Elections 2023: 2018 के बाद कितनी बदलीं तेलंगाना-मिजोरम की विधानसभाएं, दोनों जगह किन दलों की कैसी तैयारी?
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Telangana-Mizoram Assembly Election 2023: तेलंगाना और मिजोरम में चुनावी बिगुल बज गया है। चुनाव आयोग ने इन दोनों राज्यों के लिए चुनाव तारीखों का एलान कर दिया। इससे पहले बीआरएस, भाजपा, कांग्रेस समेत सभी दल चुनाव प्रचार में ताकत झोक रहे हैं।
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विस्तार
तेलंगाना और मिजोरम समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का एलान कर दिया गया। चुनाव आयोग के मुताबिक, मिजोरम में सात नवंबर और तेलंगाना में 30 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। दोनों राज्यों के नतीजे बाकी तीन राज्यों के साथ तीन दिसंबर को आएंगे।
तेलंगाना: 119 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में मतदान
- विधानसभा चुनाव के लिए तीन नवंबर को अधिसूचना जारी होगी।
- 10 नवंबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे।
- नामांकन पत्रों की जांच 13 नवंबर को की जाएगी
- 15 नवंबर तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे।
- 30 नवंबर को मतदान होगा और तीन दिसंबर को मतगणना होगी।
मिजोरम: सभी 40 विधानसभा सीटों के लिए सात नवंबर को मतदान
- मिजोरम की सभी 40 विधानसभा सीटों के लिए सात नवंबर को मतदान होगा।
- तीन दिसंबर को मतगणना होगी।
- चुनाव के लिए 13 अक्तूबर को अधिसूचना जारी की जाएगी।
- 20 अक्तूबर को नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे।
- नामांकन पत्रों की जांच 21 अक्तूबर को होगी।
- 23 अक्तूबर को नामांकन पत्र वापस लिए जा सकेंगे।
- मिजोरम विधानसभा का कार्यकाल 17 दिसंबर को खत्म होगा।
तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में भारत राष्ट्रीय समिति (बीआरएस) की सरकार है तो मिजोरम में जोरमथंगा के नेतृत्व वाली मिजो नेशनल फ्रंट सत्ता में है। 2018 में आए चुनाव नतीजों के बाद तेलंगाना में तत्कालीन तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस) ने सरकार बनाई। के. चंद्रशेखर राव राज्य के मुख्यमंत्री बने। वहीं पूर्वोत्तर राज्य में मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी, जिसके मुखिया जोरमथंगा बने। आइए जानते हैं तेलंगाना और मिजोरम में बीते पांच साल में हुए सियासी घटनाक्रमों के बारे में...
शुरुआत तेलंगाना से करते हैं...
2018 में तय समय से छह महीने पहले भंग की गई विधानसभा
राज्य विधानसभा का पिछला चुनाव लोकसभा चुनाव 2019 के साथ कराया जाना था। हालांकि, टीआरएस (अब बीआरएस यानी भारत राष्ट्र समिति) सरकार की सिफारिश के तहत विधानसभा को भंग कर दिया गया, जिसके कारण निर्धारित समय से पूर्व चुनाव कराया गया। ये चुनाव दिसंबर 2018 में चार राज्यों- मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के विधानसभा चुनाव के साथ ही हुए थे।
2018 में नतीजे क्या रहे थे?
तेलंगाना में पिछले विधानसभा चुनाव में आंदोलन से उभरी भारत राष्ट्र समिति ने एकतरफा जीत दर्ज की थी। 119 सदस्यीय विधानसभा में केसीआर के नेतृत्व वाली बीआरएस को 88 सीटें मिलीं थीं। इसके अलावा कांग्रेस ने 19, आईएमआईएम ने सात, टीडीपी ने दो और भाजपा और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (एआईएफबी) के एक-एक सीटें जीती थीं। वहीं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली थी। नतीजों के बाद बीआरएस ने सरकार बनाई। इस तरह से राज्य के गठन के बाद लगातार दूसरी बार प्रचंड बहुमत से बीआरएस ने सरकार बनी और के. चंद्रशेखर राव राज्य के मुख्यमंत्री बने।
कितनी सीटों पर उपचुनाव हुआ?
राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद चार सीटों पर उपचुनाव हुए। पहला उपचुनाव हुजूरनगर विधानसभा क्षेत्र के लिए 21 अक्तूबर 2019 को हुआ था। मौजूदा विधायक और तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष एन. उत्तम कुमार रेड्डी के इस्तीफा देने के बाद हुजूरनगर उपचुनाव जरूरी हो गया था। रेड्डी ने 2019 के आम चुनावों के दौरान नलगोंडा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। यहां हुए चुनाव में बीआरएस प्रत्याशी सैदिरेड्डी ने कांग्रेस प्रत्याशी पद्मावती रेड्डी को हराया।
तीन नवंबर 2020 को दुब्बक सीट को भरने के लिए उपचुनाव कराया गया। इस चुनाव में बीजेपी के एम रघुनंदन राव ने बीआरएस के सोलीपेटा सुजाता के खिलाफ जीत दर्ज की। इस विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव बीआरएस विधायक रामलिंगा रेड्डी के निधन के कारण जरूरी हो गया था।
नागार्जुन सागर सीट के लिए 17 अप्रैल 2021 को मतदान हुआ था। इस उपचुनाव में बीआरएस प्रत्याशी नोमुला भगत ने कांग्रेस के जाना रेड्डी को हराकर जीत का परचम लहराया था। इस सीट पर उपचुनाव बीआरएस के मौजूदा विधायक नोमूला नरसिम्हैया के निधन के चलते आवश्यक हो गया था।
मुनुगोडे विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीआरएस ने जीत दर्ज की। इस सीट में बीआरएस उम्मीदवार कूसुकुंतला प्रभाकर रेड्डीने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के कोमातीरेड्डी को पराजित किया। इस सीट में उपचुनाव के लिए तीन नवंबर 2022 को मतदान हुआ था। बता दें कि कांग्रेस विधायक कोमातीरेड्डी राज गोपाल रेड्डी के पार्टी से इस्तीफे की वजह से इस सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा था।
अभी क्या है विधानसभा की स्थिति?
2018 के चुनाव के बाद 119 सदस्यीय विधानसभा में बीआरएस की 88, कांग्रेस की 19, आईएमआईएम की सात, टीडीपी की दो, भाजपा की एक, एआईएफबी की एक सीट थी। इसके अलावा एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली थी। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद हुए चार उपचुनावों में से तीन पर सत्ताधारी बीआरएस ने जीत दर्ज की। पहले इनमें से तीन सीटें उसके पास थी जबकि बीआरएस ने एक सीट कांग्रेस ने छीन ली। वहीं, एक सीट भाजपा ने बीआरएस की कब्जाई। इसके अलावा कांग्रेस के 12 विधायकों के बीआरएस में शामिल होने से पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़ गई है। इस वक्त 119 सदस्यीय विधानसभा में बीआरएस के 101, एआईएमआईएम के सात, कांग्रेस के पांच और भाजपा के तीन विधायक हैं। दो सीट पर निर्दलीय विधायक हैं, जबकि एक सीट अभी खाली है।
इस चुनाव में किसकी तैयारी कैसी है?
2018 में तेलंगाना के चुनाव सात दिसंबर को हुए थे। ऐसे में चुनावों को अब कुछ ही वक्त बचा है। इस चुनाव में बीआरएस के सामने अपनी सत्ता सुरक्षित रखने की चुनौती होगी। वहीं, केंद्र की सत्ताधारी भाजपा, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल अपने प्रदर्शन को मजबूत करने को देखेंगे।
अब बात मिजोरम की करते हैं...
2018 में नतीजे क्या रहे थे?
राज्य में पिछले चुनाव 28 नवंबर 2018 को हुए थे। इस चुनाव में 40 सदस्यीय विधानसभा में एमएनएफ को 27 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस ने चार सीटें, जबकि भाजपा को एक सीट पर विजय मिली थी। इसके अलावा आठ सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत मिली थी। इसके साथ ही राज्य में मुख्यमंत्री जोरमथंगा के नेतृत्व में एमएनएफ की सरकार बनी थी।
कितनी सीटों पर उपचुनाव हुए?
- आइजोल पश्चिम-1 सीट से विधायक लालदुहोमा के इस्तीफे के बाद 2019 में उपचुनाव कराए गए थे। चुनाव में इस सीट से एमएनएफ के जोथांट लुआंगा ने जीत हासिल की।
- तुइरियल सीट से विधायक एंड्रयू एच. थंगलियाना की मृत्यु के बाद 2021 में उपचुनाव हुए थे। तुइरियल से एमएनएफ के नेता लाल डाउंग्लिआना ने सीट अपने नाम की।
- सेरछिप सीट से विधायक लालदुहोमा को दलबदल विरोधी कानून का उल्लंघन करने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। अयोग्यता के बाद जरूरी हुए 2021 के उपचुनाव में लालदुहोमा ने जोरम पीपुल्स मूवमेंट के टिकट पर चुनाव जीता।
अभी क्या है विधानसभा की स्थिति?
वर्तमान में सियासी समीकरण की बात करें तो, इस वक्त 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा में एमएनएफ के 28, कांग्रेस के पांच, जेडपीएम के एक और भाजपा के एक विधायक हैं। पांच सीट पर निर्दलीय विधायक हैं।
इस चुनाव में किसकी तैयारी कैसी है?
इस चुनाव में मुख्य मुकाबला एमएनएफ, जेडपीएम, कांग्रेस और भाजपा के बीच होने की उम्मीद है। इस वक्त राज्य में एमएनएफ की सरकार है जिसके सामने चुनाव में अपनी सत्ता बचाने की चुनौती होगी। राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री जोरामथंगा हैं। एमएनएफ इस बार भी उनके चेहरे के साथ ही चुनाव में जाएगी। इससे पहले चार अक्तूबर को 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा के लिए एमएनएफ ने सभी सीटों पर नामों की घोषणा की थी। जोरामथंगा आइजोल पूर्व-I से चुनाव लड़ेंगे।
वहीं राज्य के अन्य मुख्य विपक्षी दलों कांग्रेस, भाजपा और जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) ने अब तक कोई सूची नहीं जारी की है। भाजपा इस बार 15 से 20 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। कांग्रेस भी राज्य की सत्ता में काबिज होने के लिए जोर-आजमाइश लगा रही है। पार्टी ने राज्य विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में दो स्थानीय पार्टियों पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) और जोरम नेशनलिस्ट पार्टी (जेडएनपी) के साथ मिलकर 'मिजोरम सेक्युलर अलायंस' (एमएसए) बनाया है।