Tamil Nadu: 'कांग्रेस में महिलाओं को नहीं मिलती नेतृत्व की भूमिका', भाजपा में शामिल हुईं विधायक एस विजयधरणी
Tamil Nadu: विल्वनकोड से विधायक एस विजयधरणी शनिवार को भाजपा में शामिल हो गईं। वह इस बात से नाराज थीं कि न तो कांग्रेस ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उनके नाम पर विचार किया और न ही उन्हें विधायक दल का नेता बनाया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
तमिलनाडु कांग्रेस की तीन बार की विधायक एस विजयधरणी ने एक हफ्ते से चली अटकलों पर शनिवार को विराम लगा दिया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। विजयधरणी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अरविंद मेनन की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुईं।
इस दौरान उन्होंने कहा कि उनके इस कदम से तमिलनाडु में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पकड़ मजबूत होगी। विजयधरणी प्रसिद्ध तमिल कवि दिवंगत कविमणि देसिगा विनयागम पिल्लई के परिवार से आती हैं। उन्होंने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए केंद्र सरकार की प्रशंसा की। इसके साथ ही उन्होंने अफसोस भी जताया कि इनमें से कुछ योजनाओं को तमिलनाडु में लागू नहीं किया जा रहा है, जहां कांग्रेस की सहयोगी द्रमुक सत्ता में है।
उन्होंने महिलाओं पर खास ध्यान देने के लिए भाजपा की प्रशंसा की। भाजपा में शामिल होने से पहले उन्होंने 'एक्स' पर अपने इस्तीफा पत्र पोस्ट किया। इसमें उन्होंने लिखा, मैं कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सबंधित पदों से इस्तीफा दे रही हूं।
विल्वनकोड से विधायक विजयधरणी इस बात से नाराज थीं कि न तो कांग्रेस ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उनके नाम पर विचार किया और न ही उन्हें विधायक दल का नेता बनाया। कांग्रेस ने हाल ही में विधायक के. सेल्वापेरुंथागई को तमिलनाडु कांग्रेस समिति का प्रमुख नियुक्त किया है।
विजयधरणी ने कहा कि कांग्रेस में महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका नहीं दी जाती है। अब भी जो मुझसे जूनियर हैं, उन्हें विधायक दल का नेता बनाया गया है। केंद्र सरकार के समर्थन से अब मैं कन्याकुमारी के बुनियादी ढांचे की जरूरतों को पूरा कर पाऊंगी। विधयधरणी के भाजपा में आने से पार्टी को मजबूती मिल सकती है, क्योंकि हाल ही में अन्नाद्रमुक के भाजपा से संबंध तोड़ने के बाद उसे झटका लगा था। भाजपा 2019 के आम चुनाव में तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीट में से एक भी सीट पर नहीं जीत पाई थी।