बीएसएफ को बदनाम कर दिया था तेज बहादुर ने, क्यों छिपाई रिमोट लोडिंग बॉर्डर की ये सच्चाई
बीएसएफ के पूर्व एडीजी संजीव कृष्ण सूद कहते हैं, तेज बहादुर ने दाल में पानी तो दिखा दिया, लेकिन उसके साथ मिली दूसरी अच्छी डिश का जिक्र तक नहीं किया। उस जगह पर सारा राशन सेना से सप्लाई होता था...
बीएसएफ के पूर्व एडीजी संजीव कृष्ण सूद कहते हैं, तेज बहादुर ने दाल में पानी तो दिखा दिया, लेकिन उसके साथ मिली दूसरी अच्छी डिश का जिक्र तक नहीं किया। उस जगह पर सारा राशन सेना से सप्लाई होता था...
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बीएसएफ के बर्खास्त सिपाही तेज बहादुर की वह याचिका सुप्रीम सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दी है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव को चुनौती दी थी। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी उनकी याचिका खारिज हो गई थी। बीएसएफ के पूर्व एडीजी संजीव कृष्ण सूद कहते हैं कि तेज बहादुर ने बीएसएफ को बदनाम कर दिया। उन्होंने यह नहीं बताया कि वे जिस रिमोट लोडिंग बॉर्डर पर तैनात थे, वहां की सच्चाई क्या थी।
तेज बहादुर ने दाल में पानी तो दिखा दिया, लेकिन उसके साथ मिली दूसरी अच्छी डिश का जिक्र तक नहीं किया। उस जगह पर सारा राशन सेना से मिलता था। अगर वह सिपाही अपनी बात शालीनता से बीएसएफ के प्रोटोकॉल के अनुसार, वरिष्ठ अफसरों के सामने रखता तो अवश्य सुनवाई होती। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और वह एक जवान की राह से दूर होता चला गया।
बतौर एसके सूद, तेज बहादुर यादव ने उस वीडियो में अच्छे खाने की बात नहीं की। उसने ये नहीं बताया कि अभी तक नौकरी में उसे कितनी बार रिमोट लोडिंग बॉर्डर पर पोस्टिंग मिली है। हाई एल्टीट्यूड वाली जगहों पर कुछ दिक्कतें संभव हैं, लेकिन इसके बावजूद जवानों की डाइट को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है।
जिस जगह पर तेज बहादुर तैनात था, वहां बीएसएफ को सेना से राशन सप्लाई होता है। कई बार यह होता है कि नियमित कुक छुट्टी पर गया हो। वह बीमार हो सकता है या उसे किसी दूसरी ड्यूटी पर तैनात कर दिया जाए। बॉर्डर पर ये सब होता रहता है। कोई ऐसी परिस्थिति भी संभव है कि उस दिन किसी सिपाही ने ही खाना तैयार किया हो।
छोटी पोस्ट पर कभीकभार जवान भी खाना बना लेते हैं। ये संभव है कि उस दिन नियमित कुक की ड्यूटी किसी जवान ने संभाली हो। ऐसे स्थिति में तेज बहादुर का आपा खोना, यह बात समझ नहीं आती है। सूद बताते हैं कि मान लो एक समय खाने में कुछ कमी रह भी गई हो, लेकिन दूसरे टाइम का खाना तो अच्छा रहता है। नॉन वेज भी अच्छी गुणवत्ता का मिलता है। वह सब सेना की तरफ से ही मिलता है।
तेज बहादुर का मीडिया में जाकर अपनी बात कहना गलत था। अगर वह बीएसएफ में सीओ या दूसरे अधिकारी से एक निर्धारित फॉर्मेट में शिकायत देते तो शिकायत पर पक्का कार्रवाई होती। बीएसएफ में ऐसे मामले को बहुत गंभीरता से लिया जाता है।