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स्टालिन की आत्मकथा: 'आपातकाल के दौरान जेल एक यातना शिविर थी, पिता करुणानिधि ने त्याग की भावना से जेल भेजा था'

Sun, 20 Mar 2022 08:37 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 20 Mar 2022 08:37 PM IST
सार

स्टालिन ने अपनी आत्मकथा में 1976 में अपनी गिरफ्तारी के बाद जेल में बिताए गए समय को ‘यातना शिविर’ बताया है। तत्कालीन प्रधानमंक्पी इंदिरा गांधी की सरकार ने 1975 में देश में आपातकाल लगाया था, जो 1977 तक लागू रहा था।

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Tamil Nadu CM MK Stalin remembered emergency days in his autobiography saying jail was a torture camp news in Hindi
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन - फोटो : facebook/MKStalin

विस्तार

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की आत्मकथा 'उंगललिल ओरूवन' (आप में से एक) के पहले भाग का हाल ही में विमोचन किया गया था। इस किताब में उन्होंने आपातकाल के समय के बारे में भी बात की है। उन्होंने साल 1976 में अपनी गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय कारागार में डाले जाने की घटना के बारे में बात की है और जेल को 'यातना शिविर' बताया है। उन्होंने लिखा है कि मेरे पिता और द्रमुक के दिवंगत नेता एम करुणानिधि ने किसी संत की तरह मोह-माया से विरक्त होते हुए आपातकाल के दौरान मुझे पुलिस को सौंप दिया था।

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स्टालिन ने लिखा है कि हैरान कर देने वाली घटना होने के बाद भी इसने वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध व्यक्ति को किसी भी हालात का सामना करने की ताकत दी। उन्होंने लिखा है, 'उस दिन मुझे किसी भी चीज का सामना करने की शक्ति मिली।' तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 1975 में देश में आपातकाल लागू किया था। यह साल 1977 तक लागू रहा था। इस दौरान बड़े पैमाने पर विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। आपातकाल की यह अवधि देश में नागरिक स्वतंत्रताओं पर लगाई गई सख्त पाबंदियों को लेकर कुख्यात है।
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करुणानिधि के नेतृत्व वाली द्रमुक सरकार 31 जनवरी 1976 को बर्खास्त कर दी गई थी। इसके कुछ घंटे बाद के समय को याद करने हुए स्टालिन ने लिखा है कि पुलिस मेरी तलाश में मेरे गोपालपुरम आवास पर पहुंची थी लेकिन उस वक्त में मथुरानथरम कस्बे में था। करुणानिधि ने पुलिस से कहा था कि मैं शहर के बाहर हूं और अगले दिन लौटूंगा और उन्होंने खुद को गिरफ्तार करने की पेशकश की थी। बाकी लोगों को यह डर सता रहा था कि करुणानिधि को गिरफ्तार किए जा सकते हैं, लेकिन जेल की हवा मेरी ओर बह रही थी।
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स्टालिन के अनुसार, अगले दिन यानी एक फरवरी 1796 को जब मैं घर पहुंचा तो मेरे पिता ने मुझसे कहा कि तैयार हो जाओ, पुलिस तुम्हें ढूंढ रही है। मेरे घर लौटने के बाद करुणानिधि ने पुलिस को फोन से मेरे आने की सूचना दे दी थी जिसके बाद पुलिस मेरे घर पहुंची। स्टालिन ने किताब में लिखा है कि करुणानिधि ने पुलिस से कहा, 'स्टालिन यहां है, उसे ले जाइए।' उन्होंने कहा कि मेरे पिता ने त्याग की भावना के साथ मुझे जेल भेजा था। बता दें कि एमके स्टालिन की इस आत्मकथा का विमोचन हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने की थी।

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