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Karnataka: 'भाजपा को सत्ता में लाने के लिए आलोचना सहन कर रहा', पार्टी नेताओं की टिप्पणियों पर बोले विजयेंद्र
Tue, 17 Sep 2024 04:32 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवमोगा (कर्नाटक)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवमोगा (कर्नाटक)
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 17 Sep 2024 04:32 PM IST
सार
Karnataka: कर्नाटक के भाजपा अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने कहा कि वह कर्नाटक को भाजपा का दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार साबित करने की दिशा में काम कर रहे हैं और इसके लिए वे सभी वरिष्ठ नेताओं को भरोसे में लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
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बी. वाई. विजयेंद्र
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
कर्नाटक के भाजपा अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने मंगलवार को कहा कि पार्टी के हित में उन्होंने सभी आलोचनाओं को सहन किया है और आगामी चुनाव में पार्टी को स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में लाने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहे हैं। विजयेंद्र ने उन आलोचनाओं को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भरोसे में नहीं ले रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के पुत्र होने पर गर्व महसूस करते हैं। लेकिन इसको लेकर उन्हें अहंकार नहीं है।
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पार्टी बसनगौड़ा पाटिल यतनाल और रमेश जारकीहोली जैसे वरिष्ठ नेता विजयेंद्र की नेतृत्व क्षमता पर खुलकर सवाल उठा चुके हैं। उनका आरोप है कि विजयेंद्र समझौते वाली राजनीति कर रहे हैं और पार्टी को अपने औरक येदियुरप्पा के नियंत्रण में रखना चाहते हैं। विजयेंद्र ने कहा, "वरिष्ठ नेताओं ने जो सवाल उठाए हैं, वे सार्वजनिक रूप से हैं, चारदीवारी के भीतर नहीं। पार्टी के हित में मैंने सब कुछ सहन किया है और मेरा लक्ष्य भाजपा को स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में लाना है। मैं इसी दिशा में आगे बढ़ रहा हूं।"
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उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जिम्मेदारी दी है, जिसे वे ताकत से ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं। उन्होंने कहा, मेरे पास इस जिम्मेदारी को निभाने की पूरी क्षमता है और मैं इसे अच्छे से निभा रहा हूं। विजयेंद्र ने यह भी कहा कि वे इस समय कर्नाटक को भाजपा का दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार साबित करने की दिशा में काम कर रहे हैं और इसके लिए वे सभी वरिष्ठ नेताओं को भरोसे में लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
इस बीच, जारकीहोली ने सोमवार को आरोप लगाया कि विजयेंद्र ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सलाह को नजरअंदाज किया है और पार्टी को भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी में 15-20 नेताओं का सामूहिक नेतृत्व होना चाहिए और उन्हें विभिन्न कार्य सौंपे जाने चाहिए। पार्टी में बढ़ती गुटबाजी के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने हाल ही में विभिन्न गुटों के बीच शांति स्थापित करने की कोशिश की है और उनके साथ एक बैठक की है।