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Tamil Nadu: मंदिर की मरम्मत के दौरान मजदूरों को मिला खजाना, जमीन के अंदर से मिले 103 प्राचीन सोने के सिक्के
Tue, 04 Nov 2025 04:06 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Tue, 04 Nov 2025 04:06 PM IST
सार
तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले में जवादी पहाड़ियों के पास स्थित एक शिव मंदिर की मरम्मत के दौरान मिट्टी के बर्तन में 103 प्राचीन सोने के सिक्के मिले। पुलिस के अनुसार, मंदिर चोल वंश के राजा राजराजा चोलन तृतीय के काल का माना जा रहा है।
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मंदिर की मरम्मत के दौरान मिला खजाना
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले में इतिहास से जुड़ी एक बड़ी खोज हुई है। सोमवार को जलादी पाहाड़ियों के पास स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर में मरम्मत कार्य के दौरान मजदूरों को मिट्टी के बर्तन में छिपे 103 प्राचीन सोने के सिक्के मिले। यह मंदिर कोविलूर गांव में स्थित है और इसकी पहचान चोल वंश के काल से जुड़ी मानी जा रही है। पुलिस ने बताया कि सिक्कों की बरामदगी के बाद मंदिर परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
पोलूर पुलिस थाने के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह खोज सोमवार को उस समय हुई जब मंदिर के गर्भगृह (संक्तम संक्टोरम) की मरम्मत का काम चल रहा था। काम के दौरान मजदूरों को मिट्टी का एक बर्तन मिला, जिसके अंदर से 103 सोने के सिक्के बरामद हुए। तुरंत पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई। बाद में राजस्व विभाग और हिंदू धार्मिक एवं चैरिटेबल एंडोमेंट्स विभाग ने इन सिक्कों को अपने कब्जे में ले लिया।
मंदिर का इतिहास और महत्व
पुलिस अधिकारी के अनुसार, यह मंदिर कई सौ साल पुराना है और माना जाता है कि इसे चोल वंश के राजा राजराजा चोलन तृतीय के शासनकाल में बनवाया गया था। चोल काल अपने स्थापत्य, मंदिर निर्माण और कला के लिए प्रसिद्ध रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मंदिर के गर्भगृह की मरम्मत के दौरान जो मिट्टी का बर्तन मिला, वह संभवतः उस युग का हो सकता है। इस खोज ने इतिहासकारों में नई उत्सुकता जगा दी है।
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प्रशासनिक कार्रवाई जारी
मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। राजस्व विभाग के अधिकारियों और हिंदू धार्मिक एवं चैरिटेबल एंडोमेंट्स की टीम ने मौके पर पहुंचकर सिक्कों की गिनती की और उन्हें सरकारी अभिरक्षा में रखा। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया है। अधिकारियों ने कहा कि आगे की जांच में सिक्कों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उनकी धातु संरचना का पता लगाया जाएगा।
मामले पर क्या बोले विशेषज्ञ?
स्थानीय लोग इस खोज से उत्साहित हैं और इसे शुभ संकेत मान रहे हैं। वहीं, पुरातत्वविदों का कहना है कि यह खोज तमिलनाडु के प्राचीन धार्मिक और आर्थिक इतिहास को समझने में अहम साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये सिक्के संभवतः मंदिर में अर्पण किए गए हों या संकट काल में छिपा दिए गए हों। राज्य सरकार ने हिंदू धार्मिक एवं चैरिटेबल एंडोमेंट्स विभाग को निर्देश दिया है कि सिक्कों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए और इस खजाने का इतिहास विस्तार से सामने लाया जाए।
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पोलूर पुलिस थाने के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह खोज सोमवार को उस समय हुई जब मंदिर के गर्भगृह (संक्तम संक्टोरम) की मरम्मत का काम चल रहा था। काम के दौरान मजदूरों को मिट्टी का एक बर्तन मिला, जिसके अंदर से 103 सोने के सिक्के बरामद हुए। तुरंत पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई। बाद में राजस्व विभाग और हिंदू धार्मिक एवं चैरिटेबल एंडोमेंट्स विभाग ने इन सिक्कों को अपने कब्जे में ले लिया।
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मंदिर का इतिहास और महत्व
पुलिस अधिकारी के अनुसार, यह मंदिर कई सौ साल पुराना है और माना जाता है कि इसे चोल वंश के राजा राजराजा चोलन तृतीय के शासनकाल में बनवाया गया था। चोल काल अपने स्थापत्य, मंदिर निर्माण और कला के लिए प्रसिद्ध रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मंदिर के गर्भगृह की मरम्मत के दौरान जो मिट्टी का बर्तन मिला, वह संभवतः उस युग का हो सकता है। इस खोज ने इतिहासकारों में नई उत्सुकता जगा दी है।
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प्रशासनिक कार्रवाई जारी
मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। राजस्व विभाग के अधिकारियों और हिंदू धार्मिक एवं चैरिटेबल एंडोमेंट्स की टीम ने मौके पर पहुंचकर सिक्कों की गिनती की और उन्हें सरकारी अभिरक्षा में रखा। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया है। अधिकारियों ने कहा कि आगे की जांच में सिक्कों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उनकी धातु संरचना का पता लगाया जाएगा।
मामले पर क्या बोले विशेषज्ञ?
स्थानीय लोग इस खोज से उत्साहित हैं और इसे शुभ संकेत मान रहे हैं। वहीं, पुरातत्वविदों का कहना है कि यह खोज तमिलनाडु के प्राचीन धार्मिक और आर्थिक इतिहास को समझने में अहम साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये सिक्के संभवतः मंदिर में अर्पण किए गए हों या संकट काल में छिपा दिए गए हों। राज्य सरकार ने हिंदू धार्मिक एवं चैरिटेबल एंडोमेंट्स विभाग को निर्देश दिया है कि सिक्कों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए और इस खजाने का इतिहास विस्तार से सामने लाया जाए।
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