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तेलंगाना: गणपति विसर्जन के दौरान अलग-अलग हादसों में 13 की मौत, पुलिसकर्मी ने भी तोड़ा दम; 26 श्रद्धालु घायल
Sat, 26 Sep 2026 02:28 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Sat, 26 Sep 2026 02:28 PM IST
सार
तेलंगाना में गणेश विसर्जन के दौरान अलग-अलग हादसों में पुलिस सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 26 लोग घायल हुए। साइबराबाद के पटनचेरू में छह मौतें हुईं। डीजीपी के मुताबिक, इस साल 1.24 लाख मूर्तियों का रजिस्ट्रेशन हुआ।
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गणपति विसर्जन के दौरान हादसा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ एआई
विस्तार
तेलंगाना में गणेश विसर्जन समारोह के दौरान एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर समेत 13 लोगों की मौत हो गई। शहर में गणेश विसर्जन के दिन डीजीपी सीवी आनंद ने यह जानकारी दी। आनंद ने बताया कि विसर्जन से जुड़ी घटनाओं में 26 अन्य लोग घायल हुए। विसर्जन का काम शनिवार दोपहर तक चलता रहा।
पुलिसकर्मी भी हादसे का हुआ शिकार
बता दें कि डीजीपी सीवी आनंद ने दुख जताया कि तेलंगाना में गणेश विसर्जन के जश्न के दौरान कई जगहों पर दुखद घटनाएं हुईं। वहीं, मरने वालों में न्यू कोठागुडेम के सब-इंस्पेक्टर (एसआई) वेंकन्ना भी शामिल थे, जो विसर्जन ड्यूटी के लिए हैदराबाद आए थे।
साइबराबाद इलाके के पटनचेरू में छह लोगों की मौत हुई। जबकि शुक्रवार तड़के खैरताबाद में शिवा नाम के एक व्यक्ति की मौत हो गई। निर्मल में दिल का दौरा पड़ने से एक और व्यक्ति की मौत की खबर मिली। आनंद ने कहा कि डीजे सिस्टम से होने वाले तेज शोर की वजह से भी कुछ मौतें हुईं। घायलों में से 17 लोग मलकजगिरी कमिश्नरेट इलाके से थे।
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डीजीपी ऑफिस ने क्या बताया?
डीजीपी ऑफिस में मीडिया से बात करते हुए आनंद ने बताया कि इस साल राज्य के गणेश पोर्टल पर 1.24 लाख गणेश मूर्तियों का रजिस्ट्रेशन हुआ था, जबकि पिछले साल यह संख्या 1.15 लाख थी। उन्होंने कहा कि घरों, अपार्टमेंट और दूसरी निजी जगहों पर रखी गई मूर्तियों को मिलाकर, पूरे राज्य में इनकी कुल संख्या 3.5 लाख से 4 लाख के बीच हो सकती है।
शुक्रवार सुबह तक कितने मूर्तियों का विसर्जन हुआ?
शुक्रवार सुबह तक लगभग 88,000 मूर्तियों का विसर्जन हो चुका था। बाकी मूर्तियों का विसर्जन शनिवार सुबह तक पूरा होने की उम्मीद है। आनंद ने बताया कि राजेंद्रनगर और शमशाबाद समेत कुछ इलाकों में धार्मिक कारणों और उन जोन के बड़े अधिकार क्षेत्र की वजह से जुलूस में देरी हुई।
कितने पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे?
बता दें कि अकेले हैदराबाद में ही 25,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। जिन्हें तेलंगाना स्टेट स्पेशल रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) और ऑक्टोपस कमांडो का सहयोग मिला। विसर्जन के मुख्य स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे, क्रेन और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तैनात की गई थीं। पूरी प्रक्रिया की निगरानी कमांड और कंट्रोल सेंटरों के जरिए की जा रही थी।
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पुलिसकर्मी भी हादसे का हुआ शिकार
बता दें कि डीजीपी सीवी आनंद ने दुख जताया कि तेलंगाना में गणेश विसर्जन के जश्न के दौरान कई जगहों पर दुखद घटनाएं हुईं। वहीं, मरने वालों में न्यू कोठागुडेम के सब-इंस्पेक्टर (एसआई) वेंकन्ना भी शामिल थे, जो विसर्जन ड्यूटी के लिए हैदराबाद आए थे।
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साइबराबाद इलाके के पटनचेरू में छह लोगों की मौत हुई। जबकि शुक्रवार तड़के खैरताबाद में शिवा नाम के एक व्यक्ति की मौत हो गई। निर्मल में दिल का दौरा पड़ने से एक और व्यक्ति की मौत की खबर मिली। आनंद ने कहा कि डीजे सिस्टम से होने वाले तेज शोर की वजह से भी कुछ मौतें हुईं। घायलों में से 17 लोग मलकजगिरी कमिश्नरेट इलाके से थे।
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डीजीपी ऑफिस ने क्या बताया?
डीजीपी ऑफिस में मीडिया से बात करते हुए आनंद ने बताया कि इस साल राज्य के गणेश पोर्टल पर 1.24 लाख गणेश मूर्तियों का रजिस्ट्रेशन हुआ था, जबकि पिछले साल यह संख्या 1.15 लाख थी। उन्होंने कहा कि घरों, अपार्टमेंट और दूसरी निजी जगहों पर रखी गई मूर्तियों को मिलाकर, पूरे राज्य में इनकी कुल संख्या 3.5 लाख से 4 लाख के बीच हो सकती है।
शुक्रवार सुबह तक कितने मूर्तियों का विसर्जन हुआ?
शुक्रवार सुबह तक लगभग 88,000 मूर्तियों का विसर्जन हो चुका था। बाकी मूर्तियों का विसर्जन शनिवार सुबह तक पूरा होने की उम्मीद है। आनंद ने बताया कि राजेंद्रनगर और शमशाबाद समेत कुछ इलाकों में धार्मिक कारणों और उन जोन के बड़े अधिकार क्षेत्र की वजह से जुलूस में देरी हुई।
कितने पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे?
बता दें कि अकेले हैदराबाद में ही 25,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। जिन्हें तेलंगाना स्टेट स्पेशल रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) और ऑक्टोपस कमांडो का सहयोग मिला। विसर्जन के मुख्य स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे, क्रेन और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तैनात की गई थीं। पूरी प्रक्रिया की निगरानी कमांड और कंट्रोल सेंटरों के जरिए की जा रही थी।