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किसानों की कर्जमाफी पर 32,000 करोड़ खर्च करेगी तेलंगाना सरकार

Wed, 05 Jun 2019 10:57 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: Sneha Baluni Updated Wed, 05 Jun 2019 10:57 AM IST
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Telangana government is set to spend Rs 32,000 crore on farm loan waiver
प्रतीकात्मक तस्वीर

तेलंगाना सरकार किसानों की कर्जमाफी पर 32,000 हजार रुपये खर्च करेगी। यह देशभर के किसी भी राज्य द्वारा खर्च की जाने वाली अधिकतम राशि है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश ने कर्जमाफी के लिए अनुमानित लागत बहुत अधिक दी है लेकिन असल आवंटन बहुत कम हुआ। वहीं तेलंगाना का अनुमानित और आवंटन आंकड़ा लगभग बराबर रहता है। राज्य स्तर बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की हालिया रिपोर्ट ने तेलंगाना की अनुमानित लागत 32,000 करोड़ रुपये बताई है। 

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कर्जमाफी का यह आंकड़ा 2014-15 में 17,000 करोड़ रुपये था। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह राशि इसलिए बढ़ी है क्योंकि पिछली बार की तुलना में ज्यादा किसानों ने कर्ज लिया है क्योंकि बहुत सी राजनीतिक पार्टियों ने 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में ज्यादा से ज्यादा किसानों के कर्जमाफी की बात कही थी। उन्होंने कहा, 'यह बहुत बड़ी राशि है। पिछली बार 17,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।'
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एसएलबीसी ने अनुमानित लागत (पात्रता के लिए कट-ऑफ तारीख 11 दिसंबर, 2018 है) दी है। अधिकारी अब छोटे और सीमांत किसानों के लिए छूट लागू करने पर विचार कर रहे हैं, जिन्होंने एक झटके में 50,000 रुपये से कम का कर्ज लिया। वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार 42 लाख किसानों को राज्य में कर्जमाफी का फायदा मिलेगा। तेलंगाना और पड़ोसी आंध्र प्रदेश इस योजना को 2014-15 से लागू कर रहे हैं।
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कर्जमाफी से आंध्र प्रदेश पर वार्षिक बोझ 16,975 करोड़ का पड़ता है। कृषि विभाग के अधिकारी ने कहा, 'तेलंगाना अकेला ऐसा राज्य है जो पिछले चार सालों से सफलतापूर्वक किसान कर्जमाफी योजना को लागू कर रहा है।' महाराष्ट्र ने 2017-18 के दौरान इस योजना को शुरू किया था। उसने अनुमानित लागत 34,000 करोड़ रुपये रखी थी लेकिन पिछले साल तक केवल 25,000 करोड़ रुपये खर्च किए। उत्तर प्रदेश ने 34,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत रखी थी लेकिन वह केवल 24,000 करोड़ रुपये खर्च कर पाया।


एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने दावा किया, 'हालांकि तेलंगाना परियोजना की अनुमानित और खर्च हुई रकम पिछले तीन सालों से 16,000 करोड़ रुपये रही है।' सबसे ज्यादा कर्नाटका में अनुमानित और खर्च की गई रकम में भिन्नता देखने को मिली। यहां 42,000 हजार करोड़ रुपये का अनुमान लगाया था और केवल 14,508 करोड़ रुपये खर्च हुए। पड़ोसी राज्य तमिलनाडु ने 2016-17 में परियोजना को शुरू किया था और केवल 1,500 करोड़ रुपये खर्च किए।


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