का एक हिस्सा ढहने के बाद अंदर फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए बचाव अभियान चल रहा है। pic.twitter.com/e6kadO31dUविज्ञापन विज्ञापन— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 26, 2025
हादसे के पांच दिन बाद घटनास्थल तक पहुंची बचाव टीम
अधिकारी ने आगे बताया कि, 'एक दिन पहले वे 40 मीटर (सुरंग के अंत से पहले) तक पहुंचने में सक्षम थे। कल वे उस 40 मीटर तक भी पहुंच गए'। वैभव गायकवाड़ ने आगे कहा कि टीम ने स्थान पर खोज की, लेकिन कल रात कुछ भी नहीं मिला। उन्होंने कहा कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की टीम ने नमूने एकत्र किए हैं, लेकिन अभी तक मिट्टी की ताकत और अन्य पर अपनी रिपोर्ट नहीं दी है।
सुरंग में लगातार भेजी जा रही ऑक्सीजन- उत्तम कुमार
इससे पहले सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा था कि फंसे हुए लोगों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है, हालांकि सुरंग में लगातार ऑक्सीजन पंप की जा रही है। 22 फरवरी को सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने के बाद श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) सुरंग परियोजना पर काम कर रहे आठ कर्मी फंस गए थे।
#WATCH तेलंगाना के मंत्री कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी ने 22 फरवरी को सुरंग के एक हिस्से के ढह जाने के बाद सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए चल रहे बचाव अभियान का निरीक्षण किया। pic.twitter.com/xqRScxb6NY
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 26, 2025
खोजी कुत्तों का इस्तेमाल किया जाएगा- कलेक्टर
श्रीशैलम लेफ्ट बैंक नहर सुरंग के अंदर कीचड़ जमने लगा है, इसलिए बचाव दल फंसे हुए लोगों का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों का इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है। मामले की जानकारी देते हुए, जिला कलेक्टर बी संतोष ने कहा कि राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) से आज मिट्टी के स्थिरीकरण और अन्य मुद्दों पर अपनी राय देने की उम्मीद है, जिसके आधार पर कार्य योजना का मसौदा तैयार किया जाएगा।
संतोष ने यह भी कहा कि टीमें थर्मल फिशिंग बोट का उपयोग करके सुरंग के अंदर दुर्घटना स्थल तक पहुंचने में सक्षम थीं। शुरू में दुर्घटनास्थल से 40 मीटर की दूरी थी। वहां कीचड़ था। लेकिन अब वह अधिकतम सीमा तक जम गया है। इसलिए टीम दुर्घटनास्थल तक जा सकती है... इसलिए खोजी कुत्ते की मदद से हम फंसे हुए लोगों का पता लगाने की कोशिश करेंगे।' उन्होंने आगे कहा कि प्राथमिकता व्यक्तियों का पता लगाना है। कलेक्टर ने कहा कि अधिकारियों को उम्मीद है कि कन्वेयर बेल्ट आज काम करना शुरू कर देगा और आगे की खुदाई के लिए टनल बोरिंग मशीन में कुछ जगह बनानी होगी।
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