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पीएम मोदी के निर्देश पर चल रहे कई संत, लेकिन हमें सनातन परंपरा निभानी है : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

Sat, 17 Apr 2021 10:36 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Sat, 17 Apr 2021 10:36 PM IST
सार

  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बोले- पीएम जनसभा को संबोधित कर रहे हैं
  • कुंभ के समय गिरती हैं अमृत की बूंदे, इसे छोड़कर क्यों जाएं
  • कोरोना से मुक्ति, पर्यावरण शुद्धि के लिए दे रहे हैं एक करोड़ आहुति

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Swami Avimukteshwarananda Saraswati Interview, he interacted with Shashidhar Pathak over haridwar kumbh 2021
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सनातन धर्म परंपरा को शास्त्र के अनुरूप अडिग रहकर पूरा करने वाले संतों में गिने जाते हैं। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य, उनके उत्तराधिकारी भी हैं। हरिद्वार में कुंभ 2021 को लेकर भी एक बार फिर उन्होंने अपना अडिग रवैया दिखाया है। अविमुक्तेश्वरानंद ने अमर उजाला डॉट कॉम के लिए शशिधर पाठक से विशेष बातचीत में कहा कि उनका यह स्वभाव किसी संत का निर्मम हठ नहीं, बल्कि सनातन परंपरा का निर्वहन है। पेश हैं स्वामी से किए गए सवाल और उनके जवाब...

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प्रश्न- क्या आप अब भी कुंभ को जारी रखने के पक्ष में हैं?

जवाब- कुंभ ज्योतिष गणना के अनुसार आता-जाता है। यह पर्व है। इसका एक कालक्रम है। इसका किसी के आने और जाने से फर्क नहीं पड़ता। यह समय की गणना पर आधारित है और इस तरह से खत्म नहीं होगा। हम इसे जारी रखेंगे। यह कुंभ 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के दिन शाही स्नान के बाद ही समाप्त होगा।
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प्रश्न- जूना अखाड़ा प्रमुख अवधेशानंद गिरी ने प्रधानमंत्री के फोन के बाद कुंभ के समापन की घोषणा कर दी है। दो अखाड़ों ने पहले ही ऐसा किया है? आप अड़े हुए हैं?
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जवाब- प्रधानमंत्री मोदी ने कल फोन करके कुंभ को प्रतीकात्मक रखने के लिए कहा, लेकिन आज वह पश्चिम बंगाल में आसनसोल गए। जनसभा की, लाखों लोगों की भीड़ जुटाई। मेरे विचार में प्रधानमंत्री को पहले इसका जवाब देना चाहिए।

प्रश्न- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के राजनेता, प्रशासक (राजा सदृश्य) हैं। उनसे एक समाज की सृजनात्मकता, रचनात्मकता, लोक कल्याण की भावना से तपोरत संत की क्या तुलना? कुछ संतों ने प्रधानमंत्री के फोन पर कुंभ समाप्ति की घोषणा भी कर दी है?

जवाब- दुर्भाग्य! संत समाज अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर चल रहा है। मुझे इस स्थिति पर अफसोस है। जहां कुंभ होता है, वहां अमृत की बूंदें गिरती हैं। यहां भी गिरी हैं। इसलिए हम अमृत छोड़कर कहीं अन्यत्र क्यों जाएं। दूसरी बात। यहां से हटकर जहां भी जाएंगे, देश में वहां कोरोना है। इसलिए सबसे अच्छा यह है कि हम यहीं कोरोना से बचाव का उपाय और सावधानी बरतते हुए यहां पर रहें।


प्रश्न- देश के दूसरे हिस्से से आ रही जनता और कुंभ में उमड़ रही भीड़ को लेकर क्या कहेंगे?

जवाब- भीड़ कहां है। अब तो कुंभ खाली पड़ा है। कोई आए देखे, बताए कि अब भीड़ कहां है?

प्रश्न- क्या कहीं यह एक संत का हठयोग तो नहीं है?

जवाब- यह संत का अपनी परंपरा, नियम, पूजा, पद्धति  का संयमित तरीके से धर्म और शास्त्र के अनुकूल निर्वहन है। हम इसका निरंतर पालन करते रहेंगे।

प्रश्न- शास्त्रयुक्त परंपरा? कहा गया है कि आपात काल में मर्यादा में ढील दे देनी चाहिए?

जवाब- हम यहां यज्ञ कर रहे हैं। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के निर्देशानुसार यह यज्ञ कर रहे हैं। इसमें एक करोड़ आहुतियां दे रहे हैं। ताकि देश के भीतर से व्याप्त भय की समाप्ति हो, संक्रमण खत्म हो, पर्यावरण शुद्ध हो। संसार में शांति, संतुष्टि और समृद्धि की स्थापना तथा लोककल्याण हो।

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