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तमिलनाडु में अम्मा-करुणा के बिना होगी जंग, राज्य में सियासी ताकत बनने के लिए भाजपा ने लगाया जोर

Sat, 27 Feb 2021 01:34 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Sat, 27 Feb 2021 01:34 PM IST
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tamil nadu assembly election 2021 aidmk and dmk parties will contest bjp will focus on own more power
मतदान (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव इस बार नए तेवर और नए कलेवर में होगा। कारण साफ है, इस चुनाव में न तो दशकों तक राज्य की सियासत की धुरी रहे एम करुणानिधि होंगे और न ही उनकी धुर विरोधी रहीं जयललिता। एकबारगी ऐसा लगा था कि राज्य की सियासत में फिर से सितारों का बोलबाला रहेगा। मगर, अंतिम समय में सुपर स्टार रजनीकांत की राजनीति से दूरी बना लेना और कमल हासन की बेअसर उपस्थिति से अब इसकी संभावना न के बराबर है।


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बहरहाल करुणानिधि-जयललिता की अनुपस्थिति में भी जंग द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच ही तय है। पहले की तरह दोनों दल अपने पुराने साथियों के साथ चुनाव मैदान में होंगे। पहले अपने दम पर राज्य की सियासत का नब्ज टटोलने उतरने वाली भाजपा ने भी अन्नाद्रमुक का सहारा लिया है तो कांग्रेस पहले की तरह डीएमके के खेमे में है।

चुनाव में सत्ता बदलने की रही परंपरा
तमिलनाडु में हर पांच साल में सरकार बदलने की परंपरा रही है। हालांकि, बीते चुनाव में जयललिता की अगुआई में अन्नाद्रमुक ने इस मिथक को तोड़ दिया था। इससे पहले कई चुनावों में राज्य के मतदाता की एक बार करुणानिधि तो एक बार जयललिता पसंद बनते रहे थे।

इस बार मुश्किल में अन्नाद्रमुक
द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों दलों ने पार्टी के मुख्य चेहरे को खो दिए हैं। शुरुआती बगावत के बाद डीएमके की बागडोर स्टालिन के हाथ में आ गई है। पार्टी में फिलहाल सभी स्टालिन के साथ खड़े दिख रहे हैं। मगर अन्नाद्रमुक की स्थिति ऐसी नहीं है। जयललिता की मौत के बाद पार्टी कई धड़े में बंट गई है।
 
मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम पार्टी में अपनी पकड़ बनाने में नाकाम रहे हैं। इसी धड़ेबाजी के कारण बीते लोकसभा चुनाव में द्रमुक ने अन्नाद्रमुक का सूपड़ा साफ कर दिया। भाजपा पार्टी ने साल 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद इस दिशा में कई कोशिशें की। हालांकि द्रविड़ राजनीति के इस गढ़ में पार्टी को कुछ बड़ा हाथ नहीं लगा।

साल 2014 में मोदी लहर में 5.5 फीसदी वोट लाने वाली भाजपा 2019 में करीब दो फीसदी वोट गंवा बैठी। बहरहाल पार्टी की निगाहें इस चुनाव के जरिए अगला लोकसभा और विधानसभा चुनाव को साधने की है।

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