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Tamil Nadu: मुख्यमंत्रियों के नाम वाली योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर, DMK ने फैसले का किया स्वागत
Wed, 06 Aug 2025 03:47 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Wed, 06 Aug 2025 03:47 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की योजनाओं में जीवित नेताओं के नाम, फोटो और पार्टी चिन्ह पर रोक लगाने वाले मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकार को योजनाएं प्रचारित करने का संवैधानिक अधिकार है। डीएमके ने फैसले का स्वागत किया और विपक्ष पर योजनाएं रोकने की साजिश का आरोप लगाया।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें तमिलनाडु सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में किसी जीवित व्यक्ति के नाम, पूर्व मुख्यमंत्रियों की तस्वीरें, वैचारिक नेताओं के फोटो और पार्टी चिन्हों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह आदेश संविधान के तहत सरकार की अभिव्यक्ति की आजादी और योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के अधिकार का उल्लंघन करता है। कोर्ट के फैसले से डीएमके सरकार को बड़ी राहत मिली है।
इस फैसले पर डीएमके के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी योजना का मुख्यमंत्री के नाम पर घोषित होना सामान्य बात है। विपक्ष सिर्फ इसलिए इन योजनाओं को रोकना चाहता है क्योंकि ये किसी व्यक्ति के नाम से जुड़ी हैं। लेकिन जनता को इससे फर्क नहीं पड़ता, वो एआईएडीएमके को तो वैसे भी वोट नहीं देगी। एलंगोवन ने आरोप लगाया कि एआईएडीएमके केवल राजनीति कर रही है, जबकि डीएमके सरकार लोगों के लिए काम कर रही है।
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मद्रास हाईकोर्ट का आदेश क्यों था विवादों में
मद्रास हाईकोर्ट ने एक आदेश देते हुए कहा था कि तमिलनाडु सरकार किसी भी सरकारी योजना में जीवित नेताओं के नाम या फोटो का इस्तेमाल नहीं कर सकती। कोर्ट ने यह भी कहा था कि पार्टी चिन्ह और वैचारिक नेताओं की छवियां योजनाओं में न दिखाई जाएं क्योंकि इससे जनता में पक्षपात का संदेश जा सकता है। हाईकोर्ट के फैसले को डीएमके सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके सरकार को दी बड़ी राहत, मद्रास हाईकोर्ट का आदेश पलटा
सुप्रीम कोर्ट ने दी तमिलनाडु सरकार को राहत
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि किसी योजना को प्रचारित करने का सरकार को संवैधानिक अधिकार है और अगर योजना किसी नेता के नाम पर है तो यह कोई असंवैधानिक बात नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी योजनाओं के प्रचार पर रोक लगाना न केवल अभिव्यक्ति की आज़ादी का हनन होगा बल्कि इससे योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने में भी रुकावट आएगी। इसलिए हाईकोर्ट का आदेश निरस्त किया जाता है।
ये भी पढ़ें- पीएम मोदी ने कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन किया, सरकारी मंत्रालयों-विभागों को मिला नया ठिकाना
राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति और गरमा सकती है। डीएमके इसे अपनी वैचारिक जीत बताएगी जबकि एआईडीएमके इस फैसले को 'लोकतंत्र के लिए खतरा' बताकर सियासी मुद्दा बना सकती है। हालांकि, कानूनी तौर पर अब राज्य सरकार को योजनाओं में पार्टी चिन्ह या नेताओं की फोटो दिखाने से कोई रोक नहीं है। लेकिन चुनावी माहौल में इसका असर किस ओर जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
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इस फैसले पर डीएमके के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी योजना का मुख्यमंत्री के नाम पर घोषित होना सामान्य बात है। विपक्ष सिर्फ इसलिए इन योजनाओं को रोकना चाहता है क्योंकि ये किसी व्यक्ति के नाम से जुड़ी हैं। लेकिन जनता को इससे फर्क नहीं पड़ता, वो एआईएडीएमके को तो वैसे भी वोट नहीं देगी। एलंगोवन ने आरोप लगाया कि एआईएडीएमके केवल राजनीति कर रही है, जबकि डीएमके सरकार लोगों के लिए काम कर रही है।
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#WATCH | Chennai | DMK Spokesperson TKS Elangovan says, "It is normal for a government to announce a scheme in the name of the Chief Minister... These people aim to halt these schemes for the benefit of the people, as they are in the name of some individual... People will not… https://t.co/Qk6qskej9E pic.twitter.com/i3E3PBE9oZ
— ANI (@ANI) August 6, 2025
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मद्रास हाईकोर्ट का आदेश क्यों था विवादों में
मद्रास हाईकोर्ट ने एक आदेश देते हुए कहा था कि तमिलनाडु सरकार किसी भी सरकारी योजना में जीवित नेताओं के नाम या फोटो का इस्तेमाल नहीं कर सकती। कोर्ट ने यह भी कहा था कि पार्टी चिन्ह और वैचारिक नेताओं की छवियां योजनाओं में न दिखाई जाएं क्योंकि इससे जनता में पक्षपात का संदेश जा सकता है। हाईकोर्ट के फैसले को डीएमके सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने दी तमिलनाडु सरकार को राहत
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि किसी योजना को प्रचारित करने का सरकार को संवैधानिक अधिकार है और अगर योजना किसी नेता के नाम पर है तो यह कोई असंवैधानिक बात नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी योजनाओं के प्रचार पर रोक लगाना न केवल अभिव्यक्ति की आज़ादी का हनन होगा बल्कि इससे योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने में भी रुकावट आएगी। इसलिए हाईकोर्ट का आदेश निरस्त किया जाता है।
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राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति और गरमा सकती है। डीएमके इसे अपनी वैचारिक जीत बताएगी जबकि एआईडीएमके इस फैसले को 'लोकतंत्र के लिए खतरा' बताकर सियासी मुद्दा बना सकती है। हालांकि, कानूनी तौर पर अब राज्य सरकार को योजनाओं में पार्टी चिन्ह या नेताओं की फोटो दिखाने से कोई रोक नहीं है। लेकिन चुनावी माहौल में इसका असर किस ओर जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
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