{"_id":"6a7bf458d4831ba1d102168e","slug":"tamil-nadu-cm-vijay-to-pilot-assembly-resolution-urging-centre-to-maintain-lok-sabha-strength-at-543-2026-08-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Tamil Nadu: परिसीमन के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित, लोकसभा सीटें 543 रखने की मांग; डीएमके का भी समर्थन","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Tamil Nadu: परिसीमन के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित, लोकसभा सीटें 543 रखने की मांग; डीएमके का भी समर्थन
Wed, 12 Aug 2026 09:49 AM IST
नितिन गौतम
आईएएनएस, चेन्नई
आईएएनएस, चेन्नई
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 12 Aug 2026 09:49 AM IST
सार
तमिलनाडु के सीएम विजय ने आज विधानसभा में संभावित परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव में महिला आरक्षण का समर्थन किया गया है और जनसंख्या के आधार पर परिसीमन का विरोध किया गया है।
विज्ञापन
तमिलनाडु विधानसभा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्तावित परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पारित हो गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बुधवार को विधानसभा में एक विशेष प्रस्ताव पेश किया। इसमें ऐसे किसी भी परिसीमन का विरोध किया गया था, जिससे संसद में राज्य का मौजूदा प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। प्रस्ताव में केंद्र से लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 पर बरकरार रखने का आग्रह किया गया है।
यह प्रस्ताव 8 अगस्त को चेन्नई में मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में हुई सांसदों की एक परामर्श बैठक के कुछ दिनों बाद लाया गया। बैठक में परिसीमन से तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर चर्चा हुई थी। बैठक में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 पर स्थिर रखने और राज्यों के बीच मौजूदा संसदीय सीटों के हिस्से को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने का फैसला किया गया था।
सीएम विजय ने प्रस्ताव पेश कर क्या कहा?
प्रस्ताव पेश करने के बाद विधानसभा में बोलते हुए सीएम विजय ने कहा, 'महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण 2029 लोकसभा चुनाव में लागू किया जाना चाहिए। हालांकि लोकसभा की सीटें 543 ही रहनी चाहिए। महिलाओं के आरक्षण में देरी नहीं करनी चाहिए। तमिलनाडु में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया। महिलाओं को आरक्षण देना उन पर कोई अहसान नहीं है। यह सामाजिक न्याय की बात है।'
विज्ञापन
डीएमके ने किया समर्थन
तमिलनाडु के विपक्षी दल डीएमके ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा परिसीमन का क्या असर पड़ेगा, ये सबसे पहले देश को डीएमके ने बताया था। हमारा दृढ़ तौर पर मानना है कि परिसीमन का असर तमिलनाडु पर नहीं पड़ना चाहिए और हमारे सांसदों की संख्या कम नहीं होनी चाहिए। उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि अगले 25 वर्षों तक परिसीमन नहीं होना चाहिए।
एआईएडीएमके ने प्रस्ताव की टाइमिंग पर उठाए सवाल
हालांकि एआईएडीएमके ने टीवीके सरकार के प्रस्ताव पर ही सवाल उठाए। एआईएडीएमके नेता ई. पलानीस्वामी ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने परिसीमन विधेयक संसद में पेश करने की बात ही नहीं की है तो फिर तमिलनाडु सरकार इस मुद्दे पर जल्दबाजी दिखा रही है और ये सब सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परिसीमन में कुछ गलत नहीं है। हालांकि केंद्र सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि इससे किसी को नुकसान न हो। संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व मौजूदा 7.18 प्रतिशत रहना ही चाहिए।
लोकसभा की सीटें 543 पर स्थिर रखने की मांग
प्रस्ताव में कहा गया है कि कई दशकों से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच लोकसभा और विधानसभा सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना से जुड़ा रहा है। इस प्रस्ताव में अप्रैल 2026 में संसद में विफल हुए एक संविधान संशोधन विधेयक का भी जिक्र किया गया है। इस विधेयक में परिसीमन पर लंबे समय से लागू रोक खत्म करने, 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से परिसीमन कराने और लोकसभा की सदस्य संख्या में बड़ी वृद्धि का प्रस्ताव था।
जनसंख्या के आधार पर परिसीमन से दक्षिणी राज्यों को हो सकता है नुकसान
प्रस्ताव में उन खबरों पर चिंता जताई गई है, जिनमें कहा गया है कि ऐसा ही कोई संविधान संशोधन दोबारा संसद में लाया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि 1971 के बाद दर्ज की गई जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व पर विपरीत असर डाल सकता है। इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि जिन राज्यों ने केंद्र सरकार द्वारा प्रोत्साहित जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया और साथ ही आर्थिक विकास, स्वास्थ्य सेवाओं तथा कल्याण के संकेतकों में सुधार किया, उन्हें परिसीमन के जरिए नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
राज्यों को मौजूदा सीटों के आवंटन को फ्रीज रखने की मांग
प्रस्ताव में केंद्र से लोकसभा की कुल सदस्य संख्या स्थायी रूप से 543 पर बनाए रखने और राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा आवंटन को फ्रीज करने का आग्रह किया जाएगा। इसका उद्देश्य राज्यों का वर्तमान आनुपातिक प्रतिनिधित्व बनाए रखना है। इसके अलावा, प्रस्ताव में लोकसभा और राज्यसभा में प्रतिनिधित्व के मौजूदा अनुपात को बनाए रखने की मांग की गई है। साथ ही, मौजूदा 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का आग्रह किया गया है।
विज्ञापन
यह प्रस्ताव 8 अगस्त को चेन्नई में मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में हुई सांसदों की एक परामर्श बैठक के कुछ दिनों बाद लाया गया। बैठक में परिसीमन से तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर चर्चा हुई थी। बैठक में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 पर स्थिर रखने और राज्यों के बीच मौजूदा संसदीय सीटों के हिस्से को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने का फैसला किया गया था।
विज्ञापन
सीएम विजय ने प्रस्ताव पेश कर क्या कहा?
प्रस्ताव पेश करने के बाद विधानसभा में बोलते हुए सीएम विजय ने कहा, 'महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण 2029 लोकसभा चुनाव में लागू किया जाना चाहिए। हालांकि लोकसभा की सीटें 543 ही रहनी चाहिए। महिलाओं के आरक्षण में देरी नहीं करनी चाहिए। तमिलनाडु में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया। महिलाओं को आरक्षण देना उन पर कोई अहसान नहीं है। यह सामाजिक न्याय की बात है।'
विज्ञापन
डीएमके ने किया समर्थन
तमिलनाडु के विपक्षी दल डीएमके ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा परिसीमन का क्या असर पड़ेगा, ये सबसे पहले देश को डीएमके ने बताया था। हमारा दृढ़ तौर पर मानना है कि परिसीमन का असर तमिलनाडु पर नहीं पड़ना चाहिए और हमारे सांसदों की संख्या कम नहीं होनी चाहिए। उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि अगले 25 वर्षों तक परिसीमन नहीं होना चाहिए।
एआईएडीएमके ने प्रस्ताव की टाइमिंग पर उठाए सवाल
हालांकि एआईएडीएमके ने टीवीके सरकार के प्रस्ताव पर ही सवाल उठाए। एआईएडीएमके नेता ई. पलानीस्वामी ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने परिसीमन विधेयक संसद में पेश करने की बात ही नहीं की है तो फिर तमिलनाडु सरकार इस मुद्दे पर जल्दबाजी दिखा रही है और ये सब सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परिसीमन में कुछ गलत नहीं है। हालांकि केंद्र सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि इससे किसी को नुकसान न हो। संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व मौजूदा 7.18 प्रतिशत रहना ही चाहिए।
लोकसभा की सीटें 543 पर स्थिर रखने की मांग
प्रस्ताव में कहा गया है कि कई दशकों से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच लोकसभा और विधानसभा सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना से जुड़ा रहा है। इस प्रस्ताव में अप्रैल 2026 में संसद में विफल हुए एक संविधान संशोधन विधेयक का भी जिक्र किया गया है। इस विधेयक में परिसीमन पर लंबे समय से लागू रोक खत्म करने, 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से परिसीमन कराने और लोकसभा की सदस्य संख्या में बड़ी वृद्धि का प्रस्ताव था।
जनसंख्या के आधार पर परिसीमन से दक्षिणी राज्यों को हो सकता है नुकसान
प्रस्ताव में उन खबरों पर चिंता जताई गई है, जिनमें कहा गया है कि ऐसा ही कोई संविधान संशोधन दोबारा संसद में लाया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि 1971 के बाद दर्ज की गई जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व पर विपरीत असर डाल सकता है। इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि जिन राज्यों ने केंद्र सरकार द्वारा प्रोत्साहित जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया और साथ ही आर्थिक विकास, स्वास्थ्य सेवाओं तथा कल्याण के संकेतकों में सुधार किया, उन्हें परिसीमन के जरिए नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
राज्यों को मौजूदा सीटों के आवंटन को फ्रीज रखने की मांग
प्रस्ताव में केंद्र से लोकसभा की कुल सदस्य संख्या स्थायी रूप से 543 पर बनाए रखने और राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा आवंटन को फ्रीज करने का आग्रह किया जाएगा। इसका उद्देश्य राज्यों का वर्तमान आनुपातिक प्रतिनिधित्व बनाए रखना है। इसके अलावा, प्रस्ताव में लोकसभा और राज्यसभा में प्रतिनिधित्व के मौजूदा अनुपात को बनाए रखने की मांग की गई है। साथ ही, मौजूदा 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का आग्रह किया गया है।