{"_id":"686ff726576354103f09498f","slug":"telangana-to-issue-ordinance-to-amend-law-to-provide-42-pc-quota-for-backward-classes-in-local-body-polls-2025-07-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Telangana: निकाय चुनाव में पिछड़ी जातियों को 42% आरक्षण की तैयारी; कानून संशोधन अध्यादेश लाएगी रेवंत सरकार","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Telangana: निकाय चुनाव में पिछड़ी जातियों को 42% आरक्षण की तैयारी; कानून संशोधन अध्यादेश लाएगी रेवंत सरकार
Thu, 10 Jul 2025 10:54 PM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: शिव शुक्ला
Updated Thu, 10 Jul 2025 10:54 PM IST
सार
तेलंगाना के मंत्रिमंडल ने राज्य विधानसभा की ओर से 2018 में पारित अधिनियम में संशोधन कर स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों को 42 फीसदी आरक्षण देने के लिए एक अध्यादेश जारी करने का फैसला किया है।
विज्ञापन
ए. रेवंत रेड्डी, सीएम, तेलंगाना
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तेलंगाना की रेवंत सरकार निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों को 42 फीसदी आरक्षण देने की तैयारी में है। इस बाबत मंत्रिमंडल ने राज्य विधानसभा की ओर से 2018 में पारित अधिनियम में संशोधन कर एक अध्यादेश जारी करने का फैसला किया है। कैबिनेट बैठक के राजस्व मंत्री पी श्रीनिवास रेड्डी ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार कांग्रेस पार्टी के पहले किए गए वादे के अनुसार पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
विज्ञापन
रेड्डी ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए, 2018 में विधानसभा से पारित एक अधिनियम में संशोधन हेतु एक अध्यादेश जारी किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले 25 जून को, तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर स्थानीय निकायों के चुनाव कराने का निर्देश दिया था।
विज्ञापन
श्रीनिवास रेड्डी ने आगे कहा कि तेलंगाना के महाधिवक्ता को कैबिनेट बैठक के लिए आमंत्रित किया गया था और अध्यादेश के मुद्दे पर उनकी कानूनी राय मांगी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य विधानसभा ने पिछड़ी जातियों को 42 प्रतिशत आरक्षण देने वाला विधेयक पहले ही पारित कर दिया था और इसे राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति की मंज़ूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया था। हालाँकि, यह विधेयक पारित नहीं हो पाया था।
विज्ञापन