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करुणानिधि जैसा रिकॉर्ड भारत में किसी के पास नहीं, इस कारण हमेशा पहनते हैं पीला वस्त्र

Sat, 28 Jul 2018 01:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 28 Jul 2018 01:46 PM IST
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Tamilnadu dmk president m Karunanidhi Political journey

एम. करुणानिधि यानी मुत्तुवेल करूणानिधि तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (डीएमके) पार्टी के अध्यक्ष होने के साथ-साथ तमिल सिनेमा जगत के एक प्रसिद्ध नाटककार और पटकथा लेखक भी हैं। कला के प्रति उनकी विद्वता को देखते हुए उनके समर्थक उन्हें 'कलाईनार' कहकर संबोधित करते हैं। कलाईनार एक तमिल शब्द है, जिसका मतलब होता है 'कला का विद्वान'। 

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करुणानिधि ने तमिल फिल्म उद्योग में एक पटकथा लेखक के रूप में अपने करियर का शुभारंभ किया था। लेकिन अपनी बुद्धि और भाषण कौशल के माध्यम से वे बहुत जल्द एक राजनेता बन गए। जस्टिस पार्टी के अलगिरिस्वामी के एक भाषण से प्रेरित होकर उन्होंने महज 14 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश किया था और तब से लेकर अब तक वो तमिलनाडु की राजनीति में बने हुए हैं। एक बुद्धिजीवी होने के बावजूद बृहस्पति ग्रह शान्ति के लिए वो हमेशा पीला वस्त्र पहनते हैं।  
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60 साल के राजनीतिक करियर में 5 बार बने मुख्यमंत्री 

94 वर्षीय करुणानिधि अपने 60 साल के राजनीतिक करियर में पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे हैं। वह पहली बार साल 1957 में तमिलनाडु विधानसभा के लिए चुने गए थे और वर्ष 1969 में तत्कालीन डीएमके अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अन्नादुरई की मौत के बाद मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद साल 1971, 1989, 1996 और 2006 में भी वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। अपने पूरे राजनीतिक काल में उन्होंने अपनी भागीदारी वाले हर चुनाव में अपनी सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। ऐसा करने वाले वह देश के इकलौते नेता हैं। 

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हिंदी विरोधी प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर जेल भी गए

करुणानिधि ने अपने राजनीति की शुरुआत हिंदी विरोधी आंदोलन से की थी। कल्लाकुडी में हिंदी विरोधी प्रदर्शन में उनकी भागीदारी, तमिल राजनीति में अपनी जड़ मजबूत करने में करुणानिधि के लिए मददगार साबित होने वाला पहला प्रमुख कदम था। इस औद्योगिक नगर को उस समय उत्तर भारत के एक शक्तिशाली मुग़ल के नाम पर डालमियापुरम कहा जाता था। विरोध प्रदर्शन में करुणानिधि और उनके साथियों ने रेलवे स्टेशन से हिंदी नाम को मिटा दिया था और रेलगाड़ियों के मार्ग को रोकने के लिए पटरी पर लेट गए थे। इस विरोध प्रदर्शन में दो लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद करुणानिधि को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। 

भ्रष्टाचार के भी लग चुके हैं आरोप 

करुणानिधि पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लग चुके हैं। उन पर सरकारिया कमीशन द्वारा वीरानम परियोजना के लिए निविदाएं आवंटित करने में भष्टाचार का आरोप लगाया गया था। इस मामले में साल 2001 में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि करुणानिधि और उनके बेटे एम. के. स्टालिन के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिलने के कारण बाद में यह मामला खत्म हो गया था। 

भगवान राम को लेकर दिया था विवादित बयान 

Tamilnadu dmk president m Karunanidhi Political journey

करुणानिधि ने भगवान राम पर विवादित बयान देते हुए उनके वजूद पर ही सवाल खड़े कर दिए थे। उन्होंने कहा था 'कुछ लोग कहते हैं कि 17 लाख वर्ष पहले यहां एक व्यक्ति था, जिसका नाम राम था। उसने बिना छुए राम सेतु का निर्माण किया था। कौन है यह राम? किस इंजीनियरिंग कॉलेज से उसने स्नातक किया है? इसका किसी के पास कोई प्रमाण है?' इसपर खूब बवाल भी हुआ था। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने उन पर धार्मिक भेदभाव का भी आरोप लगाया था। 

एलटीटीई के साथ संबंधों को लेकर भी रहे हैं चर्चा में 

प्रतिबंधित संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी एलटीटीई के साथ संबंधों को लेकर भी करुणानिधि चर्चा में रहे हैं। ये वहीं संगठन है जिसने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या करवाई थी। करुणानिधि पर एलटीटीई को बढ़ावा देने का आरोप लगा था। यह आरोप राजीव गांधी की हत्या की जांच करने वाले जस्टिस जैन कमीशन की रिपोर्ट में लगाया गया था। अप्रैल 2009 में करुणानिधि ने एक विवादास्पद बयान देकर इस मामले को और तूल दे दिया था। उन्होंने कहा था 'एलटीटीई चीफ प्रभाकरण मेरा अच्छा दोस्त है।' हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि राजीव गांधी की हत्या के लिए भारत एलटीटीई को कभी माफ नहीं कर सकता। 

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