तमिलनाडुः राज्यपाल के लिए विधेयक को मंजूरी देने की समयसीमा तय हो, स्टालिन सरकार का प्रस्ताव विधानसभा में पास
तमिलनाडु के मंत्री दुरई मुरुगन ने राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने राज्यपाल को तमिलनाडु के लोगों के हितों के खिलाफ कार्य करने से रोकने के लिए तमिलनाडु के राज्यपाल को उचित निर्देश जारी करने का आग्रह किया।
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तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के बीच चल रही खींचतान के बीच, सरकार ने सोमवार को राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया। इसमें केंद्र सरकार और राष्ट्रपति से आग्रह किया गया कि वे विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को एक निश्चित अवधि के भीतर स्वीकृति देने के लिए तुरंत तमिलनाडु के राज्यपाल को उचित निर्देश जारी करें।
बता दें, तमिलनाडु के मंत्री दुरई मुरुगन ने राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने तमिलनाडु की विधानसभा की विधायी शक्ति स्थापित करने और राज्यपाल को लोगों के हितों के खिलाफ कार्य करने से रोकने के लिए केंद्र सरकार और राष्ट्रपति से आग्रह किया गया कि वे विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को एक निश्चित अवधि के भीतर स्वीकृति देने के लिए तुरंत तमिलनाडु के राज्यपाल को उचित निर्देश जारी करें। वहीं,मुख्यमंत्री ने भी राष्ट्रपति से इस मामले में आदेश जारी करने का आग्रह किया। स्टालिन ने विधानसभा में कहा कि लोगों के हितों के खिलाफ जो लोग काम कर रहे हैं। उन्हें जल्द रोका जाना चाहिए।
इस प्रस्ताव के पक्ष में डीएमके और उसके सहयोगी दलों ने मतदान किया। वहीं, अन्नाद्रमुक विधायकों ने बोलने का समय नहीं देने का आरोप लगाया और सदन से बाहर चले गए।
अभिभाषण विवाद से बढ़ी है तनातनी
बता दें, बीते सोमवार को राज्यपाल आरएन रवि और सीएम एमके स्टालिन के बीच तनातनी बढ़ गई। जब विधानसभा सत्र के दौरान राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में कुछ प्रमुख अंशों को छोड़ दिया। यह अभिभाषण राज्य सरकार की ओर से तैयार किया गया था, जिसके बाद सीएम एमके स्टालिन ने इस पर खेद जताया और प्रस्ताव पास कर मूल भाषण को रिकॉर्ड पर लेने को कहा। इसके बाद राज्यपाल आरएन रवि ने सदन का बहिष्कार किया और बाहर चले गए थे।
डीएमके सांसद टीआर बालू ने बताया था कि मुख्यमंत्री द्वारा लिखा गया पत्र राज्य के कानून मंत्री एस रघुपति ने राष्ट्रपति को सौंपा है। उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया गया पत्र में क्या है? उन्होंने बस इतना कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने जो भी पत्र में लिखा है, उससे राष्ट्रपति को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने आगे कहा, विधानसभा में राज्यपाल ने जो कुछ भी किया, वह सदन के संवैधानिक प्रावधान व नियमों के विरुद्ध है।