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ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों की बैठक: गोवा से दिल्ली तक SIR पर फैसले; कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र पर दी सफाई
Sat, 26 Sep 2026 05:25 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 26 Sep 2026 05:25 PM IST
सार
चुनाव आयोग ने अंदरूनी कामकाज से जुड़े विवाद के बीच कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र और आईटी डिविजन की निगरानी को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा कि पत्र किसी नीति या आईटी डिविजन से संबंधित नहीं था और आईटी डिविजन की निगरानी कभी वापस नहीं ली गई। गोवा में एसआईआर से छूटे 97 मतदाताओं में से 81 ने फॉर्म-6 भर दिया है। वहीं एसआईआर पूरा होने के बाद भी छूटे मतदाताओं और नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात आयोग ने कही है।
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मतभेद के आरोपों पर चुनाव आयोग ने तोड़ी चुप्पी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की बैठक हुई है। इसी बीच चुनाव आयोग ने कई मुद्दों पर अपना पक्ष साफ किया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति या आईटी विभाग से जुड़ा मामला नहीं था, बल्कि आयोग में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के बीच कुछ फैसलों को लेकर मतभेद की बात सामने आई थी। दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। आयोग ने कहा है कि ऐसे नोट और अलग-अलग सुझाव आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और पिछले एक साल में आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किस बारे में था?
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति या उसके आईटी डिविजन से जुड़ा नहीं था। चुनाव आयोग के मुताबिक, यह पत्र प्रतिनियुक्ति पर आयोग में काम कर रहे एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। यानी आयोग ने इस पत्र को अपनी किसी चुनावी नीति या आईटी व्यवस्था में बदलाव से जोड़ने की बात को खारिज किया है। संबंधित अधिकारी ने काम के पुनर्वितरण से जुड़े जो आदेश जारी किए थे, उन्हें वास्तव में लागू नहीं किया गया। दोनों चुनाव आयुक्तों के आदेश के बाद काम के पुनर्वितरण वाले आदेशों को लागू नहीं किया गया था। आयोग के मुताबिक, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की आईटी डिविजन पर निगरानी वास्तव में कभी वापस नहीं ली गई। यानी आईटी डिविजन की निगरानी हटाए जाने की बात को आयोग ने सही नहीं माना है।
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गोवा के 97 मतदाताओं का मामला क्या है?
गोवा में एसआईआर के दौरान छूटे 97 मतदाताओं को लेकर भी चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने बताया कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ को इन मतदाताओं के घर-घर जाकर उनके फॉर्म लेने का निर्देश दिया है। आयोग के मुताबिक, 97 में से 81 मतदाता पहले ही फॉर्म-6 भर चुके हैं, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा सके। इसका मतलब है कि एसआईआर के दौरान नाम छूट जाने के बाद भी मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का रास्ता खुला है।
यह भी पढ़ें: रील्स में दिखाया, चोरों ने घर खाली कर दिया: यूट्यूबर के घर 148 तोले सोने की चोरी; क्या है पूरा मामला?
एसआईआर पूरा होने के बाद छूटे नाम कैसे जुड़ेंगे?
चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर अब तक 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हो चुका है, जिनमें बिहार और पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं। आयोग ने कहा कि एसआईआर के दौरान या उसके बाद किसी व्यक्ति का नाम छूट गया है तो वह संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी ईआरओ के पास नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। यह सुविधा युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं के लिए भी उपलब्ध है। आयोग ने सीईओ, डीईओ और ईआरओ को ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
दिल्ली और महाराष्ट्र में क्या बदला?
चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा भी बढ़ाई है। आयोग के मुताबिक, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की तारीख 12 अक्टूबर 2026 और इनके निपटारे की तारीख 10 नवंबर 2026 कर दी गई है।
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एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के बीच कुछ फैसलों को लेकर मतभेद की बात सामने आई थी। दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। आयोग ने कहा है कि ऐसे नोट और अलग-अलग सुझाव आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और पिछले एक साल में आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
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कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किस बारे में था?
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति या उसके आईटी डिविजन से जुड़ा नहीं था। चुनाव आयोग के मुताबिक, यह पत्र प्रतिनियुक्ति पर आयोग में काम कर रहे एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। यानी आयोग ने इस पत्र को अपनी किसी चुनावी नीति या आईटी व्यवस्था में बदलाव से जोड़ने की बात को खारिज किया है। संबंधित अधिकारी ने काम के पुनर्वितरण से जुड़े जो आदेश जारी किए थे, उन्हें वास्तव में लागू नहीं किया गया। दोनों चुनाव आयुक्तों के आदेश के बाद काम के पुनर्वितरण वाले आदेशों को लागू नहीं किया गया था। आयोग के मुताबिक, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की आईटी डिविजन पर निगरानी वास्तव में कभी वापस नहीं ली गई। यानी आईटी डिविजन की निगरानी हटाए जाने की बात को आयोग ने सही नहीं माना है।
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गोवा के 97 मतदाताओं का मामला क्या है?
गोवा में एसआईआर के दौरान छूटे 97 मतदाताओं को लेकर भी चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने बताया कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ को इन मतदाताओं के घर-घर जाकर उनके फॉर्म लेने का निर्देश दिया है। आयोग के मुताबिक, 97 में से 81 मतदाता पहले ही फॉर्म-6 भर चुके हैं, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा सके। इसका मतलब है कि एसआईआर के दौरान नाम छूट जाने के बाद भी मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का रास्ता खुला है।
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एसआईआर पूरा होने के बाद छूटे नाम कैसे जुड़ेंगे?
चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर अब तक 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हो चुका है, जिनमें बिहार और पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं। आयोग ने कहा कि एसआईआर के दौरान या उसके बाद किसी व्यक्ति का नाम छूट गया है तो वह संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी ईआरओ के पास नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। यह सुविधा युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं के लिए भी उपलब्ध है। आयोग ने सीईओ, डीईओ और ईआरओ को ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
दिल्ली और महाराष्ट्र में क्या बदला?
चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा भी बढ़ाई है। आयोग के मुताबिक, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की तारीख 12 अक्टूबर 2026 और इनके निपटारे की तारीख 10 नवंबर 2026 कर दी गई है।